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खतरे में दिल्ली-NCR, बारिश में ढह जाती हैं बहुमंजिला इमारतें... एक विशेष रिपोर्ट

  • Updated on 7/18/2019

नई दिल्ली टीम/डिजिटल। बारिश शुरु होने के साथ ही शहरों में बड़ी-बड़ी इमारतों का धराशाई होकर गिरना शुरू हो जाता हैं और इसमें कई व्यक्तियों को अपनी जान भी गवांनी पड़ती है। हाल ही में मुंबई के डोंगरी इलाके में सौ साल पुरानी चार मंजिला इमारत अचानक गिर गई जिससे जान-माल का अत्यन्त नुकसान देखने को मिला। वहीं दिल्ली में भी अब बारिश का दौर शुरु हो गया है जिसके बाद दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को भी अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है।

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दिल्ली-एनसीआर में जब भी तेज बारिश होती है तो यहां मुंबई जैसी घटनाएं आमतौर पर देखने को मिल जाती है। इन जानलेवा घटनाओं के बाद नेता और प्रशासन हादसों पर सिर्फ शोक जताते है और फिर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।

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दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के कई ऐसे इलाकों में लोग कम किराया होने की वजह से पुरानी जर्जर इमारतों में रहने को मजबूर हैं। इनमें से अनेक परिवारों का अपना खुद का मकान है और इसके चलते उनके पास वहां रहने के सिवा कोई विकल्प नहीं बचा है।

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आपको बता दें कि दिल्ली-NCR में अब भी कई जगह ऐसी हैं जहां पर अवैध रूप से ढ़ेरों इमारतें बनाई गई हैं। जो अत्यन्त जर्जर अवस्था में है। आईए नजर डालते है दिल्ली- NCR में घटीत हुई ऐसी ही कुछ खास घटनाओं पर...  

17 जुलाई 2018 
दिल्ली NCR के शाहबेरी गांव में आज से लगभग 1 साल पहले 17 जुलाई 2018 को छह मंजिला इमारत ढह गई थी। इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई थी। इलाके में स्थित एक अन्य मकान भी झुक गया था। हालांकि, उसे समय रहते ही खाली करा दिया गया था। करीब 20 हजार से अधिक लोग आज भी ऐसी इमारतों में रहते हैं जो अवैध रूप से बनीं हैं और कभी भी हादसे को न्यौता दे सकती हैं।

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गाजियाबाद में गिरी थी पांच मंजिला इमारत
पिछले साल ही गाजियाबाद के खोड़ा गांव में 5 मंजिला बिल्डिंग जमीन में धंस गई थी। परन्तु प्रशासन ने इस पर सफाई देते हुए कहा था कि इमारत पहले ही झुक गई थी और वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। हालांकि प्रशासन ने इस दुर्घटना के पश्चात करीब 100 अवैध इमारतों को सीज कीया था। आपको बता दें कि 15 लाख से अधिक आबादी वाले खोड़ा में कई जर्जर इमारतें हैं जो कभी भी गिर सकती है।

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ललिता पार्क में 67 लोगों की मौत
दिल्ली के ललिता पार्क में नवंबर 2010 में एक इमारत के मलबे में धस जाने से 67 लोगों की मौत हुई थी जबकी 77 लोग घायल हो गए थे। यह हादसा इतना बड़ा था की इसकी जांच लगभग 8 वर्षों तक चली थी। और 8 वर्ष बाद केवल जूनियर इंजीनियर पर आरोप लगा। और तो और इंजीनियर की पेंशन से महज पांच फीसद रकम काटने के आदेश सजा के रुप में दिए गए थे।

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अशोक विहार और किराड़ी में भी गिरी इमारत
2018 सितंबर में अशोक विहार फेस 3 में तीन मंजिला इमारत धराशाही होकर ध्वस्त हो गई थी। वहीं इस दुर्घटना में सात लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। जबकी किराड़ी में भी इमारत के गिरने से एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी।

करोलबाग में इसी साल 27 फरवरी 2019 को एक चार मंजिला इमारत जर्जर अवस्था में गिर गई थी। इस हादसे का करण भी बिल्डिंग का पुराना और कमजोर होना ही था।

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