Sunday, Sep 19, 2021
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आतंक की हर साजिश होगी नाकाम, सुपरकॉप रखते हैं दिल्ली को महफूज 

  • Updated on 1/18/2021

नई दिल्ली/ संजीव यादव। फिर से जारी हुआ अलर्ट और आतंकियों के पोस्टर जारी किए गए हैं, आशंका है कि आतंकी एक बार फिर राजधानी दिल्ली को दहलाने की साजिश का प्लान कर रहे हैं, नतीजतन इंटेलिजेंस और राजधानी के वो सुपरकॉप फिर से एक्टिव हो गए हैं। आखिर कौन हैं ये सुपरकॉप और दिल्ली पुलिस के वो लोग, जो 2005 के बाद हर बार आतंकियों की साजिश का मुंहतोड़ जवाब देते हैं।

याद करें 29 अक्तूबर 2005 की वो शाम, जब मुम्बई की तरह दिल्ली दहली, एक के बाद एक सीरियल ब्लास्ट हुए। ये धमाके सरोजनी नगर, पहाडग़ंज और गोविंदपुरी में हुए, जिसमें 60 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। वह मंजर भुलाए से भी नहीं भूलता, जहां लोग दहशत में थे वहीं दिल्ली पुलिसिंग पर अनेक सवाल उठे थे।

इसी से सबक लेकर जिसके बाद से दिल्ली पुलिस ने अपने इंटेलिजेंस के नेटवर्क को इतना मजबूत किया कि 16 साल बीत जाने के बाद राजधानी में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद़्दीन, लश्करे तैयबा, खालिस्तानी लिबरेल फोर्स और बब्बर खालसा सहित अन्य आतंकी साजिश के प्रयास किए, लेकिन दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और जाबांज जवानों ने इसे विफल किया और सैकड़ों आतंकियों की गिरफ्तारी की।

क्या आप जानते हैं वह लोग जो सुरक्षा के कवच को मजबूत करने के लिए दिन-रात लगे रहते हैं, वह न तो दिखते हैं और न सामने आते हैं। अंडरकवर और सुपरकॉप की तरह बस ड्यूटी निभाते हैं। मौजूदा समय में दिल्ली पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव का नाम भी टॉप सुपरकॉप की गिनती में आता है। आखिरकार ये लोग आतंकियों के नेटवर्क को कैसे तोड़ते हैं और उनकी हर साजिश को नाकाम करते हुए दिल्ली को कैसे मजफूज रखते हैं। इन सब बातों को सामने रख रही है संजीव यादव की यह रिपोर्ट :

नाम से ही कांपते हैं आतंकी
इनका नाम दिल्ली में ही नहीं बल्कि देश के सुपरकॉप अफसरों की सूची में शामिल किया जाता है। वे मौजूदा समय में दिल्ली में विशेष सेल के पुलिस उपायुक्त हैं। हाल में बाटला हाउस के नाम से रिलीज हुई फिल्म में जॉन अब्राहम ने इन्हीं का किरदार निभाया है। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह से एक अफसर पर्दे के किरदार में कितना दबंग और कभी इतना मायूस होता है कि वह अपनी जान लेने को तैयार रहता है।

संजीव का नाम दिल्ली के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट की सूची मेंं अव्वल नंबर पर है,यही नहीं, एक बेहतरीन शूटर होने के साथ इनके अंडर में की गई जांच में आतंकियों को शत प्रतिशत सजा भी मिली है। संजीव का नाम आतंकियों को सजा दिलवाने वाले दिल्ली पुलिस के अधिकारियों में सबसे ऊपर आता है। अपने कॅरियर में उन्होंने 2005 और 2008 के दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े कई मामलों पर काम किया है। उन्होंने 2010 में जामा मस्जिद और 2012 में इजरायल के राजनयिकों पर हमले के मामलों पर भी काम किया है। 

गोली चली तो बदमाश होता है ढेर 
एनकाउंटर 56 से ज्यादा: दिल्ली पुलिस के हृदय भूषण के नाम से ही अपराधी कांप जाते हैं। 1990 में उन्होंने पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर शुरुआत की थी। अभी वह स्पेशल सेल में बतौर एसीपी हैं। उन्होंने 30 अपराधियों को ढेर किया। 26 अक्तूबर वर्ष 2013 में कुख्यात अपराधी नीतू दाबोदा और उसके दो साथियों को साउथ दिल्ली स्थित होटल ग्रैंड के पास हुए ऑपरेशन में 25 अफसरों ने करीब 40 राउंड गोलियां बरसाकर नीतू दाबोदा और उसके साथी आलोक गुप्ता और दीपक को मार गिराया। वर्ष 2006 गुडग़ांव स्थित 50 हजार के ईनामी बदमाश हेमंत उर्फ सोनू और उसके साथी को मुठभेड़ के बाद ढेर किया। वहीं, कुख्यात बदमाश यासीन और बेनामी को वर्ष 2004 में कनॉट प्लेस स्थित दो घंटे की मुठभेड़ के बाद मार गिराया। 

गैंगस्टरों के लिए हैं काल
राजेन्द्र सिंह पहलवान दिल्ली पुलिस में सिपाही पद पर भर्ती हुए थे। लेकिन उनकी एनकाउंटर की कार्यशैली के कारण वह प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बन गए। 30 साल में उन्हें चार प्रमोशन मिला। उन्हें 100 से अधिक गैंगस्टरों को पकडऩे का भी रिकॉर्ड है। नामी बदमाश सुलेमान को भी महरौली इलाके में मुठभेड़ के दौरान उन्होंने मारा था। हाल के दिनों में भले ही इन्हें साइड पोस्टिंग दी गई हो लेकिन जब भी गैंगस्टरों के नेटवर्क की बात सामने आती है तो अक्सर इनकी मदद ली जाती है। 

नेटवर्क जबर्दस्त
इनके द्वारा हाल में 3 आतंकियों को उस समय पकड़ा गया जब वे दिल्ली को दहलाने की साजिश कर उसे अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे। अब तक 7 आतंकियों को पकडऩे और 12 एनकाउंटर इनके नाम पर है। इनका इंटेलिजेंस बेहतर है और जम्मू कश्मीर में इनका नेटवर्क बेहद जबर्दस्त है। 

निशाना अचूक
इन्होंने अनेक बार आतंकियों की साजिश को फेल किया है। यही नहीं, कई बड़े एनकाउंटर में नाम सामने नहीं आया, लेकिन जब भी आतंकी एनकाउंटर या मुठभेड़ की बात सामने आती है तो राजेश शर्मा को जरूर शामिल किया जाता है। 

सिमी में मजबूत नेटवर्क7
इंटेलिजेंस व फोन लिसनिंग सुनने में माहिर, यही नहीं पासवर्ड सहित कोड को डीकोड करने में महारत हासिल। स्लीपर सेल सहित सिमी में बेहद मजबूत नेटवर्क।  इंस्पेक्टर शिव कुमार की टीम में शामिल रहते हुए इन्होंने अब तक 41 एनकाउंटर किए। 

आतंकी साजिश की नाकाम
बब्बर खालसा और जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को विफल किया। स्पेशल सेल में इंस्पेक्टर मान सिंह की टीम में शामिल। अब तक 15 से अधिक आतंकी साजिश को किया नाकाम। आतंकी हिजबुर रहमान, लयमंबा खूमन्न, अब्दुल लतीफ, मो. अशरफ जैसे आतंकियों की गिरफ्तारी की।

आतंकियों की हर बिसात फेल
ये वो शख्स हंै जो कभी किसी के सामने नहीं दिखते लेकिन अक्सर सडक़ों और अन्य राज्यों की खाक छानते हैं। विपिन भले ही हेड कांस्टेबल हैं, लेकिन इनकी कार्यशैली को देखकर कई अधिकारी इन्हें सम्मान देते हैं। इनके नेटवर्क के आगे आतंकियों की हर बिसात फेल होती है। 

इंटेलिजेंस नेटवर्क बेहद मजबूत तो वहीं निशाना भी अचूक
नाम की तरह काम भी, फोर्स के लिए चकमता सितारा, लेकिन अक्सर भीड़ में गुम हो जाना जुुगून की खासियत है। इंटेलिजेंस नेटवर्क बेहद मजबूत तो वहीं निशाना भी अचूक। इसी के चलते अब तक कई अधिकारियों की टीम में शामिल रहते हंै और अब तक 40 से अधिक एनकाउंटर में सबसे आगे की लाइन में खड़े दिखते हैं। कई बार इनका सामना आमने-सामने भी हुआ है, जिसमें ये घायल भी हुए, उसके बाद भी राजधानी को बचाने का जज्बा इनमें हैं। जैश-ए-मोहम्मद, बब्बर खालसा, लश्कर ए तैयबा, आईएसआईएस सहित स्लीपर सेल के सिमी संगठन से जुड़े लोग इनके निशाने पर रहते हैं।

पांच पाकिस्तानी का भी कर चुके हैं एनकाउंटर
दिल्ली पुलिस में विनय त्यागी वर्ष 1986 में बतौर सिपाही भर्ती हुए थे। इसके बाद वर्ष 1993 में आयोजित सब इंस्पेक्टर की परीक्षा में वह पास हुए। वर्ष 1995 में उन्होंने सब इंस्पेक्टर की नौकरी शुरू की। सबसे पहला एनकाउंटर उन्होंने वर्ष 2000 में किया, जब बदमाशों ने एक अपहरण के मामले में 5 करोड़ की फिरौती मांगी थी। इसके बाद क्राइम ब्रांच और स्पेशल सेल में रहते हुए उन्होंने कई बदमाशों को यमलोक का रास्ता दिखा दिया। एक ही साथ परिवार के पांच लोगों की हत्या करने वाले गैंग को भी इंस्पेक्टर विनय त्यागी की टीम ने ही गिरफ्तार किया था। 2005 में 3 पाकिस्तानियों का द्वारका इलाके में एनकाउंटर और फिर 2006 में प्रगति मैदान में 2 पाकिस्तानियों का एनकाउंटर किए। गत वर्ष पहले 26 जनवरी से पहले एक स्कूल बस से बच्चे का अपहरण कर सरेआम पुलिस को चुनौती दी गई।

अक्सर खेल जाते हैं जान पर
साल 2004 बैच के सब इंस्पेक्टर नवीन कुमार वर्तमान में द्वारका स्पेशल स्टाफ के प्रभारी हैं। अपने कार्यशैली के कारण ही सब इंस्पेक्टर रहते हुए उन्हें द्वारका जिला स्पेशल स्टाफ का प्रभार मिल गया था। अब तक 15 से अधिक एनकाउंटर कर चुके हैं। इस दौरान 2018 में नारायणा में राजेश भारती गिरोह से हुए मुठभेड़ में टीम का नेतृत्व कर रहे नवीन कुमार गोली लगने से घायल हो गए थे। हाल में ही उन्होंने अपनी टीम के साथ नजफगढ़ में दो ज्वेलर्स पर रंगदारी के लिए गोलियां चलाने वाले बसोडिया गिरोह के दो शूटर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। इसमें बदमाशों द्वारा चलाई गई गोली इनके टीम के एक कांस्टेबल को लगी थी, पर बुलेट प्रूफ जैकेट के कारण उनकी जान बच गई थी। 

इंटेलिजेंस में कोई सानी नहीं, ऑपरेशन ऑलआउट से आतंकियों का सफाया
जब पुलिस विभाग के मुखिया के नाम पर बेहतरीन इंटेलिजेंस का तमगा हो तो जाहिर सी बात है राजधानी महफूज रहेगी। एसएन श्रीवास्तव की गिनती कमिश्नर बनने के पहले से ही सुपरकॉप के रूप में की जाती रही है। उनके इंटेलिजेंस को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सीआरपीएफ के वेस्टर्न रेंज का एडीजी बनाया और जम्मू कश्मीर में आतंकियों की सफाये के लिए इन्हीं के नेतृत्व में ऑपरेशन आलआउट चलाया।

इन्हें जब बतौर घाटी में भेजा गया तो घाटी बेहद मुशिकल के दौर में गुजर रही थी। 2016 में आतंकी बुरहान वानी एक नए कश्मीर का सपना देखते हुए युवाओं को आतंकी बना रहा था और उसे पकडऩा सेना सहित एजेंसियों के लिए टेढ़ी खीर था, तभी बेहतर इंटेलिजेंस के चलते ही कमिश्नर श्रीवास्तव ने जुलाई 2016 में हुए बुरहान वानी का एनकाउंटर  किया। जिसके बाद इन्होंने साल 2017 में घाटी में ऑपरेशन ऑल आउट लॉन्च किया जिसमेंं सेना, सीआरपीएफ, बीएसएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ ही इंटेलिजेंस ब्यूरो भी शामिल था।

इस आपरेशन के तहत 82 आतंकियों को मारा गया साथ ही 271 आतंकियों की गिरफ्तारी की गई। जिसके चलते कश्मीर में आतंकी संगठनों की नींव हिल गई। यही नहीं, 20वीं सदी की शुरुआत में उन्हें दिल्ली पुलिस की एंटी-टेरर सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह स्पेशल कमिश्नर के तौर पर इसके साथ तैनात रहे, उस दौरान इन्होंने आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन की कमर तोड़ दी और उनके सरगना को गिरफ्तार किया।  इसके अलावा आईपीएल की स्पॉट फिक्सिंग के केस की जांच भी उनकी अगुवाई में सफलतापूर्वक अंजाम दी गई थी। उन्होंने अपने कार्यकाल में उनके देश में 17 से अधिक आतंकियों को पकड़ा, साथ ही उनके नेतृत्व में कई आतंकियों के एनकाउंटर किए गए।

आतंकी ही नहीं, ड्रग्स माफिया का भी किया सफाया
डीसीपी प्रमोद सिंह कुशवाहा (डीसीपी स्पेशल सेल), उम्र 52 साल, गत 5  सालों से स्पेशल सेल में आए और आते ही आतंकियों के सफाए के साथ दिल्ली में ड्रग्स नेक्सस केा खत्म करने का श्रेय इन्हें ही जाता है। इनका नेटवर्क दिल्ली से जम्मू तक बेहद मजबूत है और इंटेलिजेंस की तारीफ दिल्ली ही नहीं बल्कि मुम्बई सहित अन्य राज्यों की पुलिस भी करती है।

राजधानी में भी जब मोस्टवांटेड बदमाश या किसी ड्रग पैडलर के नाम की चर्चा हुई तो कुशवाहा ने उसे कभी एनकाउंटर तो कभी उसे सलाखों के पीछे पहुंचाया। अब तक कुशवाहा राजधानी में 7 से अधिक बार आतंकियों की साजिश को नाकाम कर चुके हंै। इनके नेटवर्क के चलते ही दिल्ली पुलिस 2019 में 26 जनवरी पर होने वाले आतंकी हमले को नाकाम कर पाई थी और इन्होंने ही जाफराबाद इलाके से 10 आतंकियों की गिरफ्तारी की थी। बब्बर खालसा, लश्कर ए तैयबा के कई खुखांर आतंकियों को पकड़ा है। 

मेवात गैंग पर पड़े हमेशा भारी
49 एनकाउंटर, 150 मुठभेड़: मेवात गैंग की गिरफ्तारी या कभी भी गैंगस्टर या किसी आतंकी से मुठभेड़ में सामना करना हो तो शिव कुमार का नाम सबसे पहले लिया जाता है। शिव कुमार बने ही स्पेशल सेल के लिए हैं, क्योंकि इनका इंटेलिजेंस नेटवर्क इतना मजबूत है कि जब भी राजधानी में बड़ा अपराध घटित होता है तो बतौर दिल्ली पुलिस मुखिया इन्हें याद करता है।

शिव कुमार जहां बेहद नरम दिल के व्यक्ति हैं, वहीं कार्यशैली बड़ी सख्त है। 2014 में ही जब उनके एक कांस्टेबल शिवराज तोमर को कुख्यात गैंगस्टर फिरोज ने मार दिया था तो दिल्ली से जम्मू तक खाक छानते हुए उसका एनकाउंटर कर ही दम लिया। इनके नाम पर 12 आतंकियों के साथ मुठभेड़ कर उनकी गिरफ्तारी का रिकार्ड भी शामिल है। इनकी कार्यशैली को देखते हुए इन्हें 4 स्पेशल ऑपरेशन करने के लिए श्रेष्ठ पुरस्कार, 6 अतिउत्कृष्ठ पुरस्कार, व पुलिस मेडल मिला है। 

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