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softening of rules for those coming to britain on the job aljwnt

नौकरी पर ब्रिटेन आने वालों के लिए नियमों में नरमी

  • Updated on 10/27/2020

नौकरी पर ब्रिटेन (Britain) आने वालों के लिए सरकार ने इमीग्रेशन नियमों में बड़ी भारी नरमी की घोषणा की है। अब जिस व्यक्ति के पास किसी संस्था अथवा कारोबारी संस्थान द्वारा दिए गए नियुक्ति पत्र के साथ वाॢषक वेतन 20,480 पौंड का प्रमाण होगा वह ब्रिटेन आने के लिए आवेदन दे सकेगा। इससे पहले नौकरी के लिए वही व्यक्ति वीजा आवेदन दे सकता था जिसके पास किसी ब्रिटिश कारोबारी संस्था द्वारा जारी किए गए नियुक्तिपत्र में सालाना वेतन 35,800 हो। 

वेतन राशि में इतनी बड़ी कमी इमीग्रेशन नियमों में की गई एक जबरदस्त तबदीली है। इसके साथ ही जो व्यक्ति इमीग्रेशन के इन नियमों के अधीन यहां आएगा उसे 6 वर्ष निरंतर इस देश में रहने के बाद पक्के तौर पर यूनाइटिड किंगडम का नागरिक बन जाने का अधिकार भी होगा। 

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नया ‘प्वाइंट सिस्टम’ 
 इसके लिए आवेदनकत्र्ता को एक नए ‘प्वाइंट सिस्टम’ (Point System) की मुख्य शर्तें पूरी करनी होंगी जो 1 जनवरी 2021 से लागू किया जाने वाला है। यह नया ‘प्वाइंट सिस्टम’ ऑस्ट्रेलिया में चल रहे सिस्टम की रूपरेखा के आधार पर लागू किया गया है जिसके अनुसार निश्चित शर्तों और निर्धारित नियमों पर पूरा उतरने वालों ही को नौकरी के लिए ब्रिटेन आने का प्रार्थनापत्र देने का अधिकारी समझा जाएगा।

इस ‘प्वाइंट सिस्टम’ के अधीन कुछ श्रेणियां निर्धारित की गई हैं जो नौकरी के लिए यहां का वीजा हासिल करने के योग्य समझी जाएंगी। इन श्रेणियों की सूची में मुख्यत: वे क्षेत्र हैं जिनमें काम कर सकने वाले लोगों की इस देश में कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार को विदेशों से योग्य कर्मचारियों की भर्ती करनी पड़ रही है। 

विदेशों से नौकरी हेतु यहां आने वालों के लिए वाॢषक वेतन कम-से-कम 35,800 पौंड की शर्त 2011 में पूर्व प्रधानमंत्री थैरेसा मे ने इसलिए लागू की थी कि इतनी भारी वेतन राशि वाली कोई नौकरी हासिल कर सकना साधारण लोगों 
के लिए संभव नहीं होगा जिससे दूसरे देशों से आ कर यू.के. में बसने के आकांक्षी लोगों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकेगा।

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आवागमन का चक्कर 
लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी। ब्रिटेन छोड़ कर दूसरे देशों में जाकर बसने वाले लोगों की संख्या के मुकाबले में दूसरे देशों से आकर यू.के. में बस जाने वाले लोगों की संख्या प्रतिवर्ष बढ़ती ही गई है। सरकार समय-समय पर बड़े  जोर की घोषणाएं करती रही है कि ब्रिटेन छोड़ कर जाने वाले एम्मिग्रंट्स और विदेशों से आकर यहां बसने वालों  इमिग्रेंट्स की संख्या के अंतर को खत्म करने के लिए किसी प्रकार के प्रयत्न में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी। सरकार ने इसे ‘नैट इमीग्रेशन’ का नाम दे रखा था। लेकिन इस दिशा में उसका कोई भी यत्न सफल नहीं हो सका और अब हताश होकर सरकार ने आवागमन के इस अंतर को मिटाने के प्रयोजन को ही बंद कर देने का फैसला किया है। 

वेतन राशि में कमी और आने-जाने के संख्या चक्र से निकलने वाले फैसले सरकार ने इस वीरवार ‘चुप-चुपीते’ ही किए हैं, कोई व्यापक घोषणा नहीं की गई। इमीग्रेशन-विरोधी जत्थेबंदियों ने इन फैसलों की नुक्ताचीनी की है। उनका कहना है कि  वेतन की शर्त अब चूंकि इतनी कम कर दी गई है कि यहां के कर्मचारियों के मुकाबले में विदेशों से सस्ते वेतन पर लोगों को बुलाना आसान हो जाएगा। इस देश के लोगों के लिए रोजगार के अवसर और भी कम हो जाएंगे। निरंतर बढ़ती इमीग्रेशन को रोक सकने में विफल रहने पर यहां की जनता के रोष को शांत करने के लिए सख्त नीतियां अपनाने की सरकारी घोषणाएं झूठे दिलासे साबित हुई हैं।

विशिष्ट व्यवसाय, प्रशिक्षण और अनुभव ‘प्वाइंट सिस्टम’
यह महसूस किया गया है कि सरकार को इमीग्रेशन नियमों में तबदीली इसलिए लानी पड़ रही है कि यूरोपियन यूनियन से निकलने के बाद देश में रोजगार की स्थिति में बड़ा बदलाव आने वाला है विशेषकर उन विशिष्ट व्यवसायों में जहां प्रशिक्षित, अनुभवी कार्यकत्र्ताओं की आवश्यकता होगी। यहां यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि नई इमीग्रेशन नीति में ऐसे कार्यक्षेत्र और नौकरियों की श्रेणियां निर्धारित की गई हैं जिनके लिए वही आकांक्षी वीजा प्राप्त कर सकने की अपेक्षा कर सकेंगे जिनके पास वांछित अनुभव, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताएं होंगी, अर्थात ‘स्किल्ड वर्कर्ज’।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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