Monday, Jan 21, 2019

सबसे ज्यादा क्राइम सीरीज देखती हैं महिलाएं, इस वजह से बढ़ती है दिलचस्पी...

  • Updated on 1/8/2019

नई दिल्ली/श्वेता राणा। इन दिनों अगर बात की जाए कंटेट की तो हर जगह सिर्फ क्राइम, थ्रिलर और सस्पेंस ही छाया हुआ है। बात चाहे फिल्मों की हो, वेब सीरिज की हो, साहित्य की हो या रियल लाइफ की। फिल्मों की कहानी से लेकर सुबह अखबार में छपी पहली हेडलाइन तक हर अगर सबसे ज्यादा तवज्जो किसी को दी जा रही है तो वो है क्राइम यानि अपराध को।

अपराध करना एक गुनाह है जिसकी सजा भी उसके हिसाब से तय है, लेकिन बावजूद इसके इंसान गुनाह करता है। कई बार इंसान अपराध करने के बाद पशेमान होकर अपने गुनाह को कबूल कर सजा काटने को तैयार हो जाता है लेकिन कई दफा वह इतनी सफाई से जुर्म को अंजाम देता है कि उसे सुलझाने में दशकों लग जाते हैं।

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आरूषि मर्डर केस को इसकी बानगी कह सकते है। ये एक ऐसा अनसुलझा हत्याकांड है जिसपर किताब  लिखी गई, फिल्म बनी लेकिन रिजल्ट आज भी जीरो है। भले ही मौके पर मौजूद सबूतों के आधार पर उस हत्याकांड में अपराधी आरूषि के माता-पिता को ही माना गया लेकिन बाद में कोर्ट ने ये कहते हुए उन्हें बरी कर दिया कि सिर्फ इन साक्ष्यों के आधार पर उन्हें मुजरिम ठहराना गलत है। 

क्यों लोगों को क्राइम रिलेडिट सबजेक्ट में आता है इंटरेस्ट
इसानों की क्राइम  रिलेडिट सबजेक्ट में दिलचस्पी का सबसे बड़ी कारण उसकी कहानी होती है, जो या तो एक मोड़ पर लाकर छोड़ दी जाती है, जहां से कहानी का दूसरा दिलचस्प पहलू सामने आने वाला होता है। 

या फिर वो कहानी अगर सच्ची घटना पर आधारित होती है तो वो हमारे जहन में बस जाती है, जो हमारी दिलचस्पी में इजाफा करती है।

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लोगों की क्राइम में इस कदर दीवानगी है कि इसे साहित्य में भी जगह मिली है। अंग्रेजी के पॉपुलर शरलॉक होम्स की ही बात करें इनकी लिखी किताबों में खालिस जुर्म का बखान होता था, लेकिन फिर भी लोग उसे खूब चाव से पढ़ते थे।

ऐसा सिर्फ इसलिए होता था क्योंकि इनकी किताबों में मुख्य किरदार ही आम लोगों के लिए अंत में हीरो बन जाता था। लोगों की इसी रुचि ने क्राइम को एक अलग जगह दिलाई है साहित्य में , फिल्मों में और लोगों के जहन में।

एंटरटेनमेंट की दुनिया में अभी हाल ही में आई कुछ फिल्में और वेब सीरीज इसलिए अपनी छाप छोड़ने में सफल रही क्योंकि वे सीरियल कही न कही लोगों की असल जिंदगी में घटी घटनाओं से प्रभावित होती हैं और ये फिक्शनल प्रोग्राम एक अलग पहलू से अपनी कहानियों को पेश करते हैं, जिससे इंसाफ करने में भी मदद मिलती है।

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यहां सबसे खास बात यह है कि इस क्राइम सीरीज का सबसे बड़ा फैन बेस महिलाओं का है। ऐसा कहना है प्रोफेसर फलिन का। उनके मुताबिक इस तरह के सीरियल के जरिए वो खुद को मजबूत करने की कोशिश करती हैं। 

इन क्राइम थ्रिलर सीरियल के जरिए लोग ये जानने की कोशिश नहीं करते हैं कि अपराध किसने किया बल्कि ये जानने में होती है कि आखिर अपराध हुआ कैसे, और यही सवाल इन सीरियल में लोगों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं।

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