Thursday, Aug 18, 2022
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सरकारी भूमि को बंजर दर्शाकर बेचा, 22 साल बाद कार्रवाई, 2 आरोपियों पर एफआईआर

  • Updated on 6/26/2022

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। सरकारी भूमि की खरीद-फरोख्त का अनोखा मामला सामने आया है। भूमि को बंजर दर्शाकर बैनामा कर दिया गया। यह खेल साढ़े 22 साल पहले खेला गया था। लेखपाल की शिकायत पर अब जाकर पुलिस ने इस प्रकरण में एफआईआर दर्ज की है। नामजद आरोपियों की सरगर्मी से तलाश चल रही है। 

गाजियाबाद जनपद में भू-माफिया की हमेशा बल्ले-बल्ले रही है। भू-माफिया ने सरकारी भूमि तक को बेचने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। ताजा मामला सिहानी गेट थाना क्षेत्र के रसूलपुर सिकरोड़ा गांव का है। गांव की भूमि के संबंध में अपर उप-जिलाधिकारी की कोर्ट में वाद योजित कराया गया था। 

याजित वाद में पारित आदेश के क्रम में लेखपाल नवीन कुमार त्यागी ने खतौनी का परीक्षण किया। लेखपाल सदरपुर एवं ग्राम सभा सचिव रसूलपुर सिकरोड़ा नवीन त्यागी का कहना है कि जांच में खसरा नंबर-60 का बंजर होना पाया गया। नवम्बर 1999 में इस खसरा नंबर का बैनामा हो गया था। 

बैनामे से जुड़े अभिलेखों की जांच में अनेक विसंगतियां पकड़ी गईं। रसूलपुर सिकरोड़ का विलेख संख्या 5386 नवंबर 1999 पर रजिस्ट्रीकृत है। इसके खसरा संख्या 60 रकबा 0.3160 हेक्टेयर को अशोक संयुक्त सहकारी खेती समिति लि. के अध्यक्ष गोल्डी गुप्ता निवासी सफदरजंग एंक्लेव नई दिल्ली ने बेच दिया था। 

यह भूमि पवन कुमार निवासी नेहरू नगर द्वितीय गाजियाबाद ने खरीदी थी। यह खसरा बंजर में दर्ज है। लेखपाल का कहना है कि गोल्डी गुप्ता व पवन कुमार ने सरकारी भूमि का अवैध तरीके से बैनामा कर मोटी रकम अर्जित कर ली। तहसीलदार (सदर) ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। 

तदुपरांत पुलिस से शिकायत की गई। उधर, थाना प्रभारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी का कहना है कि आरोपी गोल्डी गुप्ता और पवन कुमार के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

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