Thursday, Jan 20, 2022
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अगर फर्जी TRP कांड में दोषी साबित हुए चैनल मालिक तो मिल सकती है लंबी जेल....

  • Updated on 10/9/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मुंबई पुलिस द्वारा टीआरपी रैकेट का भंडाफोड़ करने के बाद रिपब्लिक टीवी समेत 3 न्यूज चैनलों की हालत खस्ता हो चली है। ये तीनों चैनल अब खुदको बचाने के लिए जुगत लगा रहे हैं तो वहीँ पुलिस ने इससे जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है। 

पुलिस ने रैकेट का खुलासा करते हुए दावा किया था कि सुशांत सिंह राजपूत मामले में प्रोपेगैंडा चला कर फॉल्स टीआरपी जुटाने का रैकेट चलाया जा रहा है। लोगों को पैसे देकर फॉल्स टीआरपी हासिल की जा रही है। 

पुलिस ने इस मामले में रिपब्लिक टीवी के संचालकों से भी पूछताछ करेगी जबकि अभी तक दो मराठी चैनलों के मालिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके खिलाफ भारतीय दंड सहिंता की धारा 409 और 420 के तहत कार्रवाई की जा रही है। आइये आपको बताते हैं कि इन आरोपियों को कितनी सजा मिल सकती है। 

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फर्जीवाड़े के आरोप पर सजा
आरोपियों के खिलाफ फेक टीआरपी का खेल खेलने के चलते आईपीसी की धारा 420 लगाई गई है। इसके तहत उनपर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा करने का आरोपी बनाया गया है। ऐसे में दोषी को एक अवधि के लिए जेल की सजा दी जा सकती है, जिसे 7 साल तक बढ़ाए जाने का प्रावधान भी है। साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है। या दोनों भी दिया जा सकता है। यह एक गैर-जमानती संज्ञेय जुर्म है, जिसे कोई भी जज सुन सकता है। इसके अलावा यह कोर्ट की परमिशन से समझौता करने योग्य अपराध भी है।  

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आपराधिक हनन पर 
किसी लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता के विश्वास का आपराधिक हनन करने पर आईपीसी की धारा 409 लगती है। इसमें दोषी पाए जाने को एक अवधि के लिए जेल हो सकती है जिसे 10 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। साथ ही जुर्माना भी लग सकता है। यह गैर-जमानती संज्ञेय अपराध है जिसे प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा सुना जा सकता है और ये अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।

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दिए थे 500 रुपये
बताते चलें कि इस मामले में मुंबई पुलिस ने बताया था कि हमें ऐसी सूचना मिल रही थी कि पुलिस के खिलाफ दुष्प्रचार चलाया जा रहा है। फॉल्स टीआरपी को लेकर क्राइम ब्रांच ने नए रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस का दावा है कि चैनल टीआरपी पाने के लिए हर महीने घरों में 500 रुपये दिया करते थे। इसके बदले चैनल को टीवी और मोबाइल पर ऑन रखा जाता था।

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