Sunday, Mar 24, 2019

खालिस्तान के आका भिंडरावाले का करीबी रहा है गुरसेवक, 50 से अधिक मामलों में पुलिस को दे रहा था चकमा

  • Updated on 3/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। बबला वर्तमान में पाकिस्तान में बैठे केसीएफ चीफ परमजीत सिंह पंजवाड़ के निर्देश पर अपने संगठन को फिर से मजबूत करने की योजना बना रहा था और भारत के जेलों में बंद जगतर सिंह हवारा और अन्य आतंकवादियों के संपर्क में था।

सीपी एके सिंगला ने बताया कि बीते 12 मार्च को क्राइम ब्रांच के पास सूचना आई कि खालिस्तान कमांडो फोर्स का आतंकी गुरसेवक सिंह कश्मीरी गेट इलाके में आएगा। उसके पास हथियार भी हो सकता है। इस जानकारी पर एसीपी आरके ओझा की देखरेख में इंस्पेक्टर पीसी खंडूरी और एसआई दाता राम की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 

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पुलिस हिरासत से भाग गया
वर्ष 1985 में राजस्थान स्थित भिलवाड़ा रेलवे स्टेशन पर वह पुलिस हिरासत से भाग गया था। वर्ष 1986 में उसने अपने साथियों सहित पंजाब के पूर्व डीजीपी जुलिओ रिबेरियों के जालंधर स्थित घर पर हमला किया था। आतंकियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का बदला लेने के मकसद से उन्होंने यह हमला किया था। 

जेल में रहकर आकाओं से किया संपर्क 
तिहाड़ जेल में रहने के दौरान ही उसने पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से संपर्क किया था। दिल्ली में वारदात करने के लिए उसने एके47 सहित भारी मात्रा में हथियार एवं विस्फोटक मंगवाए थे।

इसका पता चलने पर वर्ष 1998 में पुलिस ने पंजाबी बाग इलाके से दो आतंकियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 18 किलो आरडीएक्स, एक एके47, 100 गोलियां, दो पिस्तौल, पांच मैगजीन, 8 हैंडग्रेनेड, चार टाइमर और डेटोनेटर बरामद किए थे। इस मामले में भी गुरसेवक को गिरफ्तार किया गया था। 

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वर्ष 2004 में दोबारा हिरासत से भागा
पंजाब पुलिस वर्ष 2004 में उसे पेश करने के लिए तीस हजारी अदालत ले गई थी, जहां से वह फरार हो गया था। इस बाबत सब्जी मंडी थाने में मामला दर्ज कर इसकी जांच स्पेशल सेल को सौंपी गई थी।

पुलिस को उसके खौफनाक इरादे पता करने थे क्योंकि वह सजा पूरी करने से कुछ समय पहले ही भाग गया था। हालांकि एक सप्ताह बाद ही उसे लुधियाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वर्ष 2004 से लेकर 2010 तक वह जेल में रहा।
बेल पर आने के बाद बदला घर

वर्ष 2010 में वह जब बेल लेकर आया तो सबसे पहले उसने पंजाब स्थित अपना घर बदल लिया। उसने अदालत में लंबित मामलों में पेश होना बंद कर दिया। पटियाला हाउस अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। उधर वह लगातार लूटपाट की वारदातों में लिप्त हो गया। तीन बार उसे वर्ष 2014, 2015 और 2016 में लुधियाना पुलिस ने गिरफ्तार किया। 

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आठ पुलिसकर्मियों की हत्या
वर्ष 1986 में खालिस्तान कमांडो फोर्स के सरगना जरनल लाभ सिंह, गुरिंदर पाल सिंह और स्वर्णजीत सिंह को पुलिस हिरासत से मुक्तकरवाने के लिए उसने अपने साथियों सहित पुलिस टीम पर हमला कर दिया था। इस हमले में उन्होंने आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। यह वारदात उन्होंने जालंधर की अदालत परिसर में की थी।

थाने से लूटे थे हथियार
इसके बाद उसने पंजाब के एक पुलिस थाने पर हमला कर 16 राइफल, छह कारबाइन, गोलिया, दो रिवाल्वर, पुलिस जीप और कार लूट ली थी। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक ही परिवार के 9 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके बाद से वह जेल में ही रहा। 1986 से लेकर वर्ष 2004 तक अधिकांश समय उसे तिहाड़ जेल के हाईरिस्क वार्ड में रखा गया। 

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