Wednesday, Jan 19, 2022
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hc strict on post-poll violence in bengal, orders cbi inquiry musrnt

प. बंगाल में चुनाव बाद हिंसा पर HC सख्त, दिया CBI जांच का आदेश

  • Updated on 8/19/2021

नई दिल्ली / टीम डिजिटल। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद कथित हिंसा के मामले में हत्या एवं बलात्कार जैसे गंभीर मामलों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने का बृहस्पतिवार को आदेश दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिन्दल की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय पीठ ने चुनाव के बाद कथित हिंसा के संबंध में अन्य आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का भी आदेश दिया। पीठ ने कहा कि दोनों जांच अदालत की निगरानी में की जाएंगी।

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उसने केंद्रीय एजेंसी से आगामी छह सप्ताह में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा। एसआईटी में महानिदेशक (दूरसंचार) सुमन बाला साहू, कोलकाता पुलिस आयुक्त सौमेन मित्रा और रणवीर कुमार जैसे आईपीएस अधिकारी होंगे।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी की ओर से विरोधियों के सामाजिक बहिष्कार किए जाने के मुद्दे भाजपा नेता निर्मला सीतारमण तथा सांसद स्वप्नदास गुप्ता भी उठा चुके हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर बनी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ कई सख्त टिप्पणियां की हैं।

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महिसाणा गांव में बांटी गई बहिष्कार की पर्ची में बंगाली में लिखा गया है कि पार्टी की अनुमति के बिना इन लोगों को कोई भी सामान नहीं बेचा जाएगा। चाय विक्रेताओं को इन्हें दुकान पर चाय न देने को कहा गया। यही नहीं, निर्देश नहीं मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी भी दी गई। पश्चिमी मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार कहते हैं, ‘शिकायत की विधिवत जांच कराई गई है। लोगों में भरोसा पैदा करने के लिए पुलिस की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों से इस तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को कहा गया है तथा अब स्थिति सामान्य है।’

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बहिष्कार की धमकी देने के मामले में गिरफ्तार चारों व्यक्तियों के बारे में टीएमसी के ब्लॉक अध्यक्ष उत्तम चंद तिवारी कहते हैं कि वे पार्टी के समर्थक हो सकते हैं लेकिन वे पार्टी के कार्यकर्ता नहीं हैं। इस विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए उन्होंने कोई काम नहीं किया था। हमें जैसे इस बारे में पता चला हमने खुद पुलिस को कार्रवाई करने को कहा था।

दुलाल चक्रवर्ती खुद कहते हैं कि उन्होंने स्वयं बहिष्कार संबंधी पर्चे को नहीं देखा था। लेकिन टीएमसी के कुछ लोगों ने चेतावनी देने के कुछ दिन बाद उनके भतीजे सुरजीत की पिटाई कर दी थी। जब हमने केशपुर पुलिस थाने में संपर्क किया तो पुलिस ने हमसे ठीक से बात किया। वे कहते हैं कि महीने भर हमें सोशल बहिष्कार का सामना करना पड़ा। अब स्थिति सामान्य है। लेकिन हम इस तरह का माहौल और नहीं बर्दाश्त कर सकते हैं इसलिए हमने खुद और हमारे बेटे ने भाजपा को छोड़ने का फैसला ले लिया। 

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