Wednesday, Oct 27, 2021
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investigation of the east delhi riots begins, know who is the culprit musrnt

जख्म और आंसुओं के बीच पूर्वी दिल्ली दंगों की जांच शुरू, जानिए कौन है गुनहगार

  • Updated on 9/13/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। फरवरी, 2020 में राजधानी के उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में लगे जख्मों के घाव अभी तक नहीं भरे हैं। हालांकि बदले हालातों में अब इलाका शांत है और लोग सभी जख्मों को भुलाते हुए नई जिंदगी जी रहे हैं लेकिन कोर्ट में इन दिनों दिल्ली दंगों की गूंज है।

वक्त के साथ कोर्ट में अब हालात बदलने लगे हैं। सड़कों से निकल कर कोर्ट पहुंची दंगों की जांच में दिल्ली पुलिस पीड़ितों और आरोपियों के बीच शह-मात का खेल चल रहा है। दंगों के बाद एकाएक एफआईआर और सैकड़ों लोगों की गिरफ्तारी के लगा था कि दंगों के साजिशकर्ता सलाखों के पीछे पहुंचे गए हैं।

यही नहीं दिल्ली पुलिस इन दंगों को साइंटिफिक तरीके से जांच कर रही कि शायद कोई भी साजिशकर्ता सलाखों से बाहर नहीं आ पाएगा लेकिन बदले वक्त में दंगों के केस में लगातार दिल्ली पुलिस की किरकिरी हो रही है। अधिकांश केसों में दिल्ली पुलिस को मात मिल रही है। कोर्ट की टिप्पणियों से दंगों में बनी एसआईटी और थाना पुलिस की जांचों पर सवाल खड़े हुए हैं।

हालांकि इस बात से दिल्ली पुलिस भी इत्तेफाक रखती है, जिसके चलते हाल में एक बार फिर पुलिस ने रणनीति मेंं बदलाव किया है लेकिन रणनीति कितनी कामयाब होगी और क्या पीड़ितों को न्याय मिलेगा या फिर दंगों में जो आरोपी बने हैं उन्हें सजा मिलेगी। आखिर क्या हैं मौजूदा हालात और आखिर क्यों दिल्ली पुलिस को हर मोर्च पर मिल रही मात। इसी पर नवोदय टाइम्स के लिए संजीव यादव के साथ पंकज वशिष्ठ की ये विशेष रिपोर्ट। 

दिल्ली पुलिस ने अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) के तहत  59 एफआईआर दर्ज की है, जिनकी जांच स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच कर रही है। इन आरोपियों में दिल्ली पुलिस ने यूएपीए लगाया है, साफ है कि इन केसों में जो आरोपी बनाए गए हैं वे ही दंगों के मुख्य साजिशकर्ता रहें थे और इन्हीं लोगों ने दंगों को भड़काया था। पुलिस का दावा है कि इन सभी केसों में दिल्ली पुलिस के पास पुख्ता ओर साइंटिफिक सबूत है, जिसके तहत आरेापियों का बचना बेहद मुश्किल है।

बता दें कि एफआईआर- 59 में उन छात्र नेताओं के नाम शामिल हैं जो दिल्ली में सीएए के खिलाफ प्रदर्शनों में प्रमुख चेहरे रहे। 6 मार्च 2020 को दर्ज हुई मूल एफआईआर में सिर्फ दो लोगों में जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई)से जुड़े दानिश के नाम हैं।

एफआईआर-59 के आधार पर अब तक 22 लोगों को गिर तार किया गया है, जिनमें से सफूरा जरगर, मोहम्मद दानिश, परवेज और इलियास इस समय जमानत पर रिहा हैं। बाकी सभी लोग अब भी न्यायिक हिरासत में हैं। वहीं दिल्ली दंगों से जुड़ी एफआईआर-59 के तहत अब तक कुल 15 लोगों को जमानत मिल चुकी है।

जाकिर नाईक केस में ट्रायल जल्द, सप्लीमेंट्री भी होगी दाखिल 

दंगों में विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल हुआ था। दिल्ली पुलिस का दावा था कि दंगों में 49 करोड़ रुपए बाहर से आए थे जो उन संगठनों को दिए गए थे जो सोशल मीडिया सहित आराजक तत्वों को बांटे गए थे, ताकि दंगों को भड़काया जा सके। इस मामले में दिल्ली पुलिस इस्लामी प्रचारक जाकिर नाईक और दंगों में अहम भूमिका निभाने वाले ताहिर हुसैन सहित 3 संगठनों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा चुकी है। साथ ही फंडिंग कैसे कैसे हुई इसके भी साइंटिफिक प्रमाण ले चुकी है। जाहिर है इस केस में दिल्ली पुलिस दंगों के साजिशकर्ताओं को मात देगी। 

पुलिस आयुक्त रख रहे हैं बारीकी से नजर

नव नियुक्त पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना भी लगातार दिल्ली दंगों से जुड़ी जांच को अब खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बताया जाता है इसके लिए उन्होंने एक स्पेशल सीपी स्तर के अधिकारी को सीधे रूप से सभी जांच पर बारीकी से नजर रखने को कहा है।

गत दिनों एक बैठक में उन्होंने सभी अधिकारियों को चेताया कि दिल्ली पुलिस की छवि बेहद साफ और सुथरी है क्योंकि जिस तरह के दंगें हुए और उन पर महज 72 घंटे पर काबू पा लेना काबिलेतारिफ रहा, साथ ही हर शिकायतकर्ता की शिकायत को दर्ज करना और केस में 90 फीसदी से अधिक आारोपियों की शत प्रतिशत गिरफ्तारी करना प्रशंसा की बात है लेकिन गत 3 माह में कोर्ट से जो फैसले दंगे के आरोपियों के पक्ष में आए हैं वह चिंता का विषय है क्योंकि एकाएक लगातार विभाग की खामियों को उजागर कर रहा है, यही नहीं कई मामलों में तो ऐसी तीखी टिप्पणी भी कर रहा है, जिससे जांच की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं।

इसी के चलते अधिकांश केसो में फाइल की गई चार्जशीट के साथ आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट और कई केसों में फ्रदर इनवेस्टिगेशन (अग्रिम जांच) की अनुमति लेने की तैयारी की गई है। इसके पीछे कारण है कि कोई भी दंगे का गुनाहगार आसानी ने न छूटे।

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