Thursday, Aug 11, 2022
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श्मशान घाट हादसा : भूख हड़ताल पर महिलाएं, अफसर और जनप्रतिनिधि मौन

  • Updated on 12/19/2021

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। श्मशान घाट हादसा प्रभावितों का दर्द एक बार फिर छलक उठा है। वादे के बावजूद सरकारी नौकरी और मकान न मिलने से वह बेहद नाराज हैं। साढ़े 11 माह से ज्यादा का समय गुजर चुका है, मगर उन्हें शासन-प्रशासन स्तर से भरपूर राहत नहीं मिल पाई है। नतीजन उन्हें आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पड़ा है। पिछले 4 दिन से सर्द मौसम में खुले आसमान के नीचे महिलाएं आमरण अनशन कर रही हैं। किसी जिम्मेदार अफसर या जनप्रतिनिधि ने अब तक उनके दर्द को बांटने में रूचि नहीं दिखाई है। 

सरकारी नौकरी व मकान की दरकार
जनपद गाजियाबाद में मुरादनगर नगर पालिका परिषद कार्यालय में 21 दिन से धरना-प्रदर्शन जारी है। 4 दिन से महिलाएं आमरण अनशन कर रही हैं। यह महिलाएं उखलारसी श्मशान घाट हादसा से प्रभावित परिवारों से जुड़ी हैं। जिन्होंने हादसे में अपनों को खो दिया था। प्रतिदिन 2-3 दिन महिलाएं भूख हड़ताल करती हैं। इसी क्रम में रविवार को ममता व कविता ने मोर्चा संभाला। हाड़ कंपाती ठंड और शीतलहर के प्रकोप के बीच महिलाओं का यह आंदोलन खुले आसमान के नीचे जारी है। 

साढ़े 11 माह बाद भी वादे अधूरे
उनका कहना है कि हादसे के बाद प्रभावित परिवारों को सरकारी नौकरी एवं मकान देने का आश्वासन दिया गया था, मगर यह आश्वासन अभी तक अधूरा है। इस बारे में पूछने पर संबंधित अधिकारी या जनप्रतिनिधि कोई संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं। महिलाओं ने कुछ दिन पहले जिला मुख्यालय पहुंच कर भी प्रशासनिक अधिकारियों को मांगों से अवगत कराया था। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि मांग पूरी होने तक वह पीछे नहीं हटेंगे। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस आंदोलन को समर्थन भी दिया है। 

25 नागरिकों की गई थी जान
मुरादनगर विधायक और नगर पालिका चेयरमैन के रवैये को लेकर भी नागरिकों में रोष व्याप्त है। बता दें कि मुरादनगर के उखलारसी में विगत 3 जनवरी 2021 को श्मशान घाट में खुले हॉल की छत भरभरा कर गिरने से वहां मौजूद 25 नागरिकों की जान चली गई थी। जबकि 18 गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हादसे के बाद नगर पालिका की तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के अलावा ठेकेदार को भी जेल भेजा गया था। उच्चस्तरीय जांच में मालूम पड़ा कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल होने से यह हादसा हुआ था। 
 

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