Sunday, Dec 04, 2022
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बाल तस्करी को रोकने के लिए 75 सीमावर्ती जिलों में एनसीपीसीआर चला रहा है अभियान

  • Updated on 8/2/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। बाल तस्करी जैसे गंभीर अपराध पर कमर कसते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) 25 दिनों तक अभियान चला रहा है। यह अभियान 75 सीमावर्ती जिलों में चलाया जा रहा है। जिसमें बाल तस्करी जैसे गंभीर अपराध को मानवाधिकारों के उल्लंघन का सबसे खराब रूप बताते हुए उसे रोकने का प्रयास स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एससीपीसीआर) और जिला प्रशासन के सहयोग से किया जाएगा।
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एनसीपीसीआर के अधिकारी सीमावर्ती गांवों के बच्चों के साथ मनाएंगे स्वतंत्रता दिवस : प्रियंक कानूनगो
एनसीपीसीआर के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बताया कि देश प्रगतिशील भारत के 75 वर्ष का उत्सव आजादी का अमृत महोत्सव के रूप में मना रहा है। ऐसे में बाल तस्करों से बच्चों को आजादी मिलना बेहद जरूरी है ताकि उनके साथ भावनात्मक हिंसा, शारीरिक व यौन शोषण, दुव्र्यवहार, यातना और सदमा, जबरन बंधुआ मजदूरी, बाल विवाह व दासता से बचाव हो सके। इस संबंध में लगातार चयनित 75 जिलों में संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए जिला स्तरीय कार्यक्रम किए जा रहे हैं। जिसमें स्पेशल जूवेनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू), एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू), थानों के चाइल्ड वेलफेयर पुलिस ऑफिसर (सीडब्ल्यूपीओ), बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी), जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) और मानव तस्करी के मुद्दों पर देश के चिन्हित 75 सीमावर्ती गांवों में सक्रिय विशेष बल के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग की जा रही है। साथ ही एनसीपीसीआर के अधिकारी सीमावर्ती गांवों का दौरा कर रहे हैं और 75वां स्वतंत्रता दिवस भी जिलों के बच्चों के साथ मनाएंगे।

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