Wednesday, Nov 30, 2022
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how will aftab reach the gallows? neither weapon nor body found

कैसे फांसी के फंदे तक पहुंचेगा आफताब! न मिले हथियार, न ही लाश

  • Updated on 11/19/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। श्रद्धा मर्डर केस में आफताब ने भले ही सीरीजों को देखकर लाश और वैपन को ठिकाने लगा दिया,लेकिन उसके बाद भी वह फांसी के फंदे से बचने से चूक नहीं सकता। दिल्ली पुलिस और उनके एक्सपर्टो ने प्रारंभिक जांच से ऐसी पृष्ठभूमि तैयार कर दी है,जिसके जरिए अगर वैपन और सिर न मिले, उसके बाद भी उसे कोर्ट में हत्यारा साबित किया जा सके।

दिल्ली पुलिस अभी भी परिस्थिति साक्ष्य और मिले सबूत,गवाह और आफताब के कबूलनामे की कडिय़ों को जोड़ रही है ताकि केस में अंत में किसी भी तरह के संदेह की गुंजाईश न बचे। इसी संबंध में दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा इस केस से जुड़े सभी अपडेट्स लिए और बैठक में अधिकारियों को दिशा दिखाई। पुलिस की रिपोर्ट और मौजूदा सबूत के तहत दिल्ली पुलिस के पास सबूत और गवाह की लंंबी लिस्ट है,जिसके जरिए वे आफताब को फांसी के फंदे तक पहुंचाएगी। 

हत्या में परिस्थिति, गवाह और फॉरेंसिक की होती है अहम भूमिका
हत्या जैसे संगीन केस में 80 फीसदी केसों में गवाह नहीं होते हैं, कई केसों में बॉडी और मोटिव भी आसानी से नहीं मिलते हैं,लेकिन उसके बाद भी कोर्ट सजा देती है। क्योंकि हत्या के केस में ट्रायल के दौरान सर्वप्रथम दो बातें देखी जाती हैं। केस में चश्मदीद गवाह है कि नहीं,दूसरा गवाह नहीं है तो उसके खिलाफ परिस्थितिजन्य सबूत  कितने हैं,साथ ही फोरेसिंक रिपोर्ट क्या हैं। जिसके आधार पर सजा दी जाती है। चर्चित जेसिका लाल कांड,नैना साहनी, और शीना वोरा हत्या,निठारी कांड जैसे प्रकरण में कोर्ट ने परिस्थितिजन्य  सबूत, गवाह के बयानों पर सजा सुनाई है। 

पुलिस को जिनकी है तलाश

- हथियार, सिर व रीढ़ की हड्डी व बाल ठ्ठ मोबाइल फोन 
- वारदात के दिन आफताब और श्रद्वा के कपड़े और चश्मदीद गवाह 
- किसी ने सुना या देखा या फिर उसको किसी ने बताया 

दिल्ली पुलिस सबूत,गवाह और आफताब के कबूलनामे की कडिय़ों को जोड़ रही है ताकि केस के अंत में किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न बचे।

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