Tuesday, May 21, 2019

देश में चल रही बलात्कारों की आंधी से राहत दिला सकती हैं फास्ट ट्रैक अदालतें

  • Updated on 5/15/2019

सरकार द्वारा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में कमी आने के दावों के बावजूद ये लगातार जारी हैं। अपराधी इस कदर इंसानियत से गिर चुके हैं कि अब तो दूध पीती बच्चियां भी बड़ी संख्या में इनका शिकार हो रही हैं। स्थिति कितनी चिंतनीय हो चुकी है यह मात्र 2 सप्ताह की निम्र घटनाओं से स्पष्ट है :

मई को राजस्थान के अलवर में एक दलित युवती के साथ सामूहिक बलात्कार को लेकर दलित समुदाय में भारी रोष व्याप्त है तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट बना कर अपराधियों को कठोरतम दंड देने की मांग की जा रही है।

5 मई को उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले के एक गांव में जमानत पर आए बलात्कार के आरोपी ने एक नाबालिगा की इज्जत लूट ली।

5 मई को नागपुर में पड़ोसी ने 4 वर्षीय बच्ची से बलात्कार कर डाला।

7 मई को राजस्थान के कठुमर स्थित सरकारी अस्पताल के लेबर रूम में एक महिला से सामूहिक बलात्कार किया गया।

7 मई को राजस्थान के ही फतेहपुर में रंग-रोगन करने वाले 2 मजदूरों तथा एक अन्य आरोपी ने मिल कर एक महिला से गैंग रेप किया।

8 मई को कश्मीर में सुम्भल के मलिकपुरा में एक युवक द्वारा 3 वर्षीय मासूम से बलात्कार को लेकर कश्मीर घाटी में अभियुक्त को फांसी की सजा देने की मांग को लेकर जगह-जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में 50 जवानों सहित 100 से अधिक लोग घायल हो गए।

9 मई को गुरुग्राम के एक गांव में एक 21 वर्षीय मजदूर को पांच वर्षीय बच्ची से अश्लील छेड़छाड़ करने के आरोप में पकड़ा गया।

13 मई को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश के हापुड़ में पुलिस की लापरवाही के कारण एक युवती को 10,000 रुपए में बेचने और उससे गैंग रेप के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।

13 मई को पंचकूला के सैक्टर-14 में कंजक पूजन के बहाने ले जाकर 5 साल की मासूम बच्ची की बलात्कार के बाद निर्मम हत्या कर दी गई।

13 मई को नाभा के चौधरी माजरा पुली में एक 17 वर्षीय नाबालिग को बेहोश करने के बाद एक वैद्य ने उससे बलात्कार कर डाला।

14  मई को मुम्बई के एक अस्पताल में एक व्यक्ति ने मदद करने के बहाने एक 37 वर्षीय महिला से बलात्कार कर डाला।

प्रतिदिन बड़ी संख्या में सामने आ रही बलात्कार की घटनाओं ने देश के अधिकांश भागों में नारी जाति की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्र खड़े कर दिए हैं। अत: यदि फास्ट ट्रैक अदालतें बनाकर तेजी से बलात्कार के मामलों का निपटारा करके अपराधियों को कठोरतम सजा दी जाने लगे तो महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में कुछ कमी अवश्य आ सकती है। —विजय कुमार 

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