Sunday, Dec 05, 2021
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नोटबंदी के प्रभावों का ऑडिट करेगा कैग

  • Updated on 3/27/2017

Navodayatimesनई दिल्ली/टीम डिजिटल।  नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की योजना नोटबंदी के प्रभाव का ऑडिट करने और इसके सरकार के राजस्व पर पड़े असर का आकलन करने की है। कैग अधिकारी शशिकांत शर्मा ने यह बात कही।

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उन्होंने कहा कि कैग नई वस्तु एवं सेवा कर (जी.एस.टी.) व्यवस्था के तहत कर राजस्व का ऑडिट करने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा उसने क्षमता निर्माण और अपने ऑडिट के तरीके तथा प्रक्रियाओं का पुनर्गठन शुरू किया है। विशेष ऑडिट के तहत कैग ने पहले ही कृषि फसल योजना तथा बाढ़ नियंत्रण एवं बाढ़ अनुमान का ऑडिट पूरा कर लिया है। अब वह शिक्षा के अधिकार, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन, रक्षा पैंशन, गंगा पुनरुद्धार का ऑडिट कर रहा है। शर्मा ने कहा कि इनकी ऑडिट रिपोर्ट चालू साल के अंत तक तैयार हो जाएगी। 

कैग के ऑडिट में नोटों की छपाई पर खर्च, रिजर्व बैंक के लाभांश भुगतान तथा बैंकिंग लेन-देन के आंकड़ों को 
शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कैग ने सरकार को जी.एस.टी. परिषद के शुरूआती मसौदे में धारा 65 को हटाने पर भी 
अपना रुख बता दिया है। इसके तहत कैग को जी.एस.टी. के ऑडिट का अधिकार मिलता है।

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अधिकार के दायरे में जी.एस.टी. भी आएगा
शशिकांत शर्मा ने कहा कि हमारे अधिकार के दायरे में पूर्व की किसी कराधान व्यवस्था की तरह जी.एस.टी. भी आएगा। हमने जी.एस.टी. लागू होने के बाद इस चुनौती से निपटने को अपनी राजस्व ऑडिट व्यवस्था के पुनर्गठन पर काम शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया के तहत क्षमता निर्माण, डाटा पहुंच एवं विश्लेषण, ऑडिट के तरीके और प्रक्रियाओं पर पुनर्गठन तथा एंड टु एंड सॉल्यूशंस का विकास शामिल है।’’ शर्मा ने स्पष्ट किया कि सरकारी, विधायी, न्यायिक और ऑडिट की भूमिकाएं व दायित्व पूरी तरह स्पष्ट हैं। 

सशक्तिकरण में किसी तरह की खामी नहीं
उन्होंने कहा कि कैग के सशक्तिकरण में किसी तरह की खामी नहीं है, लेकिन समय के साथ कामकाज के संचालन मॉडल में बदलाव आया है। कैग ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दूरसंचार मामले में 2014 के फैसले से यह महत्वपूर्ण सिद्धांत एक बार फिर पुष्ट हुआ है कि निजी क्षेत्र की कम्पनियों द्वारा जहां भी राजस्व सृजन के लिए सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा, कैग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह देखे कि सरकार को उस राजस्व में उसका समुचित हिस्सा मिल रहा है या नहीं। 

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शहरी विकास निकाय, बिजली वितरण कम्पनियां और मैट्रो निगम कैग के ऑडिट का विरोध करते रहते हैं। उनका कहना है कि वे स्वायत निकाय हैं तथा उन्हें सरकार से किसी तरह का समर्थन नहीं मिल रहा है। शर्मा ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि समय के साथ चीजें ठीक हो जाएंगी और यह विरोध समाप्त हो जाएगा।’’ 

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