Thursday, Aug 16, 2018

क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय का भ्रष्टाचार दूर करेंगे सुरेश प्रभु

  • Updated on 3/12/2018

नागरिक  उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार सुरेश प्रभु को सौंप कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक सकारात्मक संकेत दिया है। उल्लेखनीय है कि यह मंत्रालय पिछले एक दशक से भ्रष्टाचार में गले तक डूबा हुआ है। हमने इस मंत्रालय के अनेकों घोटाले उजागर किए और उन्हें सप्रमाण सी.बी.आई. और केन्द्रीय सतर्कता आयोग को लिखित रूप से सौंपा लेकिन यह बड़ी चिंता और दुख की बात है कि पिछले 3 साल में बार- बार याद दिलाने के बावजूद इन घोटालों की जांच का कोई गम्भीर प्रयास इन एजैंसियों द्वारा नहीं किया गया।

जो भी रिपोर्ट हमने तथ्यों के आधार पर छापी है वह हिला देने वाली है। जो भी इसे पढ़ता है वह हतप्रभ रह जाता है कि इतनी सारी जानकारी उस तक क्यों नहीं पहुंची जबकि हर अखबार में प्राय: एक संवाददाता नागरिक उड्डयन मंत्रालय को कवर करने के लिए तैनात होता है। तो इन संवाददाताओं ने इतने वर्षों में क्या किया जो वे इन बातों को जनता के सामने नहीं ला सके।

इसके अलावा संसद का सत्र भी चालू है, पर अभी तक किसी भी सांसद ने इस मुद्दे को नहीं उठाया और शायद इससे संबंधित प्रश्न भी नहीं डाला है, आखिर क्यों? उधर न्यायपालिका यदि चाहे तो इस मामले में ‘सुओ मोटो’ नोटिस जारी करके भारत सरकार से सारे दस्तावेज मंगवा सकती है और सी.बी.आई. को अपनी निगरानी में जांच करने के लिए निर्देशित कर सकती है, पर अभी तक यह भी नहीं हुआ है।

चिंता की बात है कि कार्यपालिका अपना काम करेगी नहीं, विधायिका इस मुद्दे को उठाएगी नहीं, न्यायपालिका अपनी तरफ से पहल नहीं करेगी और मीडिया भी इस पर खामोश रहेगा, तो क्या भ्रष्टाचार को लेकर जो शोर टी.वी. चैनलों में रोज मचता है या अखबारों में लेख लिखे जाते हैं वह सिर्फ एक नाटकबाजी होती है। 

कारण खोजने पर पता चला कि जैट एयरवेज भारी तादाद में महत्वपूर्ण लोगों को धन, हवाई टिकट या कई अन्य फायदे देती है, जिससे ज्यादातर लोगों का मुंह बंद किया जाता है। कुछ अपवाद भी होंगे, जो अन्य कारणों से खामोश होंगे।

हमारे लिए यह कोई नया अनुभव नहीं है। 1993 में राष्ट्रीय मीडिया ने हवाला कांड को शुरू में महत्व नहीं दिया था, पर आगे चल कर जब 1996 में देश के 115 लोगों को, जिनमें दर्जनों  केन्द्रीय मंत्रियों, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, विपक्ष के नेताओं और आला अफसरों को भ्रष्टाचार में चार्जशीट किया गया था तब के बाद सारा मीडिया बहुत ज्यादा सक्रिय हो गया। वही स्थिति इस उड्डयन मंत्रालय के कांड की भी होने वाली है। जब यह मामला कोर्ट के सामने आएगा तभी शायद मीडिया इसे गंभीरता से लेगा।

जब सुरेश प्रभु रेल मंत्री थे तो उनके बारे में यह कहा जाता था कि वह अपने मंत्रालय में किसी भी तरह की ‘नॉनसैंस’ सहन नहीं करते थे। इस कॉलम के माध्यम से सुरेश प्रभु का ध्यान नागरिक उड्डयन मंत्रालय में व्याप्त घोटालों की ओर लाना है, जिसे उनसे पहले के सभी मंत्री व अधिकारी अनदेखा करते आए हैं। सोचने वाली बात यह है कि इस मंत्रालय में हो रहे भ्रष्टाचार, जो मनमोहन सिंह की यू.पी.ए. सरकार के समय से चल रहा था, उसे पूर्व मंत्री अशोक गजपति राजू ने तमाम सबूत होने के बावजूद लगभग 4 वर्षों तक अनदेखा क्यों किया? 

अगर जैट एयरवेज की खामियों को गिनना शुरू करें तो वह सूची बहुत लम्बी हो जाएगी। हाल ही में चर्चा में रहे इसी एयरलाइन्स के एक विमान का गोवा के हवाई अड्डे पर हुए हादसे का स्मरण आते ही उस विमान में घायल दर्जनों यात्रियों के रौंगटे खड़े हो जाते हैं।

यह हादसा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उस विमान को उड़ाने वाले पायलट हरी ओम चौधरी को जैट एयरवेज के ट्रेनिंग के मुखिया वेंकट विनोद ने किसी राजनीतिक दबाव के कारण से पायलट बनने के लिए हरी झंडी दे दी, जबकि वह इस कार्य के लिए सक्षम नहीं था। नतीजा आपके सामने है। अगर सूत्रों की मानें तो उन्हीं हरी ओम चौधरी को इस हादसे की जांच के चलते रिलीज भी कर दिया गया है यानी जांच की रिपोर्ट जब भी आए जैसी भी आए, इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ये तो हवाई जहाज उड़ाते रहेंगे और मासूम यात्रियों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे।

इस डर और खौफ  से बचने के लिए सभी यात्रियों की उम्मीद एक ऐसे मंत्री से की जानी चाहिए जो अपने अधिकारियों को बिना किसी खौफ के केवल कानून के दायरे में रह कर ही काम करने की सलाह दे, किसी बड़े उद्योगपति या देशद्रोही के कहने पर नहीं।
 

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