Tuesday, Oct 26, 2021
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export import company, sending abroad on fake documents

एक्सपोर्ट इम्पोर्ट कंपनी की आड़ में चलाते थे फर्जी दस्तावेज पर विदेश भेजने का रैकेट

  • Updated on 9/17/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।आईजीआई एयरपोर्ट थाना की पुलिस टीम ने दिल्ली से फर्जी दस्तावेजों पर विदेश भेजने के एक धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यह अंकल रैके के नाम से जाने जाते थे। इस रैकेट के सरगना ने सरायकालेखां इलाके में एक एक्सपोर्ट इम्पोर्ट की फर्जी कंपनी खोल रखी थी, जिसकी आड़ में ये विभिन्न देशों के वीजा लेते थे। वह खुद भी बांग्लादेशी नागरिक होते हुए फर्जी भारतीय पासपोर्ट लेकर यहां राह रहा था। ये भारतीय नागरिकों के साथ ही नेपाल और बांग्लादेशी नागरिकों को भी फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराते थे। इनके कब्जे से पुलिस ने 27 पासपोर्ट (भारतीय-10, नेपाली-02 और बांग्लादेशी-15), कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और वीजा टिकटों सहित विभिन्न देशों के टिकट बरामद की है। 

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान फोजिल रब्बी शिपोन उर्फ ​​सलाम सरदार (22), अख़्तौज़मां तालुकदार (54), रसल @ साहिदुल सेख पुत्र मोहम्मद अब्दुल कलाम, कासेमसेख (35) तीनो बांग्लादेशी नागरिक, विभोर सैनी, विपुल सैनी पुत्र राजकुमार सैनी,  सौरभ घोष, बशीर, मिराज शेख और फहीम खान के तौर पर हुई है। तालुकदार रैकेट का सरगना है।

डीसीपी आईजीआई विक्रम पोरवाल ने बताया कि 11 सितंबर को आईजीआई टर्मिनल 3 पर सीआईएसएफ ने साहिदुलसेख, फोजिल रब्बी शिपॉन, सलाम सरदार और अख्तौजमां तालुकदार को फर्जी दस्तावेज के साथ पकड़ा था। तीनों कतर एयरवेज की उड़ान में दोहा के जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे। तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया गया था। पुलिस मामला दर्ज कर एसपी रमेश कुमार के निरीक्षण व एसएचओ कृष्ण कुमार के नेतृत्व में इंस्पेक्टर अनुज कुमार, एसआई कमल, हवलदार अवनीश और कांस्टेबल बीर सिंह की टीम ने जांच शुरू की। 

पूछताछ रसल और फोजिल ने बताया कि वे दिल्ली में एक एजेंट अख्तौजमां तालुकादर से मिले थे, जिन्होंने उनसे 2.5 लाख लेकर सर्बिया के लिए उनकी यात्रा की व्यवस्था की थी। वहीं बशीर नाम के एजेंट ने भारतीय पासपोर्ट की व्यवस्था की थी। लोगों को भेजने का यह सारा काम बशीर कुली-उर-रहमान, फहीम खान और विभोर सैनी, विपुल सैनी मिलकर करता था।

उनकी निशानदही पर  पुलिस ने पहले सरायकाले खां के एजेंट अख़्तौज़मां तालुकदार के यहां छपेमारी कर उसे पकड़ लिया। उसके यहां से फर्जी  27 पासपोर्ट बरामद हुए। तालुकदार ने यहां इम्पोर्ट एक्सपोर्ट की दो फर्जी कंपनियां खोली हैं। इसकी मदद से उसे विभिन्न देशों के नकली वीजा प्राप्त किया करता था। वहीं पुलिस ने अन्य तीनों को भी दिल्ली, एनसीआर में छपेमारी कर दबोच लिया।

हवाई अड्डे के अंदर ही क्लीयरेंस की थी व्यवस्था

रैकेट के तार नेपाल और बांग्लादेश में फैले हैं। ये वहां के उन व्यक्तियों को टारगेट करते थे जो विदेशों में जाने के इच्छुक होते थे। उन्हें भारतीय पासपोर्ट दिलाने के नाम पे उन्हें पहले मेडिकल वीज़ा पर भारत बुलाते थे। फिर उसके बदले में अपने अन्य सह- एजेंटों की मदद से उनके लिए जाली दस्तावेज़ से भारतीय पासपोर्ट की व्यवस्था करते थे। फिर फर्जी वीजा। बांग्लादेशी नागरिकों के लिए हवाई अड्डे के अंदर पैक्स के बोर्डिंग और इमिग्रेशन क्लीयरेंस की व्यवस्था करने में विभोर सैनी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इससे पहले उन्होंने सेलेबी में टी-3 में ग्राउंड हैंडलिंग स्टाफ के रूप में काम किया था। 

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