Friday, Dec 09, 2022
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मजनू टीला के पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की स्थिति जानेगा डीसीडब्ल्यू

  • Updated on 8/18/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। मजनू का टीला में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों में महिलाओं व बच्चों की स्थिति पर दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने अध्ययन शुरू किया है। जिसके बाद उनके पुनर्वास की सिफारिश सरकार से की जाएगी। मालूम हो कि ये लोग पिछले कई सालों से यहां रह रहे हैं। उनकी दयनीय स्थिति है और उनके पास आवास, पानी का कनेक्शन, बिजली, शौचालय और आजीविका के उचित साधनों जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। 
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डीसीडब्ल्यू ने हिंदू शरणार्थियों की समस्याओं का पता लगाने के लिए अध्ययन शुरू किया
माालूम हो कि यहां रहने वाले शरणार्थी पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण, अपहरण, धार्मिक हमले, यौन उत्पीडऩ से लेकर अन्य उत्पीडऩों से बच कर आए हैं। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने बहुत कुछ झेला है और प्रत्येक शरणार्थी परिवार के पास साझा करने के लिए एक डरावनी कहानी है। वर्तमान में वे यमुना नदी के तट पर एकांत में रह रहे हैं और कई परेशानियों से त्रस्त हैं, खासकर मानसून के दौरान। वे कच्चे घरों और टेंट में रहने को मजबूर हैं। उनके पास उचित शौचालय की व्यवस्था नहीं है और महिलाओं और बच्चे अक्सर खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं। बिजली की कमी ने क्षेत्र को और असुरक्षित बना दिया है। कई अनुरोधों के बावजूद उन्हें नागरिकता भी नहीं दी गई है। उनकी इसी स्थिति को देखते हुए डीसीडब्लयू अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने पिछले कई वर्षों से दिल्ली में सबसे दयनीय स्थिति में रह रहे हिंदू शरणार्थियों की समस्याओं का पता लगाने के लिए अध्ययन शुरू किया है। डीसीडब्ल्यू ने विभिन्न सरकारी विभागों ने शरणार्थियों की परेशानियों के समाधान के लिए उठाए गए कदमों का पता लगाने के लिए उनको नोटिस भी जारी करेगा। इसके अलावा डीसीडब्ल्यू ने मजनू का टीला में रहने वाले हिंदू शरणार्थियों के पुनर्वास के लिए विभिन्न सरकारी विभागों को सिफारिशें भी देगा।
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शरणार्थियों के घरों में धुस जाते हैं सांप व बिच्छू : स्वाति 
डीसीडब्ल्यू अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि मैं इन हिंदू शरणार्थियों से मजनू का टीला में मिली हूं। वो दयनीय परिस्थिति में हैं, उनके कच्चे घरों में मानसून के दौरान सांप व बिच्छू धुस जाते हैं। खुले में शौच जाना पड़ता है। बिजली-पानी की कमी से यह इलाका रहने लायक नहीं है, साथ ही यहां रहने वालों के पास आजीविका के पर्याप्त अवसर भी नहीं है। उन्हें अभी तक नागरिकता नहीं मिली, यह दु:खद स्थिति है जिसकी गहराई से जांच की जाएगी। दिल्ली सरकार व भारत सरकार को उनकी स्थिति सुधारने की सिफारिश दी जाएगी क्योंकि वो पिछले कई सालों से भारतीय धरती पर रह रहे हैं और उन्हें तत्काल पुनर्वास की जरूरत है।

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