Thursday, Aug 18, 2022
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बाल कलाकारों को ना हो हानि, एनसीपीसीआर ने जारी किए दिशानिर्देश

  • Updated on 6/25/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। मनोरंजन जगत में बड़ी संख्या में बाल कलाकार काम करते हैं। बच्चों के टैलेंट को देखते हुए कई कार्यक्रम तो बच्चों को केंद्र में रखकर भी तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में बाल कलाकारों की सुरक्षा व शारीरिक व मनोवैज्ञानिक तनावों से दूर रखते हुए किस प्रकार वो काम करेंगे, इसका दिशानिर्देश राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा जारी किया गया है। 
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बाल अधिकारों का मनोरंजन उद्योग में संरक्षण बेहद जरूरी : प्रियांक कानूनगो
एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने कहा कि मनोरंजन उद्योग में प्रत्येक प्लेटफॉर्म चाहे वो सिनेमा हो, टीवी सीरियल, रिएलिटी शो, ओटीटी व सोशल मीडिया हर जगह बच्चे काम करते दिख जाते हैं। ऐसा में जरूरी था कि ऐसा दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार किया जाए जो बच्चों के अधिकारों का संरक्षण कर सके। इसी को ध्यान में रखते हुए अब बच्चों से लगातार 27 दिनों से अधिक काम नहीं करवाया जाएगा। बच्चे की आय का 20 फीसदी उसके खाते में जमा करना होगा। निर्माताओं को किसी शूटिंग में बच्चे को शामिल करने के लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति प्राप्त करने की जरूरत होगी, जिसमें इस बात का डिस्क्लेमर देना होगा कि बच्चों के शोषण या उत्पीडऩ से रोकने के उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। काम के दौरान बच्चे को प्रत्येक तीन घंटे के बाद एक ब्रेक देना होगा और प्रतिदिन उसे एक से अधिक पाली में काम नहीं कराया जाएगा। इतना ही नहीं, बाल कलाकार को बंधुआ मजदूर प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के तहत बंधुआ मजदूरी के लिए कोई करार नहीं किया जाएगा। साथ ही निर्माता को यह सुनिश्चित करना होगा कि शूटिंग में लगे बच्चों की स्कूली शिक्षा प्रभावित न हो व मनोरंजन उद्योग में व्यस्तता के कारण स्कूल में अनुपस्थित रहे बच्चे को निर्माता द्वारा नियुक्त एक निजी ट््यूटर द्वारा पढ़ाया जाएगा। 
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सौंदर्य प्रसाधन से ना हो बच्चे को नुकसान
एनसीपीसीआर के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रोडक्शन कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाल कलाकारों के लिए काम का माहौल सुरक्षित हो और उन्हें हानिकारक प्रकाश, परेशान करने वाले या हानिकारक सौंदर्य प्रसाधनों के संपर्क में नहीं आना चाहिए। साथ ही उन्हें वयस्कों, विशेष रूप से विपरीत ङ्क्षलग के साथ ड्रेसिंग स्पेस या कमरे साझा करने नहीं दिया जाना चाहिए।     बच्चों को शराब, धूम्रपान या किसी भी असामाजिक गतिविधि और आपराधिक व्यवहार में लिप्त नहीं दिखाया जाना चाहिए। 

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