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forensic dentistry was used for investigation in nirbhaya case

निर्भया केस में पहली बार इस तकनीक का हुआ इस्तेमाल, ऐसे की गई थी दोषियों की पहचान

  • Updated on 3/22/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। निर्भया के गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में चश्मदीद गवाह अवनिंद्र की गवाही, पुलिस के द्वारा जुटाए गए सबूतों के साथ ही इस केस में दोषियों के गुनाह को साबित करने के लिए पहली बार एक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक का नाम है फोरेंसिक डेंटेस्ट्री जो न सिर्फ दोषियों की पहचान करवाने में मील का पत्थर साबित हुई बल्कि जिसने निर्भया के दोषियों को उनके अंजाम तक भी पहुंचाया। फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. असित आचार्य ने निर्भया केस में इस तकनीक का पहली बार इस्तेमाल कर पुलिस की मदद की।

निर्भया के शरीर पर थे दांत से कांटने के निशान
निर्भया के दोषियों ने उसके शरीर पर कई जगह दांतों से बुरी तरह से काट दिया था। इस तकनीक के जरिए सभी दोषियों की पहचान सुनिश्चित हो सकी थी। कभी भी दो व्यक्तियों के दांतों की बनावट और शरीर पर काटे गए निशान एक जैसे नहीं होते। ऐसे मामलों में इसे सबसे पुख्ता सबूत माना जाता है। दांतों के काटने के निशानों की पहचान करने के लिए ये तकनीक बेहद कारगर है।

डॉक्टर ने दी ये सलाह
पुलिस ने फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. असित आचार्य की सलाह के बाद निर्भया के शरीर पर मौजूद दांतों के निशान की फोटो व आरोपियों के दांतों के निशान लेकर उनको दे दिए थे। दोषियों के दांतों की बनावट जांचने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस से दांतों का जबड़ा बनवाया गया। डॉ. आचार्य ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि चार में से दो आरोपी विनय और अक्षय के दांतों के निशान निर्भया के शरीर पर मिले निशानों से मेल खा रहे थे।

इन तकनीक ने भी की मदद
फोरेंसिक डेंटेस्ट्री के अलावा जुटाए गए अन्य साक्ष्यों जिनमें निर्भया के नाखूनों के अंदर से लिए गए दोषियों के त्वचा के नमूने और डीएनए जांच ने भी दोषियों को फांसी की तख्ते तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इसके अलावा बाल और लार से भी डीएनए लिया गया। इन तमाम अकाट्य तथ्यों व सबूतों ने निर्भया के गुनाहगारों के ताबूत में कील ठोकने का  काम किया।

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