Monday, May 16, 2022
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चार्जशीट में दावा- 2019 में मोदी सरकार बनते ही शुरू हो गई थी दिल्ली दंगों की साजिश

  • Updated on 9/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जब 2019 के लोकसभा चुनावों के परिणाम घोषित किए गए थे, तभी से दिल्ली दंगों की साजिश रचने वाले सक्रिय हो गए थे। मुख्य आरोपियों के तेवर हिंसा भड़काने वाले थे। चुनावी परिणामों के बाद से ही उनके दिमाग में हिंसा पनपनी शुरू हो गई थी। ये बात कही गई है दिल्ली पुलिस (Delhi Police) द्वारा दंगों की साजिश के केस में यूएपीए (UAPA) के तहत 15 लोगों के खिलाफ दायर की गई 2,695 पन्नों की चार्जशीट (Chargesheet) में।   

जिस चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने ये दावा किया है उसमें आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, पिंजरा तोड़ संगंठन की देवांगना कलिता और नताशा नरवाल, डीयू की पूर्व छात्रा गुलफिशा, जामिया मिलिया इस्लामिया पीएचडी के छात्र मीरन हैदर और जामिया समन्वय समिति के मीडिया समन्वयक सफूरा जरगर के नाम शामिल हैं।

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चार्जशीट में बताया कैसे ये दंगा है आतंकवादी गतिविधि
डीसीपी (स्पेशल सेल) पीएस कुशवाह और एसीपी (स्पेशल सेल) आलोक कुमार द्वारा हस्ताक्षरित अंतिम रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, आतंकवादी गतिविधि वो होती है जिसके तहत सरकार से किसी भी राजनीतिक मांग को मनवाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जाता है।  

इसके बाद चार्जशीट में यह समझाने की कोशिश की गई है कि भारतीय संदर्भ में UAPA की धारा 15 के अनुसार  आतंकवादी गितिविधी क्या है। लिखा गया है कि इस मामले में, आग्नेयास्त्रों, पेट्रोल बमों का उपयोग हुआ जिससे पुलिस कर्मियों की मौत हुई, राज्य में आंतक फैलाया गया और केंद्र सरकार को सीएए और एनआरसी को वापस लेने के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई। जिससे ये स्पष्ट होता है कि ये एक आंतकवादी गतिविधी थी।  

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चार्जशीट में व्हाट्सएप ग्रुप और कॉल डिटेल का खुलासा
चार्जशीट में, पुलिस ने डीपीएसजी (दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप) और वारियर्स जैसे व्हाट्सएप ग्रुपों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, मनी ट्रेल और व्हाट्सएप ग्रुपों के खुलासे किए हैं। आरोप पत्र में उल्लेख किया गया है कि "वे (षड्यंत्रकारी) भारत सरकार को अपने घुटनों पर लाने के उद्देश्य से और अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत  दौरे को असफल करने के उद्देशय से हिंसा कर रहे थे। ऐसा करके वो एक तीर से दो निशाने लगाना चाहते थे। 

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