Wednesday, Oct 27, 2021
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एमबीए करते करते बन गया नशा तस्कर, इलाके रॉबिनहुड बनने की थी चाहत

  • Updated on 9/19/2021

एमबीए करते करते बन गया नशा तस्कर, इलाके रॉबिनहुड बनने की थी चाहत

 

- 12 साल से थी तलाश, क्राइम ब्रांच ने किया गिरफ्तार

- तस्कर पर दिल्ली पुलिस ने एक लाख व यूपी पुलिस ने 50 हजार इनाम

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बरेली ड्रग माफिया नाम से चर्चित नशा तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले 12 साल से लगातार पुलिस की पकड़ से बच रहा था। तस्कर की पहचान बेहरा, बरेली उत्तर प्रदेश निवासी तैमूर खान उर्फ भोला (37) के तौर पर की गई है। वह यूपी के बरेली, रामपुर और बदायूं में प्रतिबंधित नशा की तस्करी करता था।  तैमूर की गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस ने एक लाख रुपए और उत्तर प्रदेश पुलिस ने 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया हुआ था। उसने स्नातक के बाद एमबीए में दाखिला लिया था, लेकिन इसी दौरान वह तस्करों के संपर्क में आ गया और दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में मादक पदार्थों की तस्करी करने लगा। 

क्राइम ब्रांच नारकोटिक्स सेल के डीसीपी चिन्मय बिश्वाल ने रविवार को बताया कि आरोपी की दिल्ली पुलिस को 9 अलग अलग मामलों में तलाश थी। इसके लिए टीम काफी वक्त तैमूर खान ट्रैक करने में लगी थी। इसी बीच टीम को सूचना मिली कि 16 सितंबर को एक वह सीलमपुर मेट्रो स्टेशन के पास आने वाला है। सूचना के आधार पर एक टीम मौके पर पहुंच ट्रैप लगा दिया। जैसे ही असरोपि पहुंचा पहचान पुख्ता कर टीम ने उसे घेर पकड़ने की कोशिश की, पर तैमूर को पुलिस टीम के होने का संदेह होते ही वह घेरा तोड़ फरार होने लगा। पर सतर्क टीम ने उसे दबोच लिया।  

तैमूर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने तीन मामलों में भगोड़ा घोषित किया हुआ था। वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी इसे एक मामले में भगोड़ा घोषित कर रखा था। साल 2007 में तैमूर ने तस्करी करनी शुरू की थी। इस बीच साल 2008 में वह पहली बार स्मैक के साथ गिरफ्तार हुआ था। सात महीने की सजा काटने के बाद उसे जमानत मिल गई थी। जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने फिर से तस्करी का धंधा शुरू क दिया था।

 

स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से कराता था अफीम की खेती

 पूछताछ में पता चला कि तैमूर अफीम से हेरोइन बनाना जानता है और उसकी तस्करी करता था। उसने इसके लिए बरेली के कई गांवों में भोलेभाले लोगों को पैसे का लालच देकर उनसे अफीम की खेती भी करता था। सजे लिए उसने स्थानीय पुलिस को भी मिला रखा था और उनकी मदद से तैमूर तस्करी की वारदात को अंजाम दे रहा था। इसे अपने इलाके का रोबिन हुड बांबे की चाहत थी, इसके लिए तैमूर आसपास के लोगों की आर्थिक तौर पर मदद भी करता था, ताकि एहसान से लोग उसके धंधे के बारे में बाहर के लोगों व पुलिस को जानकारी ना दे।

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