Tuesday, Nov 30, 2021
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illegal factory for making steroids and injections of foreign labels busted, three arrested

स्टेरायड और इंजेक्शन बनाने की अवैध फैक्टरी का भांडाफोड़, तीन गिरफ्तार

  • Updated on 11/22/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजीटल। अगर आप जिम जा रहे है और उसके साथ बॉडी बनाने के लिए सप्लीमेंट के नाम पर प्रोटीन पाउडर खासकर विदेशी प्रोटीन पाउडर खरीद करे है या फिर स्टेरायड तो जरा सावधान हो जाए। ग्रेटर नोएडा के बादलपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव बिश्नूली में बॉडी बिल्डिग में प्रयोग की जाने वाली विदेशी लेबल की स्टेरायड औषधियों के इंजेक्शन बनाने वाली अवैध फैक्टरी का भांडाफोड़ हुआ है।

पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर कच्चा माल, औषधि बनाने वाले उपकरण आदि पुलिस ने बरामद किए हैं। तीनों आरोपितों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। जबकि एक फैक्टरी का मुख्य संचालक अब भी पुलिस की पकड़ से दूर है।

सेंट्रल नोएडा के एडिशनल डीसीपी इलामारन ने अवैध फैक्टरी संचालन के खुलासे की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य आरोपी अनुज कुमार निवासी गांव बबुरी वाराणसी ने चेन्नई वी रिनोल्ड विश्वविद्यालय से बीटेक के बाद बायोटेक की पढ़ाई की। उसके बाद 2013-14 में नोएडा बायोटेक कंपनी व हैदराबाद, गोवा और मुंबई में एक लाख रुपये के मासिक वेतन पर नौकरी। उस दौरान उसकी मुलाकात रेवाड़ी हरियाणा के कुछ नकली दवा तैयार करने वाले अपराधियों से हुई। जिनके कहने पर उसने बादलपुर कोतवाली क्षेत्र के बिश्नूली के चार भूमि गोल्ड ऐविन्यू में प्लाट खरीदा। जहां मकान बनाकर साले प्रीतम उर्फ गोलू चंदौली, बच्चन कुमार बुलंदशहर के साथ मिलकर अवैध रूप से फैक्ट्री का संचालन करने लगा।

पुलिस जांच में पता चला है कि अनुज को कच्चा माल फरार आरोपी प्रवीण उर्फ रीवा धनकड़ व सोमवीर उर्फ राजेश धनकड़ निवासी रेवाड़ी हरियाणा सप्लाई करते थे। उसके बाद आरोपी अनुज अपने दो साथियों के साथ मिलकर औषधियां व इंजेक्शन तैयार कर विदेशी कंपनियों का लेबल लगाकर प्रवीण व सोमवीर को ही सप्लाई करता था। शनिवार को छापेमारी कर पुलिस ने मुख्य आरोपी अनुज, प्रीतम, बच्चन को गिरफ्तार कर लिया है और प्रवीण व सोमवीर दोनों फरार चल रहे हैं। तैयार इंजेक्शन पर मोटी कीमत अंकित करते थे

विदेश की नामी गिरामी कंपनियों के लेबल लगा बेचते थे माल

प्रोटीन इंजेक्शन रशिया, यूएसए, मास्को आदि देशों की नामी गिरामी कंपनियों के नाम के लेबल लगाकर बाजार भेजे जाते थे। साथ ही इंजेक्शन के कवर पर 2500 से 5000 रुपये तक अंकित किए जाते थे। पूछताछ में अनुज ने बताया कि उसने एक लाख रुपये की नौकरी छोड़कर अवैध रूप से नकली स्टेरायड बनाने का कार्य शुरु किया।

ड्रग निरीक्षक वैभव बब्बर ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर बुलंदशहर, गाजियाबाद, बिजनौर, मेरठ के निरीक्षकों ने जांच कर नमूने भरे। जांच के बाद पता चलेगा कि बरामद माल सेहत के लिए कितना खतरनाक था।

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