Thursday, Jun 01, 2023
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former jnu student shehla rashid will be prosecuted for tweeting against the army

JNU की पूर्व छात्रा शेहला रशीद पर चलेगा मुकदमा, सेना के खिलाफ किया था ट्वीट

  • Updated on 1/10/2023

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने भारतीय सेना को लेकर कथित विवादित ट्वीट करने के मामले में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व नेता शेहला राशिद शोरा के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, यह अनुमति शोरा के खिलाफ 2019 में दर्ज एक प्राथमिकी से संबंधित है।

वकील अलख आलोक श्रीवास्तव की शिकायत पर नई दिल्ली में विशेष प्रकोष्ठ थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए के तहत शोरा के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि मुकदमे की मंजूरी दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 की धारा 196 के तहत दी गई है, जो राज्य के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाने और ऐसे अपराध करने के लिए आपराधिक साजिश से संबंधित है।

उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा, ‘‘सीआरपीसी की धारा 196 1(ए) कहती है कि केंद्र या राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना आईपीसी की धारा 153ए या अध्याय छह के तहत किसी भी दंडनीय अपराध का कोई भी अदालत संज्ञान नहीं लेगी...। अधिकारियों ने कहा कि जेएनयूएसयू की पूर्व नेता पर अपने ट्वीट के माध्यम से विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने और सौहार्द बिगाड़ने वाले कार्यों में शामिल होने का आरोप है।

 

उपराज्यपाल के कार्यालय ने कहा कि अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव दिल्ली पुलिस द्वारा पेश किया गया था और यह दिल्ली सरकार के गृह विभाग द्वारा समर्थित था। शोरा के 18 अगस्त, 2019 के ट्वीट में सेना पर कश्मीर में घरों में घुसकर स्थानीय लोगों को ‘‘प्रताड़ित'' करने का आरोप लगाया गया था।

हालांकि सेना ने इन आरोपों को आधारहीन बताते हुए इन्हें खारिज कर दिया था। मुकदमे की मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय द्वारा समर्थित और दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव में कहा गया था कि 18 अगस्त, 2019 को शोरा ने ट्वीट किया था कि ‘‘सशस्त्र बल घरों में घुस रहे हैं, लड़कों को उठा रहे हैं, घरों में तोड़फोड़ कर रहे हैं, जानबूझकर फर्श पर राशन गिरा रहे हैं, चावल में तेल मिला रहे हैं, आदि।'

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘‘शोपियां में चार व्यक्तियों को सेना के शिविर में बुलाया गया और ‘‘पूछताछ' (प्रताड़ित) की गई। उनके पास एक माइक रखा गया था ताकि पूरा इलाका उनकी चीखें सुन सके और आतंकित हो सके. इससे पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया।'

 गृह विभाग ने पाया था कि ‘मामले की प्रकृति, स्थान जिसके बारे में ट्वीट का उल्लेख है और सेना के खिलाफ झूठे आरोप लगाना, इसे एक गंभीर मुद्दा बनाता है'। प्रस्ताव में कहा गया है, ‘जम्मू-कश्मीर में धार्मिक विभेद पैदा करने के लिए शोरा के ट्वीट के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत थी और आईपीसी की धारा 153ए के तहत मुकदमा चलाने के लिए मामला बनाया गया था।' 

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