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Women pictures are misused on internet aljwnt

इंटरनेट पर महिलाओं के चित्रों का होता है दुरुपयोग

  • Updated on 11/18/2020

आजकल लोगों का अधिकतर समय इंटरनैट पर ही बीतता है। ऐसा लगता है मानो इंटरनैट एक अलग ही दुनिया हो और लोग उसी में खोए रहते हैं। किंतुु साइबर क्राइम (Cyber Crime) भी इतना ज्यादा बढ़ता जा रहा है कि यह हम सभी के जीवन की एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है। इंटरनेट पर सभी अपनी-अपनी तस्वीरें डालते हैं-महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही तस्वीरें पोस्ट करती हैं? ये तस्वीरें व्हाट्सएप पर, फेसबुक पर, इंस्टाग्राम (Instagram) पर और स्नैपचैट पर पोस्ट की जाती हैं। किंतु साइबर अपराधी इन तस्वीरों का मिसयूका कर सकते हैं। इन तस्वीरों को बड़ी आसानी से डीपफेक नामक टैक्नोलॉजी की मदद से अश्लील तस्वीरों में बदला जा सकता है?। 

इंटरनैट पर मौजूद फेक अकाऊंट का पता लगाने वाली एक कंपनी जिसका नाम सैंसिटी है, ने पता लगाया है कि सोशल मीडिया पर डाली गई एक लाख महिलाओं की तस्वीरों को अश्लील तस्वीरों में बदल दिया गया है। इस कम्पनी के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटैलीजैंस का प्रयोग कर इन एक लाख महिलाओं की तस्वीरों को डीपफेक बॉट की मदद से अश्लील तस्वीरों में बदल दिया गया है। 

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डीपफेक का मतलब होता है असली तस्वीरों से छेड़छाड़ कर उन्हें किसी खास उद्देश्य के लिए फेक तस्वीरों में बदल देना। लेकिन यह सब इतनी सफाई से किया जाता है कि असली और नकली तस्वीरों और वीडियोज में अंतर करना बहुत ही मुश्किल होता है। डीपफेक वास्तव में फेक से भी आगे की स्टेज है। बॉट का मतलब है एक ऐसा रोबोट जो मैसेजिंग ऐप पर इंसानी बातचीत की नकल कर सकता है। जांच करने वाली इस कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक ये बॉट प्रसिद्ध सोशल मीडिया मैसेजिंग ऐप टैलीग्राम के एक चैनल पर उपलब्ध है। 

यूजर्स इससे महिलाओं की तस्वीरें भेज रहे थे और ये बॉट उन तस्वीरों को अश्लील तस्वीरों में बदल रहा था। जिस टैलीग्राम को अभी तक व्हाट्सएप से भी अधिक सुरक्षित माना जाता था, उसी सुरक्षित ऐप पर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ अब खिलवाड़ किया जा रहा है। इंटरनैट की दुनिया में ऐसे न जाने कितने डीपफेक बॉट्स मौजूद होंगे, जिनके द्वारा दुनिया भर की करोड़ों महिलाओं के मान-सम्मान की धज्जियां उड़ाई जा रही होंगी। अभी तो एक ही बॉट का खुलासा हुआ है। 

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एक लाख महिलाओं की जिन तस्वीरों को अश्लील तस्वीरों में बदला गया उन्हें अब इंटरनैट से हटाना भी मुमकिन नहीं है। यदि इंटरनैट पर किसी से जुड़ा कोई आपत्तिजनक कंटैंट एक बार अपलोड हो जाए तो उसे पूरी तरह से हटाना लगभग असंभव है। ज्यादा से ज्यादा भारत के आई.टी. एक्ट के तहत एक नोटिस के जरिए इस आपत्तिजनक कंटैंट को हटाने के लिए सरकार से निर्देश दिलाया जा सकता है। जो वैबसाइट्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स कानूनों का पालन करते हैं वह तो एक हद तक इस आपत्तिजनक कटैंट को हटा भी सकते हैं किंतु इंटरनैट पर ऐसी लाखों-करोड़ों वैबसाइट्स हैं जिनसे इस कंटैंट को हटाना संभव नहीं है और कानून व पुलिस इन लाखों-करोड़ों वैबसाइट्स पर अंकुश लगाने में असमर्थ हैं। 

सोशल मीडिया की जिन तस्वीरों के साथ आसानी से छेड़छाड़ हो सकती है, उनमें ज्यादातर सैल्फीज होती हैं। सैल्फीज में चेहरा साफ-साफ दिखाई देता है और आमतौर पर इसके रैजोल्यूशन की क्वालिटी भी बेहतर होती है। इसलिए सैल्फी से लिए गए किसी महिला के चेहरे को किसी अश्लील तस्वीर के साथ जोडऩा काफी आसान होता है। इसलिए साइबर अपराधी ज्यादातर सैल्फी का ही मिसयूज करते हैं। अलग-अलग एंगल से ली गई सैल्फी से चेहरे के अलग-अलग एंगल, डीपफेक तैयार करने वाले आॢटफिशियल इंटैलीजैंस का काम बहुत आसान कर देते हैं और इनसे ऐसे वीडियोज तैयार किए जा सकते हैं जिन्हें नकली मानना लगभग नामुमकिन होता है क्योंकि इसमें चेहरे के सभी भाव, सभी एंगल मौजूद होते हैं। इसलिए सैल्फी की जगह दूर से खींची गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालना ज्यादा सुरक्षित रहता है। 

जिन तस्वीरों में पूरा शरीर दिखाई देता है उन से चेहरे को अलग करना आसान नहीं होता और इनसे आसानी से छेड़छाड़ करना संभव नहीं है। डीपफेक के जरिए केवल महिलाओं को ही बदनाम करने की कोशिश नहीं की जाती बल्कि इसका शिकार बड़े-बड़े नेता, सैलिब्रिटीज और आम पुरुष भी होते हैं। डीपफेक इंटरनैट की दुनिया का सबसे खतरनाक हथियार बन चुका है और इसकी मदद से किसी का भी आपत्तिजनक वीडियो बनाकर उसके जीवन को बर्बाद किया जा सकता है।

-रंजना मिश्रा

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा पंजाब केसरी समूह उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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