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ताहिर की जमानत याचिक खारिज, जज बोले- दंगे भड़काने के लिए किया राजनैतिक दबदबे का इस्तेमाल

  • Updated on 10/23/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फरवरी माह में हुए उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों (Delhi Riots) से जुड़े तीन मामलों में कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन (Tahir Hussain) की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना है कि  यह देखते हुए कि वह दंगों के समय पार्षद जैसे बड़े राजनीतिक पद पर तैनात थे और दंगों को अधिक से अधिक भड़काने के लिए उन्होंने अपनी शक्ति और राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल किया। कोर्ट ने कहा कि इसे साबित करने के लिए कई प्रमाण भी दिए जा चुके हैं। 

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने गुरुवार को एक आदेश में यह टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने विशेष लोक अभियोजक मनोज चौधरी के इस तर्क से सहमति जताई कि ताहिर के साथी आरोपियों को जमानत मिल गई है तो इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि उन्हें भी मिलनी चाहिए। इन मामलों में ताहिर और अन्य सह आरोपियों की भूमिका बिल्कुल अलग- अगल है।  

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'दंगे भड़काने में ताहिर ने किया राजनैतिक दबदबे का इस्तेमाल' 
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने अपने आदेश में लिखा कि यह उल्लेखनीय है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों के समय, ताहिर एक पार्षद के पद पर शक्तिशाली पद पर था और यह प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी बाहुबल शक्ति और राजनैतिक दबदबे का इस्तेमाल साम्प्रदायिक दंगों की योजना बनाने, उकसाने और उन्हें भड़काने में किया।

इसे साबित  करने के लिए रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है कि ताहिर अपराध के स्थान पर मौजूद था और एक विशेष समुदाय के दंगाइयों को उकसा रहा था। इन दंगों के दौरान भले ही वो अपनी शारीरिक शक्ति का इस्तेमाल नहीं कर रहा था, लेकिन बौद्धिक शक्ति का इस्तेमाल करते हुए लोगों को इतना उकसा रहा था कि वो उसके इशारे पर किसी की जान भी ले सकते थे।  

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'विभाजन के बाद हुए दंगों की याद दिल्ली दंगों ने ताजा की'
विभाजन के बाद हुए दंगों और दिल्ली के दंगों की तुलना करते हुए अदालत ने कहा, “ये सर्वविदित है कि 24 फरवरी 2020 के दिन उत्तर पूर्व दिल्ली को सांप्रदायिक उन्माद ने जकड़ लिया। इन दंगों ने विभाजन के दिनों के दौरान हुए नरसंहार की याद ताजा कर दी। कुछ ही समय के अंतराल में ये दंगे पूरी दिल्ली में फैलने लगे और राजदानी में जंगल आग की तरह ये दंगे फैलते और न जाने कितने मासूम बेकसूरों की जान चली गई।

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'ताहिर के खिलाफ आरोप अत्यंत गंभीर'
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली दंगा 2020 एक बड़ी वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा वाले देश की अंतरात्मा में एक गहरा घाव है। ताहिर के खिलाफ आरोप अत्यंत गंभीर हैं। इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती। जानकारी के लिए आपको बता दें कि संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोद में हो रहे आंदलोन इस साल फरवरी माह में दंगों में बदल गए और इनमें 53 लोगों की जान गई 200 से अधिक लोग घायल हुए और करोड़ों की संपत्ती जलकर राख हो गई। 

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