Wednesday, Oct 27, 2021
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निर्भया केस: दोषियों के डेथ वॉरंट पर फैसला 7 जनवरी तक के लिए टाला

  • Updated on 12/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। निर्भया (Nirbhaya) गैंग रेप केस (Gang Rape case) के दोषियों की डेथ वारंट पर फैसला पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 जनवरी तक के लिए टाल दी है। बहस के दौरान दिल्ली की अदालत को निर्भया मामले में चार दोषियों में से एक की पुर्निवचार अर्जी खारिज करने के उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बारे में सूचित किया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का आदेश आधिकारिक रूप से उनके पास आने दीजिये।

हालांकि पीड़िता की मां ने बचाव पक्ष के वकील से कहा कि इससे ‘डेथ वारंट’ जारी करने में कोई रुकावट नहीं पड़ता।अदालत दिल्ली सरकार की उस अर्जी पर सुनवायी कर रही थी जिसमें निर्भया मामले में चारों दोषियों को फांसी देने के लिए ‘डेथ वारंट’ जारी करने का अनुरोध किया गया था। 

इसके पहले, अक्षय की पुनर्विचार याचिका (Review petition) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसी मामले में मंगलवार को महज दस मिनट के भीतर ही सुनवाई टल गई, जब चीफ जस्टिस ने इस केस से खुद को अलग कर लिया। आज तीन जजों की नई बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। 

मंगलवार की सुनवाई के दौरान निर्भया के दोषी अक्षय के वकील ने अपनी दलीलें रखते हुए कहा कि जिस तरह से गिरफ्तारी और जांच हुई वो शक के दायरे में है। उन्होंने कहा कि इस केस की जांच पर जनता, मीडिया और राजनीतिक दबाव भी रहा। 

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याचिका में कही गई थी बढ़ते प्रदूषण की बात
अक्षय के वकील ने पुर्निवचार याचिका में मौत की सजा पर ऐसे वक्त में सवाल उठाया है, जब बढ़ते प्रदूषण के चलते जीवनकाल छोटा हो रहा है। शीर्ष न्यायालय ने पिछले साल नौ जुलाई को मामले के तीन अन्य दोषियों मुकेश (30), पवन गुप्ता (23) और विनय शर्मा (24)  द्वारा दायर पुर्निवचार याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि 2017 के फैसले पर पुर्निवचार के लिए उन लोगों द्वारा कोई आधार नहीं बनाया गया है।      

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क्या था पूरा मामला
गौरतलब है कि 16-17 दिसंबर 2012 की रात दक्षिण दिल्ली (South Delhi) में एक चलती बस में छह लोगों ने 23 वर्षीय एक छात्रा से सामूहिक बलात्कार (Rape) किया था और उसे सड़क पर फेंकने से पहले बुरी तरह से घायल कर दिया था।  इस छात्रा को निर्भया नाम दिया गया, जिसने अपनी चोट के चलते सिंगापुर के एक अस्पताल में 29 दिसंबर को दम तोड़ दिया।      

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