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Himachal mining mafia held bridge over Yamuna river and taken hostage sohsnt

हिमाचल के खनन माफिया ने यमुना नदी पर पुल बांधकर बनाया बंधक

  • Updated on 5/29/2020

देहरादून/ दीपक फरस्वाण। हिमाचल के खनन करने वालों ने उत्तराखण्ड और हिमाचल की सीमा पर यमुना नदी को बंधक बना लिया है। दोनों राज्यों के पुलिस-प्रशासन, खनन और वन विभाग के अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं। खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि उसके दर्जनों कारिंदों ने शुक्रवार को उत्तराखण्ड वन विभाग की तिमली की रेंजर पूजा रावल को लाठी डण्डों के साथ घेर लिया।
 

वन क्षेत्र  में अवैध खनन करने वालों को रोकने पहुंची महिला रेंजर
रेंजर उत्तराखण्ड के वन क्षेत्र में अवैध खनन करने वालों को रोकने पहुंच गई थीं। महिला रेंजर ने आसपास के ग्रामीणों से मदद मांगी। कोई नहीं आया। यह जानकारी उत्तराखण्ड के पूर्व वन मंत्री नवप्रभात को मिली, तो उन्होंने विकासनगर के सीओ भूपेन्द्र सिंह धोनी को फोन करके मौके पर जाने को कहा। तब पुलिस थाने से हिली।


पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स संवाददाता को लगी मामले की भनक
उत्तराखण्ड पुलिस के पहुंचने के पहले हिमाचल के खनन माफिया ने अपने पक्ष में डीएफओ पांवटा, एसडीएम और थाना प्रभारी को मौके पर बुला लिया। सवाल यह है कि उत्तराखण्ड पुलिस मौके पर जा रही है यह जानकारी वहां तक कैसे पहुंची। मामले की भनक पंजाब केसरी/नवोदय टाइम्स संवाददाता को लगी। उसने उत्तराखण्ड वन विभाग के मुखिया प्रमुख वन संरक्षक जयराज से सम्पर्क साधा। जयराज के मुताबिक, उनको इस मामले की जानकारी नहीं थी।


बड़े-बड़े ह्यूम पाइप डालकर बनाया पुल
उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को मौके पर जाकर महिला रेंजर की मदद को कहा। इसके बावजूद वन विभाग का कोई भी अधिकारी वहां नहीं गया। अभी तक की गई तहकीकात के बाद यह बात सामने आई है कि हिमाचल में एक भाजपा नेता के कृपा पात्रों ने खनन पट्टा ले रखा है। उत्तराखण्ड के खनन विभाग के अधिकारियों से उसकी अच्छी बनती है। पन्द्रह दिन पहले यमुना नदी पर बड़े-बड़े ह्यूम पाइप डालकर पुल बना डाला। इस पर पोकलैंड, जेसीबी और टैक्ट्रर चलाकर खनन शुरू हो गया। उत्तराखण्ड के पुलिस प्रशासन के अधिकारी आंख मूंदे देखते रहे।


मौके पर नहीं गए उत्तराखण्ड के अधिकारी
जब रेंजर को यह जानकारी मिली कि उत्तराखण्ड के वन क्षेत्र में खनन हो रहा है, तो वह मौके पर पहुंच गईं। हिमाचल के अधिकारी तो कागजात लेकर उत्तराखण्ड के वन क्षेत्र पर अपना दावा करने लगे। पूरी घटना के दौरान उत्तराखण्ड के अधिकारी मौके पर नहीं गए। उत्तराखण्ड के तीन राजनेताओं के गुर्गों का भी इनमें नाम आ रहा है, जिनमें दो नेता भाजपा और एक कांग्रेस से हैं। एक ओर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तहत गंगा और यमुना पर किसी भी प्रकार निर्माण पर रोक है। ऐसे में कोई पुल बनाकर खनन करे। दोनों सरकारें और अधिकारी चुपचाप बैठे रहें यह केन्द्रीय जल नीति, पर्यावरण और खनन नीति को भी खुली चुनौती है।

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