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कोरोना वायरस से जुड़ी इन बातों से हम सब अभी भी हैं अनजान!

  • Updated on 5/8/2020

कोविड-19 (कोरोना वायरस) ना जाने इस शब्द को प्रतिदिन हम कितनी बार सुनते हैं और अखबार टेलीविजन, मोबाइल तथा अन्य कई माध्यमों से इसके विषय में ज्ञान अर्जित करने का भरसक प्रयत्न कर रहे हैं। पर क्या वास्तव में हम लोग कोविड-19 कोरोना वायरस के विषय में सब कुछ जानते हैं? मेरा यह लेख आपको कोविड-19 के विषय में संक्षेप में सारगर्भित बातों से अवगत कराएगा और मैंने अपने इस लेख में कुछ ऐसे तथ्य उजागर करें हैं जिनसे शायद आप पहले अवगत ना थे| मेरा यह लेख आप सभी पाठक गणों को अंधेरे और डर के कुहांसे से निकालकर नवीन प्रकाश वीकीर्ण करेगा और आपके हृदय में तथा मस्तिष्क में कोविड-19 के प्रति बैठे भय को समाप्त कर देगा और आशा की एक ऐसी किरण से आपको प्रोत्साहित करेगा कि आप स्वयं को, अपने परिवार को, अपने मित्र गणों को तथा संपूर्ण समाज को मार्गदर्शन कर लाभान्वित कर सकेंगे|

तो आइए सबसे पहले जान लें कि इस कोरोना वायरस के नाम की उत्पत्ति किसने की, कैसे की, क्यों की और कब की।

वायरस का नाम इंटरनेशनल कमिटी ऑन टैक्सनॉमी ऑफ वायरस (आई.सी.टी.वी.) द्वारा रखा गया और इसका कोविड-19 के नाम से नामकरण किया गया| अब सवाल यह उठता है कि जब पहले ही इसका नाम कोरोना वायरस था तो कोविड-19, नया नामकरण करने की जरूरत क्या थी। तो सबसे पहले यह जानना होगा कि आखिर कोरोना वायरस है क्या? कोरोना वायरस हम सभी लोगों के लिए एक नया नाम है पर वास्तव में इसकी उत्पत्ति कहां से हुई आपको जानकर आश्चर्य होगा, कोरोना वायरस की उत्पत्ति सबसे पहले सन 1930 में एक मुर्गी में हुई थी और इस वायरस ने मुर्गी के श्वसन प्रणाली पर हमला कर उसे प्रभावित किया था और इसके बाद इस वायरस को सन 1940 में दोबारा कई अन्य जानवरों में पाया गया। सन 1960 में एक व्यक्ति जिसे सर्दी-जुखाम की शिकायत थी उसमें भी इसके लक्षण मिले। इसके बाद अमेरिका,चीन जैसे बड़े देशों ने इस वायरस पर शोध शुरू किए और जैविक हथियारों के तौर पर भी इस वायरस को विकसित करने पर गहन शोध शुरू किए जिस विषय में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। चीन की वुहान लैबोरेटरी में इस वायरस को विकसित किया जाता रहा और रिसर्च चलती रही। 

सन 2019 में सालों बाद दोबारा इस कोरोना वायरस का विकराल रूप चीन में देखने को मिला और इसे वुहान कोरोना वायरस या नोवेल करोना वायरस या वुहान सी फूड मार्केट निमोनिया वायरस नाम दे दिया गया| इस वायरस का संक्रमण सबसे पहले चीन की एक महिला में ३१ दिसंबर २०१९ को पाया गया। सभी रिसर्च टीम को अत्यधिक परिश्रम के बाद भी अब तक ज्ञात नहीं है कि आखिर यह वायरस मनुष्य के शरीर में पहुंचा कैसे? चीन की सरकार तथा शोधकर्ताओं का मानना है कि यह सी फूड के द्वारा लोगों के शरीर में आया क्योंकि चीन में ज्यादातर लोग कच्चा मांस, कई प्रकार के जीव जंतु तथा समुद्री जीवो को खाते हैं और यह उनका रोजमर्रा का भोजन है। 

परंतु कुछ लोगों, खासकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि यह वायरस वुहान लैबोरेट्री से आया है और इसी कारण वह हमेशा इसे वुहान वायरस या चाइनीज वायरस के नाम से ही संबोधित करते हैं और इस विषय में मजबूत साक्ष्य होने के प्रमाण भी प्रस्तुत करने की बात करते हैं। 

पर वास्तव में वायरस का नाम या यूं कहें आधिकारिक नाम कोविड-19, इंटरनेशनल कमिटी ऑन टैक्सनॉमी ऑफ वायरस (आई.सी.टी.वी.) ने ही दिया था, इसमें "सीओ" का मतलब कोरोना, "वी आई" का मतलब वायरस, "डी" का मतलब डिजीज और संख्या "19" वर्ष २०१९ को दर्शाती है क्योंकि पहली बार यह वर्ष 2019 में मनुष्य प्रजाति में पाया गया। 

यहां आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि "कोरोना" शब्द का लैटिन भाषा में मतलब होता है क्राउन या मुकुट, "कोरोना" प्लाज्मा की एक आभा को भी कहा जाता है, जो सूर्य और अन्य सितारों के चारों ओर होती है| सूर्य का कोरोना बाहरी अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर तक फैला होता है और जब पूर्ण सूर्यग्रहण होता है तो इसे "क्रोनोग्राफ" की मदद से साफ-साफ देखा जा सकता है। जब वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के द्वारा देखा तो उन्हें यह वायरस, क्राउन या सूर्य के कोरोना जैसा दिखाई दिया, वास्तव में यह वायरस गोल है और इसकी सतह पर सूर्य के कोरोना जैसी प्रोटीन की स्ट्रेंस यानी शाखाएं उगी हुई है जो हर दिशा में फैलती हुई महसूस होती हैं, ठीक उसी तरह जैसे सूर्य की आभा किरणें, इसी कारण इसका नाम करो ना रखा गया। 

आशा करती हूं कि सभी पाठकगण अब समक्ष समझ गए होंगे की कोविड-19/कोरोना वायरस शब्द किन किन शब्दों से बना और क्यों बना व किसके द्वारा किन कारणों से इसकी नाम उत्पत्ति हुई। 

इन कोरोना वायरस कणों का व्यास 120 नैनोमीटर होता है| कोरोना वायरस दो भागों में विभाजित होता है डीएनए वायरस और आरएनए वायरस| कोरोना वायरस एक प्रकार का आरएनए वायरस है या जीनोम है जिसका आकार लगभग 27 से 34 किलोबेस होता है। यह वायरस नाक और अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में इंफेक्शन फैलाते हैं और प्राणवायु जो हम मुख अथवा नाक द्वारा फेफड़ों तक पहुंचाते हैं को बाधित कर देता है। फेफड़ों में ऑक्सीजन ना पहुंचने से सबसे पहले मानव मस्तिष्क प्रभावित होता है और श्वास प्रतिक्रिया धीरे-धीरे लुप्त होती जाती है, आदमी जल बिन मछली की तरह तड़पने लगता है। ठीक समय पर उपचार करने और श्वसन प्रणाली तंत्र को पुनः सुचारू रूप से चालू कर देने से रोगी की जान बच जाती है लेकिन इस बीमारी को सबसे बड़ी विडंबना यह है कि है वायरस बड़ी आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल जाता है और इसका वायरस घंटों और दिनों तक जिंदा रह सकता है।

क्योंकि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि यह वायरस श्वसन प्रणाली पर हमला करता है इसी कारण शुरुआती लक्षण जुकाम, खांसी, छीक आदि से बड़ी आसानी से यह छिपे, अनजाने, अदृश्य दुश्मन की तरह एक मानव से दूसरे मानव में प्रवेश पा लेता है और अनेक लोगों को संक्रमित कर देता है। कोरोना वायरस अब एक प्राणघातक रोग बन गया है और बचाव ही इसकी दवा है। यह रोग बड़ी तेजी से चीन के वुहान शहर से शुरू होकर संपूर्ण विश्व में महामारी का रूप ले चुका है और भारत में इसकी विक्रालता को देखते हुए देशव्यापी पूर्ण बंद करना पड़ा है। भारत का लगभग हर शहर, कस्बा, क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया है। 

इस महामारी के विषय में अगर हम ध्यान से विश्लेषण करें तो हम इसे चार चरणों में विभाजित कर सकते हैं और उसी के आधार पर बचाव तथा उपचार की पद्धति तथा दिशानिर्देश तय कर सकते हैं। 

•पहले चरण में संक्रमित लोग भारत के बाहर से भारत में कोरोना वायरस विषाणु लेकर आए। 
•दूसरे चरण में इन्हीं लोगों से यह संक्रमण स्थानीय स्तर पर फैला जो किसी ऐसे शख्स के संपर्क में आने से फैला जो विदेश से विषाणु ग्रसित होकर लौटा था। 
•तीसरा चरण इससे थोड़ा अधिक घातक माना जा रहा है। "कम्युनिटी ट्रांसमिशन" जिसे लेकर भारत सरकार अत्यधिक चिंतित है और कंप्लीट लॉकडाउन के माध्यम से इसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन को रोकने में प्रयासरत है। 

कम्युनिटी ट्रांसमिशन तब फैलता है जब जनता बिना संक्रमित व्यक्ति या विदेश से लौटे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए बिना ही संक्रमण का शिकार हो जाता है। इसी को रोकने के लिए हम और आप अपने घरों में लॉकडाउन का पूर्णतः पालन करते हुए बैठे हैं और यही एकमात्र उपाय तथा उपचार (सोशल डिस्तंसिंग) है जिसके द्वारा हम कम्युनिटी ट्रांसमिशन को रोक सकते हैं। भारत सरकार का अब तक का प्रयास सराहनीय है और हमें इसके दूरगामी अच्छे परिणाम मिलेंगे। 

•अब आता है चौथा चरण यह एक विस्फोटक स्थिति होगी, यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है और महामारी का रूप ले सकता है और इसकी वजह वायरस का बहुत तेजी से भारी तादाद में फैलना और बहुत अधिक संख्या में समाज के नागरिकों का ग्रसित होना। 

भारत सरकार के द्वारा उठाए गए सभी कदम/निर्णय सराहनीय हैं और प्रशंसनीय हैं। दूसरे देशों की तुलना में भारत ने इस महामारी को काफी हद तक रोक रखा है। लॉकडॉउन को बार-बार बढ़ाना एक मजबूरी बन गई है क्योंकि अभी तक कोरोना वायरस के लिए कोई खास दवा अथवा वैक्सीन तैयार नहीं हो पाई है और ना ही कोई अन्य विकल्प उपलब्ध हैं। 

अब ये कल्पना करना भी जरूरी है कि अगर कुछ समय बाद बिगड़ती अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, लोगों के विरोध को देखते हुए अथवा अन्य कारणों से कभी ना कभी लॉकडॉउन खोलना ही पड़ेगा और उस स्थिति में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ेगी और उस चरण में कोरोना वायरस महामारी का विकराल रूप ले सकता है, ऐसी स्तिथि के लिए भी हमें, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रुप से तैयार रहने की आवश्यकता है। 

कम्युनिटी ट्रांसमिशन के बड़े खतरे से भारत की मुसीबत बढ़ जाने का अंदेशा है। बस और मेट्रो का संचालन प्रारंभ होते ही अनेकों-अनेक लोग इनका उपयोग करेंगे। कोरोना वायरस ( कोविड - १९) और इस जैसे दूसरे वायरसों पर किए गए शोधों से यह ज्ञात हुआ है कि यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने या चीखने से फैलता है तथा फिर किसी सतह पर गिरने पर तथा थूक कि छीटों द्वारा किसी जगह जैसे कि ट्रेन के हैंडल, सीटें, टैक्सी के दरवाजे खोलने वाले हैंडल, कपड़ों, सीटों पर काफी घंटों तक जीवित रहता है और इन जगहों को छूने वाला व्यक्ति संक्रमित हो जाता है। 

हम सबको विदित है कि हम लगभग 1 घंटे में कम से कम 20 बार अपने हाथों से मुंह, नाक, कान और आंखों को अनजाने में छू ही देते हैं और यह आदतन है। ऐसे में यह बिल्कुल संभव है कि वायरस हाथों से होता हुआ सीधे आपके मुंह नाक या आंख तक पहुंच जाए और आप संक्रमण से ग्रसित हो जाएं और अगर लॉकडाउन खुला तो क्या स्थिति बनेगी इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। अगर कम्युनिटी ट्रांसमिशन हद से ज्यादा बढ़ जाएगा तो सरकार तथा डॉक्टरों के लिए एक दुविधा हो जाएगी कि किसका इलाज करें और किसे छोड़ दें क्योंकि मरीजों की संख्या इतनी अधिक होगी कि डॉक्टर चाहकर भी सभी मरीजों पर पूरा ध्यान नहीं दे पाएंगे।

एक दिन में ही सैकड़ों मामले सामने आने की वजह से अस्पतालों में बिस्तर कम पड़ने लगेंगे और डॉक्टर दुविधा में पड़ जाएंगे कि किस मरीज़ को जान बचाने वाले उपचार की जरूरत है और किसे अपेक्षाकृत कम जरूरत है। डॉक्टर समझ नहीं पाएंगे कि किस उम्र के लोगों का पहले उपचार करें, जवान यहां वृद्ध लोगों का, यह बहुत खतरनाक स्थिति होगी। अगर स्थिति भारत सरकार के हाथ से निकल जाती है (जिसकी संभावना बहुत कम है) तो सरकार को एक और सिद्धांत "हर्ड इम्यूनिटी" का मजबूरन सहारा लेना पड़ेगा और उसी से इस वायरस का इलाज तलाशना होगा।

यह हर्ड इम्यूनिटी क्या है और यह कैसे काम करती है, आइए इसे जानते हैं। इस सब के लिए सरकार को एक बार फिर समीक्षा करनी होगी और कठोर निर्णय लेने होंगे। इसमें सफलता मिलेगी या नहीं, मृत्यु दर क्या रहेगी, क्या यह काम कर पाएगी या नहीं, क्या लोगों में प्रतिरोधक गुण विकसित हो पाएंगे या नहीं और अगर हो जाएंगे तो यह प्रतिरोधक क्षमता कब तक बनी रहेगी?

इन सभी बातों पर एक प्रश्न चिन्ह लगा है और इस विषय में कुछ भी निश्चित ज्ञान अभी प्राप्त नहीं है। आइए जानते हैं यह हर्ड इम्यूनिटी की है क्या। वैज्ञानिक सर पैट्रिक का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी वायरस से संक्रमित होकर ठीक हो जाता है तो उसे इस बीमारी से ग्रसित होने का खतरा नहीं रहता, ऐसा वह पिछले अनुभवों के आधार पर कहते हैं। जैसे खसरा बीमारी का टीका लगा देने से या एक बीमारी से ग्रसित होने पर यह बीमारी दोबारा नहीं होती इसी प्रकार एक बार चाहे तो वेक्सिन द्वारा या संक्रमण से अगर बीमारी से नियंत्रित तरीके से ग्रसित समाज की ६०% आबादी ठीक हो जाए तो कोविड-19 अपनी मौत अपने आप मर जाएगा लेकिन इसे लेकर अनेकों अनेक मतभेद हैं। 

इसे फैलने/संक्रमित करने में 7 महीने या नवंबर तक का समय लगेगा और लगभग 78 करोड़ लोगों को संक्रमित करना पड़ेगा तब जाकर ६०% का संक्रमित होने/करने का लक्ष्य पूरा होगा। भारत की ९३% आबादी 65 वर्ष से कम उम्र की है और इसी कारण भारत में मृत्यु दर यूरोपीय देशों की तुलना में काफी कम होगी। ६०% आबादी इम्यून होकर फिर आगे बीमारी को फैलने से रोक लेगी और सारे समाज में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाएगी। लेकिन इसका एक दूसरा पहलू भी है अगर हम विचार करें तो पाएंगे कि अगर वायरस को फैलने दिया जाएगा तो कितनी मौतें होंगी, क्या हम लगभग सारे वृद्ध लोगों को खो देंगे, क्या हम इसके लिए तैयार हैं? क्या हमारी युवा आबादी वास्तव में संक्रमित हो कोरोना वायरस से ठीक हो जाएगी इस बात की क्या गारंटी है और ठीक हुए मरीज़ के शरीर में एंटीबॉडी बनेंगी, इस बात की पुख्ता गारंटी नहीं है। क्या ६०% (७८ करोड़) संक्रमित लोगों के ठीक होने तक वृद्धों के लिए अस्पतालों में बिस्तर पर्याप्त मात्रा में मौजूद हो पाएंगे और अंत में अगर यह सब कारगर नहीं हुआ तो भारत तथा भारतीय सभ्यता का क्या होगा? 

अगर हम लोगों ने ब्लॉक डाउन का सही तरीके से पालन नहीं किया और संक्रमण लगातार फैलता रहा और बहुत अधिक संख्या में लोग संक्रमण ग्रसित हो गए और हालात बद से बदतर हो गए तो और कोई विकल्प न होने के कारण ना चाहते हुए भी हर्ड इम्यूनिटी ही आखिरी और अंतिम उपाय बचेगा और अगर सरकार इसे लागू नहीं कर पाएगी तथा इसका एंटीडोट्/वैक्सीन/इलाज मानव जाति नहीं ढूंढ पाएगी तो महामारी की स्थिति आने पर डार्विन की थ्योरी यानी "सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट" काम करेगी। अभी भारत सरकार ने बड़े सराहनीय तरीके से स्थिति पर काबू पा रखा है और विश्व भर में हमारी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भूरी भूरी प्रशंसा हो रही है। हमारी सरकार जिस तरीके से समीक्षा कर लगातार रोकथाम-संबंधी उपाय अपना रही है उससे मृत्यु दर पर अभी तक अंकुश लगा हुआ है तथा भारत के हालात यूरोपीय देशों की तुलना में बेहद अच्छे हैं।

लेकिन आर्थिक गतिविधियों के पूरी तरह बंद हो जाने के कारण तथा दुकानों, कारखानों, दफ्तरों और बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री के बंद हो जाने के कारण उत्पादन ठप पड़ा है और इकनॉमिक एक्टिविटी ना सिर्फ भारत की अपितु संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है और सभी देशों की सरकारों के लिए योगदान आंशिक अथवा पूर्ण रूप से खोलना मजबूरी बन गई है। अब यहां सवाल यह उठता है क्या कोरोना वायरस खत्म हो गया है या सरकार ने समाज को अपने हाल पर छोड़ दिया है, वास्तव में ऐसा नहीं है। लॉकडॉउन का उपाय दो कारण से किया गया था, पहला संक्रमण रोकना और दूसरों को संक्रमित होकर अस्पतालों में भीड़ बढ़ने से रोकना, दूसरा संक्रमण की दर कम रखते हुए आने वाले कल के लिए मतलब अब जो स्थिति बन गई है के लिए अस्पतालों में लाखों बेड तथा पी.पी.ई किट का इंतजाम करना और सरकार दोनों कामों में सफल रही है। आज भारत ने पर्याप्त संख्या में सभी शहरों में अथक प्रयास करते हुए सरकारों ने व्यापक इंतजाम कर दिए हैं। अब लॉकडॉउन खोलने की प्रक्रिया आरंभ होगी और चरणबद्ध तरीके से लॉक खोला जाएगा। 

यहां यह बताना फिर से आवश्यक है कि जब तक मानव सभ्यता इस बीमारी का कोई इलाज नहीं निकाल लेती हमें इस कोरोना वायरस के साथ ही जीना होगा और इसकी आदत डाल लेनी चाहिए। अगर आप छीक रहे हैं तो मुंह के सामने टिशू जरूर रखें और अगर आपके पास उस वक्त टिशू नहीं है तो अपने हाथ को आगे कर कोनी की ओट में ही खांसें या छीकें। इस्तेमाल किए गए टिशू को जितना जल्दी हो सके फेंक दें, अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो इसमें मौजूद वायरस दूसरों को भी संक्रमित कर देगा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और बाजार तथा सार्वजनिक स्थानों पर एक दूसरे से कम से कम 2 मीटर की दूरी बनाए रखें। यह भी अनिवार्य है जब तक बहुत जरूरी ना हो घर से बाहर ना निकले ताकि आप संक्रमित लोगों के संपर्क में कम से कम आए और बचे रहें। हैंड शेक की जगह हमारे भारत की परंपरा नमस्ते (सेफ ग्रीटिंग) का इस्तेमाल दूसरों के अभिवादन में करें। 

चेहरे को मस्क से ढकें और अगर हो सके तो हाथों में ग्लव्स भी पहने और घर आते ही उन ग्लव्स को साबुन से धो लें तथा हाथों को भी साबुन से धोएं। आंखों को  सुरक्षित रखने के लिए चश्मे का उपयोग करें और इस बात का ध्यान रखें कि किसी भी परिस्थिति में आंखों और मुंह को ना छुएं और अगर गलती से हाथ मुंह तक पहुंच भी जाएं तो तुरंत गर्म पानी से गरारे करें या कुल्ला करें। समय-समय पर गरम पदार्थ तरल रूप में लेते रहें। 

अपने श्वास को लगभग 30 सेकंड तक रोके रखने का प्रयास करें और इस प्रक्रिया को दिन में लगभग चार-पांच बार 4-4 घंटे की अवधि के बाद दोहराएं। अगर आप ऐसा करने में सफल रहते हैं तो आप पूरी तरह स्वस्थ हैं और आप संक्रमित नहीं हैं इस बात की काफी संभावना है। इस तरह आप स्वयं अपना परीक्षण/निरीक्षण कर सकते हैं।

एक ही मस्क का लगातार इस्तेमाल आपको दूसरी बीमारियों से ग्रसित कर सकता है और इसलिए बेहतर है कि देसी गमछा या दुपट्टे का इस्तेमाल करें और उसे लगातार धोए और धोकर ही दोबारा इस्तेमाल करें आप इसके लिए 2 गमछों अथवा दुपट्टों का प्रयोग कर सकते हैं। एक को धोकर धूप में सुखा दे और दूसरे को इस्तेमाल करें। बाहर से घर आने पर बच्चों व परिवार वालों को छूने से बचें, हैंडल या अन्य सामान को हाथ ना लगाते हुए  सीधा वाश बेसिन पर जाकर साबुन से कम से कम 30 सेकंड हाथ धोएं तथा तुरंत बाथरूम में जाकर पहने कपड़े उतारकर डिटर्जेंट युक्त पानी में भिगो दें तथा साबुन लगाकर पूर्ण रूप से स्नान करें। 

लॉकडॉउन खुल जाने के बाद बेहतर होगा घर पर भी सभी लोग मास्क लगाएं कम से कम जो व्यक्ति बाहर आता- जाता है वह तो अपने मुंह को गमछे, दुपट्टे या मास्क से जरूर ढकें। ऐसा करने से ये फायदा होगा कि अगर किसी कारण से वह बाहर से संक्रमित होकर आया है तो घर के दूसरे सदस्यों में संक्रमण नहीं फैलेगा। 

चलिए अब आगे चलते हैं, अब सवाल यह उठता है कि अगर कोई व्यक्ति संक्रमित हो जाए तो उसे यह पता कैसे चलेगा? कोरोना वायरस संक्रमण का प्रमुख लक्षण बुखार और सूखी खांसी है, अगर आपको यह दोनों लक्षण नजर आ रहे हैं तो आपको फौरन सावधान हो जाना चाहिए। गले में खराश, सिरदर्द, डायरिया जैसे लक्षण, साथ में बदन दर्द और सांस लेने में तकलीफ भी अन्य लक्षण है। कुछ मामलों में लोगों ने शिकायत की है कि उनके मुंह का स्वाद भी चला गया है कुछ में गंध ना महसूस होना भी देखा गया है। 

बहुत अधिक संक्रमित हो जाने के कारण तथा रेस्पिरेट्री सिस्टम में अवरोध उत्पन्न हो जाने के कारण से फेंफड़ों तक संक्रमण पहुंच जाने की स्थिति में व्यक्ति को सांस आनी बंद हो जाती है अथवा बहुत मुश्किल से सांस आती है तथा आदमी जल बिन मछली की तरह तड़पता है। ऐसे व्यक्ति को तुरंत उपचार की सख्त जरूरत है और इसे दिलवाना चाहिए। 

अब सवाल यह उठता है कि संक्रमण कितना खतरनाक है? तो इसका उत्तर मेडिकल जनरल दा लांसेट ऑफ इनफेक्शियस डिसीसिस में सच में आपको मिल जाएगा, जिसके मुताबिक कोविड-19 के मरीजों में 0.66% लोगों को ही मृत्यु के कगार तक पहुंचते देखा गया है।

यह सामान्य फ्लू से होने वाली मौतों से सिर्फ 0.1% ही अधिक है। महामारी के दौरान मृत्यु दर का आंकलन थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि संक्रमण होने और मृत्यु के बीच समय का काफी फर्क होता है। इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के मुताबिक जिन लोगों की उम्र 80 वर्ष से अधिक है उनके लिए खतरा औसतन 10 गुना अधिक है और वहीं जिनकी उम्र 40 वर्ष से कम है उनके लिए खतरे की आशंका कम है अगर वह संक्रमित हो जाए तो खुद ब खुद संक्रमण से लड़ के ठीक हो जाने की संभावना अधिक है। मधुमय, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित लोगों में भी इस बीमारी संक्रमित होकर मरने की आशंका 5 गुना अधिक है। इसलिए इन बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति अपना विशेष ध्यान रखें। 

अब प्रश्न यह पैदा होता है कि क्या इस बीमारी का कोई इलाज संभव है या होगा? अभी तक फिलहाल कोरोना वायरस के लिए ना तो कोई खास दावा तैयार हो सकी है और ना ही कोई वेक्सिन विकसित हो पाया है। ट्रीटमेंट के विकल्प तो है लेकिन ज्यादातर लोग खुद ही ठीक हो जाते हैं। पूरी दुनिया में वैज्ञानिक इस वायरस के लिए वैक्सीन तलाश, इजाद कर रहे हैं लेकिन अभी तक उनके ट्रायल किए जाएंगे और उसके बाद कि कहीं जाकर कुछ स्पष्ट रूप से सामने आएगा, लेकिन इस प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है अथवा यू कहे लग सकता है। 

देखिए अब हमारा संसार पहले की तरह नहीं रहा अब जब तक इस वायरस का टीका विकसित नहीं हो जाता, हमें इस वायरस के साथ ही जीने की आदत डाल लेनी पड़ेगी। अब धीरे-धीरे सभी सामाजिक गतिविधियों को खोलना ही पड़ेगा और संक्रमण तेजी से फैलेगा भी, इस परिस्थिति में, मै आपको कुछ टिप्स दे रही हूं, जिससे आप अपने मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य को और स्तिथि को बेहतर बना सकते हैं। 
•सजग रहें, सतर्क रहें, संक्रमण से बचें। 
•अपनी नई दुनिया में व्येहवारित तरीके से रहें और नई दिनचर्या में अपने स्वास्थ्य संबंधी बातों को विशेष रूप से महत्व दें।
•अपने शरीर तथा खान-पान का सबसे पहले ध्यान रखें, व्यायाम करें तथा अपनी इम्यूनिटी बढ़ाएं, याद रहे आपके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता ही आप में इस संक्रमण अथवा उसके बाद आने वाली स्थिति से बचाएगी और आपके जीवन की रक्षा करेगी। 
•आपने अपने व्यवहार, आचार, विचार अथवा दूसरों से मेल-मिलाप के तरीकों पर नियंत्रण रखें और सोशल डिस्टेंसिंग का पूर्ण रुप से पालन करें। 
•अपनी नींद को बाधित ना होने दें, पूरी नींद लें और आराम करें। 
•अपने मनोरंजन का पूरा ध्यान रखें। 
•वर्तमान पर फोकस करें और याद रखें कि यह समय चिर स्थाई नहीं है। हम और हमारा समाज इस त्रासदी पर विजय पा ही लेगा। 
•हमें बीमारी से लड़ना है बीमार से नहीं। 

नोट: आप जहां से भी जानकारियां ले रहे हैं वह क्रेडिबल सोर्स हो। 

अंत में, मैं इसी आशा के साथ कि मेरे द्वारा उपलिखित सभी बातें आपके मस्तिष्क पर कोरोना वायरस से संक्रमण के डर को समाप्त कर, जागरूक होने में सहायता करेंगी और आप पूर्ण सावधानी बरतते हुए स्वस्थ रहेंगे। 

[स्वस्थ रहें, सदा सुखी रहे] 

- रोज़ी गुप्ता

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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