Tuesday, Jul 05, 2022
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fourth anniversary today: aarushi-hemraj murder case is the country''''''''s biggest murder mystery

चौदवीं बरसी आज: देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरूषि-हेमराज हत्याकांड अब भी है उलझी

  • Updated on 5/17/2022

नई दिल्ली, टीम डिजीटल/ दिनेश शर्मा/  देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री नोएडा का आरूषि-हेमराज हत्याकांड की चौदवीं बरसी है। वक्त के साथ आरूषि-हेमराज कांड को जयवायु विहार सेक्टर-25 के लोग भूल गए। एल-32 फ्लैट संख्या जहां आरूषि का कत्ल हुआ और नौकर हेमराज की लाश फ्लैट के उपर छत पर मिली थी। अब एल ब्लॉक में रहने वालों को इसके बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं। शहर के लोगों में इस कांड के अतीत को लेकर धूल जम गई है। आरूषि की याद में एल ब्लॉक से लेकर राजकीय डिग्री कालेज में लगाए गए पौधे भी सूख कर अतीत में समा गए है लेकिन इस कांड को आज भी एक ही सवाल है आखिरी आरूषि-हेमराज का कातिल कौन है। इस पूरे कांड के दायरे में मारे गए नौकर के दोस्त और आरूषि के मां-बाप राजेश तलवार और नूपूर तलवार थे। सीबीआई ने नौकरों को गिरफ्तार किया लेकिन कोर्ट ने सबूूतों के आभाव में बरी कर दिया। नोएडा पुलिस की थ्योरी पर काम करते हुए फिर दुबारा सीबीआई ने आरूषि के मां-बाप को गिरफ्तार कर कत्ल में प्रयोग गोल्फ स्टिक बरामद की लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें भी बरी कर दिया। ऐसे में जब शक के दायरे में आए नौकर के दोस्त और आरूषि के मां-बाप दोनों ही निर्दोष है तो कातिल कौन था। 

उस रात की सुबह नहीं
नोएडा के प्रसिद्व डेंटल दंपति डाक्टर राजेश तलवार और नूपूर तलवार सेक्टर-25 के एल-32 में अपनी बेटी आरूषि के साथ रहते थे। उनका नौकर हेमराज था। 16 मई की सुबह आरूषि का शव उसके कमरे में मिला था। नौकर हेमराज गायब था। पुलिस ने नौकर हेमराज के लापता होने पर उस पर ही हत्या कर फरार होने का शक जाहिर करते हुए उसकी तलाश में एक नेपाल के लिए एक टीम रवाना कर दी थी लेकिन 17 मई की सुबह नोएडा से रिटायर्ड हुए डिप्टी एसपी केके गौतम ने संवेदना वक्त करने के लिए पहुंचे और नाटकीय ढंग से फ्लैट के उपर छत की तरफ जाने की लिए बढ़े और सीढिय़ों पर खून के दाग देख कर छत पर लगे गेट के ताले को खुलवाया और जब वहां पुलिस वह छत पर पहुंचे तो कूलर की खिडक़ी से ढके हेमराज के रक्त रंजित शव को देखा था। जिसके बाद आरूषि-हेमराज हत्याकांड देश की मर्डर मिस्ट्री बन गए क्योंकि जब आरिूष की हत्या हुई तो अगले दिन यानि सोलह मई की सुबह नौकरी काम करने पहुंची तो मालकिन नूपूर ने खिडक़ी से दरवाजे की चाभी की दी यानि की दरवाजा अंदर से ही बंद था। कातिल दरवाजा बंद करके नहीं गया। यही चाभी अंदर होना ही मां-बाप के लिए कातिल साबित हो गई थी। वहीं हेमराज के तीन दोस्तों को गिरफ्तार करने वाली सीबीआई की थ्यौरी अदालत में पहुंचने के बाद एक एक कर धराशाही हो गई थी। मर्डर मिस्ट्री की विवेचना टीम की अगुवाई करने वाले सीबीआई की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए थे।

मां-बाप गिरफ्तार फिर साबित हुए निर्दोष अब सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई
26 नवम्बर 2013 को विशेष सीबीआई अदालत ने आरुषि.हेमराज के दोहरे हत्याकाण्ड में राजेश एवं नूपुर तलवार को आईपीसी की धारा 302 व 34 के तहत उम्रक़ैद की सजा सुनाई। दोनों को धारा 201 के अन्तर्गत 5.5 साल और धारा 203 के अन्तर्गत केवल राजेश तलवार को एक साल की सजा सुनायी। इसके अतिरिक्त कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों पर जुर्माना भी लगाया। इस फैसले के खिलाफ  वे दोनों उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं। 12 अक्टूबर 2017 को इलाहाबाद हाइकोर्ट द्वारा आरुषि के माता-पिता को निर्दोष करार दे दिया गया और वे जेल से रिहा हो गये। उनके रिहा होने के सात माह बाद सीबीआई ने किरकिरी होने पर उनके रिहा होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2018 को सुनवाई के लिए स्वीकृत कर ली लेकिन इसके बाद न तो सीबीआई ने इस याचिका को लेकर दिलचस्पी दिखाई और न ही मां-बाप इस पर कुछ अगला कदम बढ़ाने के लिए आगे आते दिखाई दिए।

कातिल कौन न मां-बाप में जानने की उत्सुकता न सीबीआई को अब दिलचस्पी
आरूषि -हेमराज का कातिल कौन है। इसको लेकर अब न तो बेटी के कत्ल के आरोप में बरी हुए मां-बाप में अब जानने की उत्सुकता है और न ही उनके बरी होने पर सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ दुबारा याचिका दायर करने वाली सीबीआई को इसके रहस्य को सुलझाने में कोई दिलचस्पी है। बेटी के कत्ल के आरोप में बरी हुए मां-बाप नोएडा का एल-32 फ्लैट बेच कर दिल्ली में रह रहे है और अपनी डेंटल क्लीनिक चला रहे है। गिरफ्तार होकर फिर बरी हुए नौकरों में से एक नेपाल में है और दो दिल्ली में नौकरी कर  रहे है।  चौदह साल बीतने के बाद भी आज भी मर्डर मिस्ट्री बरकरार है। दो फिल्मे भी बन गई ओर रिलीज पर हुई इस केस को लेकर वह भी देश के लोगों को कातिल कौन है इसको एक राय बनाने में सफल नहीं हो सकी।  

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