Monday, May 23, 2022
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घरेलू हिंसा मामले में महिला अस्थायी पते के आधार पर कहीं भी कर सकती है केस- कोर्ट

  • Updated on 1/24/2022

घरेलू हिंसा मामले में महिला अस्थायी पते के आधार पर कहीं भी कर सकती है केस- कोर्ट
 

नई दिल्ली, 24 जनवरी  (नवोदय टाइम्स): साकेत कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में दायर एक शख्स याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि महिला देश के किसी भी हिस्से में अस्थायी रूप से भी रही हो तो भी वह  वहां से मुकदमा दायर कर सकती है। 

शख्स ने दायर याचिका में कहा कि पत्नी ने उसके खिलाफ  दिल्ली की अदालत में मुकदमा दर्ज करवाया है जबकि ना तो वह और ना ही शिकायतकर्ता दिल्ली में रहती हैं। याचिका में बताया गया कि शिकायतकर्ता व आरोपी दोनों ही उत्तर प्रदेश के नोएडा में रहते हैं। 

अदालत ने उस व्यक्ति की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस मामले की शिकायतकर्ता द्वारा पेश साक्ष्यों के आधार पर कहा गया है कि वह वर्ष 2018 में दक्षिणी दिल्ली में रह रही थी। इस बाबत जिस मकान में शिकायतकर्ता रही, उस मकान मालिक ने भी अदालत में शपथपत्र दाखिल कर बताया है कि शिकायतकर्ता उनके यहां रहती थी।

अदालत ने कहा कि ऐसे में कानून के हिसाब से पीड़िता दिल्ली में अपना मुकदमा दर्ज करा सकती है और इस मामले की दिल्ली की अदालत में सुनवाई में कोई विसंगति नहीं है। ऐसे में शिकायतकर्ता महिला के मुकदमे को यहां सुना जाना उचित है।
घरेलू हिंसा का है मामला

महिला ने पति व ससुराल वालों के खिलाफ दिल़्ली में घरेलू हिंसा समेत अन्य मुकदमे दर्ज कराए हुए हैं। महिला और ससुराल पक्ष के लोग नोएडा में रहते हैं। पति का कहना था कि जब पत्नी यूपी में रह रही है तो उसने दिल्ली में मुकदमा दर्ज क्यों कराया है।

उसने इसी आग्रह के साथ अदालत में याचिका लगाई थी कि यह मामला दिल्ली की अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।  लेकिन अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया ,अदालत ने कहा कि महिला का अस्थायी पता दिल्ली का जो कानून के हिसाब से मान्य है। 
 

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