Monday, Dec 06, 2021
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दिल्ली: कई हिंसक घटनाओं का गवाह है लालकिला

  • Updated on 1/28/2021

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। 26 जनवरी 2021 को किसान रैली के नाम पर जो घटना लालकिले में घटी उसने पूरे देश का सिर झुका दिया है। लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है जब लालकिले को नुकसान पहुंचाने या फिर देश की अस्मिता को ठेस लगाने की कोशिश की गई है। इससे पहले भी कई बार आक्रमणकारियों व उपद्रवियों का निशाना लालकिला बन चुका है। आइए पलटते हैं दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. संतोष कुमार राय के साथ ऐतिहासिक दस्तावेजों को और जानते हैं कि कब-कब और किस-किसने पहुंचाया है लालकिले को नुकसान।

नादिरशाह ने किया 1747 में लालकिले पर पहला हमला
लालकिले पर हमले की कहानी साल 1747 से शुरू होती है। नादिरशाह ने उस समय लालकिले पर हमला कर उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। लालकिले में लगे संगमरमर के ढांचों को तोड दिया था, हीरे-जवाहारात निकाल लिए थे और तख्ते-ताउस व कोहिनूर हीरा भी उठा ले गया था। उस समय मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला थे।

1783 में तीन सिक्ख सरदारों ने किया हमला
साल 1783 में तीन सिक्ख सरदारों बघेल सिंह, जस्सा सिंह अहलूवालिया और जस्सा सिंह रामगढिया ने हमला किया था। इन्होंने लालकिले पर कब्जा कर लिया था। बघेल सिंह लालकिले के अंदर धूसे और दीवान-ए-आम व दीवान-ए-खास में लगे हीरे-जवाहारात व सोने-चांदी की जडाई को खोदकर ले गए। इस दौरान मुगल बादशाह शाह आलम थे। 

1788 में लालकिले में हुआ विभत्स नाच, गंवानी पडी बादशाह को आंखें
1788 में ही जब मुगल बादशाह शाह आलम थे तब दोबारा लालकिले पर हमला हुआ। इस बार गुलाम कादिर जोकि रूहेला सरदार था, दो हजार सैनिकों को लेकर लालकिले में धूस गया, मुगल कमजोर हो चुके थे और लालकिला की सुरक्षा भी ना कर पाए। वो सीधा बादशाह के सिंहासन पर बैठ गया और सारी राजकुमारियों व रानियों को नंगा कर लालकिले के आंगन में खडा कर दिया। सारे मुगल राजकुमारों को नग्नावस्था में नचवाया और शाह आलम की आंखें निकलवा दीं। तब मराठा सेना ने महादजी सिंधिया के नेतृत्व में मुगल साम्राज्य की रक्षा की और शाह आलम का बदला गुलाम कादिर से मथुरा में लिया गया। यही नहीं सिक्खों से संधि भी की कि वो कभी दिल्ली में नहीं धुसेंगे।

1857 में अंग्रेजों ने गुस्से में पहुंचाया लालकिले को नुकसान
1857 विद्रोह के दौरान लालकिले में रह रहे ब्रिटिश बच्चों व महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया गया था। जिससे गुस्साई ब्रिटिश सेना लालकिले में धुसी, बादशाह बहादुरशाह जफर को बंदी बनाया और अंदर सिर्फ मोती महल को छोडकर बाकी सभी महलों को तोड दिया गया। रक्षात्मक दीवारों को ढहा दिया गया और सेना की छावनी में परिवर्तित कर दिया। 

साल 2000 में हुआ लालकिला पर आतंकवादी हमला
 22 दिसंबर 2000 को लालकिले पर सेना की बैरक पर आतंकवादी हमला किया गया था। इस हमले में दो सैनिकों समेत तीन लोग मारे गए थे। सेना की जवाबी कार्रवाई में लालकिला में घुसपैठ करने वाले दो आतंकवादी भी मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा ने ली थी।

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