Wednesday, Oct 20, 2021
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बदायूं कांड : अपने बयान को लेकर ट्रोल हुईं महिला आयोग की सदस्या, विपक्ष ने उठाए सवाल

  • Updated on 1/7/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय महिला आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने बदायूं जिले में मंदिर गई एक महिला की कथित सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से बृहस्पतिवार को मुलाकात की और इस घटना में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। इसके साथ ही आयोग की सदस्या चंद्रमुखी का बयान भी आयोग की भूमिका पर सवाल उठा गया। आयोग की सदस्या ने कहा कि अगर पीड़ित महिला शाम को बाहर नहीं निकलती या किसी को साथ लेकर निकलती तो उसके साथ ये वाकया नहीं हुआ होता। इस बयान को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाने शुरु कर दिए हैं। 

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कांग्रेस के रोहन गुप्ता ने अपने ट्वीट में लिखा है, 'राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी का बयान निंदनीय है। महिला किसी भी समय घर से बाहर निकले, उसकी सुरक्षा होनी चाहिए। महिला आयोग में बैठ कर भी महिला को ही घटना का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है?' उधर आम आदमी पार्टी ने भी अपने ट्वीट में लिखा है, "अगर शाम के समय महिला बाहर ना गयी होती तो ऐसी घटना ना होती।" - ये हैं राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य जिन्हें आदित्यनाथ सरकार और बलात्कारी नहीं, बल्कि बलात्कार पीड़िता ही गुनाहगार लगी। शर्म करो।'

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प्रतिनिधिमंडल यह भी कहा कि महिलाओं को शाम के समय अकेले नहीं जाना चाहिये था, लेकिन यह घटना सुनियोजित थी। आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से उसके गांव जाकर मुलाकात की। चंद्रमुखी ने संवाददाताओं से कहा कि महिलाओं को किसी के भी बहकावे के आकर कहीं भी अकेले नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'मैं सोचती हूं कि अगर संध्या के समय वह महिला अकेले नहीं गयी होती या परिवार का कोई बच्चा साथ में होता, तो शायद ऐसी घटना नहीं हुई होती, लेकिन यह सुनियोजित था।’’ उन्होंने कहा कि ‘‘सामूहिक दुष्कर्म और हत्या’’ की वारदात जघन्य है और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। चंद्रमुखी ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों को लेकर बहुत सख्त है, फिर भी ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। 

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उन्होंने कहा, 'मैं पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नही हूं। अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो शायद महिला की जान बच जाती।' उन्होंने कहा, 'महिला बेहोशी की स्थिति में थी। उसे अगर इलाज मिल जाता, तो वह बच जाती। मामला दर्ज करने में बहुत देर की गई। इसके अलावा पोस्टमार्टम में भी विलंब हुआ।' चंद्रमुखी ने कहा, "किसी थाना प्रभारी को निलबिंत करना काफी नहीं है। हमने एसएसपी से कहा है कि किसी दबाव में किसी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। मिशन शक्ति और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों के बाद भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। इसका मतलब यह है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है।' 

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बुधवार देर रात बदायूँ पहुची आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी ने अधिकारियों के साथ बैठक कर कांड की पूरी जानकारी हासिल की। गौरतलब है कि गत रविवार को बदायूं जिले के उघैती थाना क्षेत्र के एक गांव में मंदिर गयी 50 वर्षीय एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। महिला के परिजन ने मंदिर के महंत सत्य नारायण और उसके दो साथियों पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया है। इस आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर वेद राम और जसपाल को मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी महंत फरार है और उसे गिरफ्तार करने के लिए चार टीमें गठित की गई हैं। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बदायूं की वारदात को गंभीरता से लेते हुए बरेली जोन के अपर पुलिस महानिदेशक से रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जरूरत पडऩे पर मामले की जांच में विशेष कार्य बल की भी मदद ली जाए, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और मामले की सुनवाई त्वरित अदालत में की जाए। इस मामले में लापरवाही बरतने पर तत्कालीन थाना प्रभारी को निलम्बित कर दिया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला से बलात्कार की पुष्टि हुई है। जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर यशपाल सिंह का कहना है कि महिला की मौत सदमे और अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से हुई है।

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