Sunday, Jan 23, 2022
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पति खुद को बेराजगार बता पत्नी व बच्चे को नही दे रहा था गुजारभत्ता

  • Updated on 1/14/2022

पति खुद को बेराजगार बता पत्नी व बच्चे को नही दे रहा था गुजारभत्ता
बैंक स्टेटमेंट देख अदालत ने तय की रकम

 

नई दिल्ली, 14 जनवरी (नवोदय टाइम्स): साकेत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत ने पारिवारिक विवाद के एक मामले में अदालत ने पति के बैंक खाते में हर महीने आ रही रकम के आधार पर उसकी पत्नी और बच्चे की गुजारा भत्ता रकम तय की है।

दरअसल, पति अदालत में लगातार कह रहा था कि वह बेरोजगार है और पत्नी और साढ़े तीन साल के अपने बच्चे को गुजारा भत्ता देने में असमर्थ है। पति ने  इस आशय का हलफनामा भी अदालत में दर्ज करवाया है जिसमें उसने कहा कि वह एक दुर्घटना का शिकार हो गया था जिसके बाद वह कोई भी काम करने में असमर्थ है व अपना खुद का गुजर-बसर भी नहीं कर पा रहा है।  

अदालत ने सच्चाई का पता लगाने के लिए पति की बैंक स्टेटमेंट तलब की, जिससे पता चला कि हर माह उसके खाते में अच्छी-खासी रकम आती है। इसी के आधार पर अदालत ने पत्नी और बच्चे की गुजारा भत्ता रकम तय कर दी।

अदालत ने कहा कि शख्स के बैंक खाते में लंबे समय से हर महीने रकम तय समय पर आ रही है और यह कभी कम ज्यादा नहीं हुई है। इससे साफ  होता है शख्स के पास कमाई का स्रोत है।

शख्स पत्नी और अपने बच्चे को गुजारा भत्ता देने से इंकार नहीं कर सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने निर्धारित नियम के हिसाब से ही उसकी पत्नी और बच्चे का गुजाराभत्ता रकम तय की है। उसके साथ किसी तरह का अन्याय नहीं हुआ है।

दरअसल इस व्यक्ति का कहना था कि वह कुछ नहीं कमाता और मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने तथ्यों पर गौर किए बगैर 12 हजार रुपये गुजारा भत्ता रकम पत्नी व बच्चे को देने के निर्देश दिए हैं।
 

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