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#MeToo : प्रिया रमानी के आरोपों पर कोर्ट में हुई एमके अकबर से जिरह

  • Updated on 5/20/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने सोमवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि उन्होंने 1994 में पत्रकार प्रिया रमानी को मिलने के लिए होटल के कमरे में नहीं बुलाया था। रमानी ने मीटू आंदोलन के तहत यौन कदाचार का आरोप लगाया था और कहा था कि अकबर ने 1994 में एक अखबार में नौकरी के लिए कथित साक्षात्कार के सिलसिले में उन्हें मिलने के लिए होटल के कमरे में बुलाया था। 

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अकबर उस समय संबंधित अखबार के संपादक थे। आरोपों के बाद पिछले साल 17 अक्टूबर को मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले अकबर ने यौन कदाचार का आरोप लगाने वाली अन्य महिला पत्रकारों के बारे में रमानी की वकील के प्रश्नों पर आपत्ति जताई। पत्रकार से नेता बने अकबर से रमानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन अपनी मुवक्किल के खिलाफ पूर्व मंत्री की निजी आपराधिक मानहानि याचिका के संबंध में अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल के समक्ष जिरह कर रही थीं। 

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अकबर ने कहा, ‘‘यह कहना गलत है कि मैंने प्रिया रमानी से अपने कमरे में आने को कहा था। यह कहना गलत है कि वह झिझक रही थीं और मैं जिद कर रहा था...मुझे नहीं पता कि प्रिया रमानी का स्नातक के बाद यह नौकरी का पहला इंटरव्यू था या नहीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि प्रिया रमानी को जनवरी 1994 में एशियन एज के दिल्ली कार्यालय में नौकरी की पेशकश की गई थी या नहीं। क्योंकि यह 25 साल पुराना मामला है और जहां तक मुझे याद है, वह मुंबई कार्यालय में काम कर रही थीं।’’ 

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रमानी ने होटल के कमरे में अकबर के कथित आपत्तिजनक व्यवहार को लेकर ट््वीट किया था। मामले में रमानी की वकील ने अन्य महिला पत्रकारों और अकबर के खिलाफ उनके आरोपों के बारे में सवाल पूछे। मंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने इन सवालों पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की और कहा कि प्रश्न ‘‘अप्रासंगिक’’ हैं क्योंकि ये इस मामले से संबंधित नहीं हैं। इस पर दोनों महिला वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। 

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मजिस्ट्रेट ने रमानी की वकील को अकबर से सवाल पूछते रहने की अनुमति दी और इन प्रश्नों पर अकबर की आपत्ति दर्ज करने पर भी सहमति जताई। जिरह के दौरान अकबर से जिन महिला पत्रकारों से संबंधित सवाल पूछे गए, उनमें गजाला वहाब, कादम्बरी एम वाडे, माजली डे पुय काम्प, सोनाली खुल्लर श्रॉफ और हरिंदर बावेजा शामिल हैं जिन्होंने अकबर पर यौन कदाचार का आरोप लगाया था। अकबर ने कहा कि उन्होंने वहाब द्वारा लगाए गए आरोपों को एक लेख में खारिज किया था।

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उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि उन्हें याद नहीं है कि वाडे ने उनके साथ काम किया क्योंकि मामला 20 साल पुराना है। अकबर ने कहा कि ‘‘लेडी काम्प के उत्पीडऩ का सवाल ही नहीं उठता। मुझे याद है कि कुछ गलतफहमी रही होगी जो स्वीकार कर ली गई थी।’’ पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उन्हें याद नहीं है कि श्रॉफ ने उनके साथ काम किया था या नहीं और उन्होंने यौन उत्पीडऩ के संबंध में उनका कोई ट््वीट नहीं पढ़ा है। अकबर से रमानी की वकील की जिरह बेनतीजा रही जो अब छह जुलाई को फिर शुरू होगी।


 

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