Monday, Dec 06, 2021
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Delhi Riots: खुली परतें तो दिखा दिल्ली दंगों का सच, दंगों में मरकज और देवबंद की अहम भूमिका

  • Updated on 6/4/2020

नई दिल्ली/ संजीव यादव। राजधानी के नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में 23 से 26 फरवरी तक हुए दंगों की जांच की परतें जैसे जैसे खुल रही है, उसमें बड़े नाम सहित साजिश का पता चल रहा है। क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में नार्थ ईस्ट दंगों में जले एक राजधानी पब्लिक स्कूल से जुड़े एक केस में चार्जशीट दाखिल की है।
 

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चार्जशीट में हैं ये नाम  
चार्जशीट में दावा किया है कि इस स्कूल को जलाने और आसपास के इलाकों में हिंसा फैलाने में दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज और यूपी के सहारनपुर स्थित देवबंद की अहम भूमिका थी। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई), विमिन स्टूडेंट ग्रुप पिंजरा तोड़, इंडिया अगेंस्ट हेट, जेएनयू के पूर्व स्टूडेंट उमर खालिद, जामिया को-ऑर्डिनेशन कमिटी और जेएनयू के अलगाववादी विचारधारा से जुड़े छात्र भी इस साजिश का हिस्सा बने थे। बता दे कि क्राइम ब्रांच हिंसा से जुड़ी 59 केसों की जांच कर रही है,जिसमें से उसने 5 वें केस में अपनी चार्जशीट दाखिल की है। 

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राजधानी पब्लिक स्कूल के मालिक फैसल फारूखी मुख्य सुत्रधार
जांच के तहत दयालपुर थाना के तहत शिव विहार तिराहे पर न्यू मुस्तफाबाद स्थित राजधानी पब्लिक स्कूल के मालिक फैसल फारूखी को खजूरी,ताहिरपुर,न्यू मुस्तफाबाद इलाके में दंगे फैलाने का मुख्य सुत्रधार बताया है। फारुख दंगे से ठीक एक दिन पहले यानी 23 फरवरी को वह सहारनपुर स्थित देवबंद गया था और उसी रात वापिस भी आया था। फैसल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड के मुताबिक उसने दंगों से पहले और बाद में पीएफआई के तीन अहम सदस्यों के अलावा  पिंजरा तोड् की दो एक्टिव सदस्य़, जामिया को-ऑर्डिनेशन कमिटी के 3 लोगों , हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज के कमेटी के मेंबर और देवबंद के तीन धर्मगुरुओं के बता की थी। 

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फैजल के इशारे पर डीआरपी स्कूल में लगी आग,नेगी को जलाया गया जिंदा 
फैज़ल फारूक के स्कूल से 24 फरवरी का उपद्रवी नीचे उतरे और डीआरपी स्कूल को आग लगाई गई, स्कूल के कंप्यूटर और महंगा सामान लूटा। दंगाइयों ने राजधानी पब्लिक स्कूल की छत पर बड़े पैमाने पर तेजाब, ईंटें, पत्थर, पेट्रोल और बम जमा किए थे। छत पर लोहे की बनी एक बड़ी गुलेल  भी थी जिसके जरिए देशी मिसाइल भी दागी गईं थी। फैजल के कहने पर दो दूकानों में आग लगाई गई। इसमें अनिल स्वीट्स नाम से मिठाई की दुकान थी। इसी दूकान के एक कर्मचारी दिलबर नेगी को पहले बुरी तरह से पीटा गया और उसे अधमरा कर दुकान में ही जिंदा जला दिया गया। इसके बाद पास की पार्किंग में फारुख के कहने पर ही करीब 30 से अधिक गाडिय़ों को जलाया गया। एसआईटी ने 52 लोगों के बयानों को लिया है,जिसमें बताया गया कि फारुख कहा कहा किस किस समय मौजूदा था। 

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दिल्ली में जामिया को पहले केन्द्र फिर नार्थ ईस्ट पर साधा निशाना 
क्राइम ब्रांच ने चार्जशीट के साथ एक 3 पन्नों की क्रॉनोलजी दी है। जिसमें कहा है कि 11 दिसंबर 2019 को जैसे ही सीएए बिल पास हुआ तभी एक धर्म विशेष के लोगों ने पूरे देश में योजनाबद्ध तरीके धरने-प्रदर्शन शुरू किए और लोगों को भडक़ाया। इसी कड़ी में जामिया यूनिवर्सिटी में 13 दिसंबर को हिंसा भडक़ाई गई और उसी दौरान न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 15 दिसंबर को पीएफआई के लोगों के अलावा जेएनयू के स्टूडेंट शरजील इमाम और पूर्व छात्र उमर खालिद ने भडक़ाऊ भाषण दिए। जिसके बाद जब ङ्क्षहसा एक सीमित क्षेत्र तक रह गई तो उसके लिए फिर से प्लान किया गया और जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर महिलाओं को लाया गया जिसके बाद वहां से हिंसा की बड़ी शुरुआत हुई। 

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सीलमपुर में पिंजरा तोड़ और जमिया को-ऑर्डिनेशन कमिटी की भूमिका 
सीलमपुर में 66 फुटा रोड पर बैठे लोगों को मंच पर उमर खालिद, वकील महमूद पारचा, जामिया को-ऑर्डिनेशन कमिटी और पिंजरा तोड़ और एनजीओ दिशा के मेंबरों ने भडक़ाऊ भाषण दिए और मंच से लोगों को उकसाया। क्राइम ब्रांच के तहत वे दंगे को फैला अंतर्रराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि धूमिल करना चाहते थे और इंटरनैशनल मीडिया में सीएए को बड़ा मुद्दा बनाना मकसद था।

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इनके भाषण और साजिश से भडक़ी थी इन जगहों पर हिंसा 
भाषणों के चलते न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और जामिया यूनिवर्सिटी में हिंसा और आगजनी हुई। इसके बाद दयालपुर, सीमापुरी, नंद नगरी, सीलमपुर, जाफराबाद,शिव विहार,बाबरपुर में उत्पात हुआ । 7 जगह जिनमें सीलमपुर, दयालपुर की बृजपुरी पुलिया और चांदबाग वजीराबाद रोड, ज्योति नगर के कर्दमपुरी, खजूरी खास के श्रीराम कॉलोनी, भजनपुरा के नूर-ए-इलाही पट्रोल पंप और शास्त्री पार्क में धरने शुरु किए गए और लोगों को भडक़ाया गया। बता दे कि यहीं पर हिंंसा भी सबसे ज्यादा हुई। 

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