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ndmc data leak case hacker knows when salary comes delhi police probe

#NDMC डेटा लीक मामला: हैकर जानता है कब आती है सैलरी

  • Updated on 2/15/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। एनडीएमसी (NDMC) में 200 खातों में जिस तरह से सेंध लगी है व उनकी माह भर की कमाई उड़ गई है। जांच में ये साफ हो गया है कि हैकर जो कोई भी है, उसे एनडीएमसी के सैलरी स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी है। वह यह जानता है कि कब-कब सैलरी कर्मचारियों के खाते में डाली जाती है। 

सेंध लगाने वाला वाकिफ है एनडीएमसी सैलरी कल्चर से
एनडीएमसी कर्मचारियों के अकाउंट में सेंध लगाने वाला एनडीएमसी सैलरी कल्चर से अच्छी तरह वाकिफ है क्योंकि उसने पहली सेंध 4 फरवरी को लगाई थी, उसे मालूम था कि परमानेंट कर्मचारियों की सैलरी महीने की पहली तारिख को आ जाती है। दूसरी सेंध उसने 6-7 फरवरी को लगाई, उसे मालूम था कि तदर्थ कर्मचारियों की सैलरी इन दो दिनों में आती है। जबकि कैजुअल कर्मचारियों की तनख्वाह 12 से 13 के बीच आती है।

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क्या कहती है एनडीएमसी यूनियन
नई दिल्ली नगर पालिका कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधाकर कुमार ने बताया कि जैसे ही शुक्रवार को पीड़ित कर्मचारियों की संख्या बढऩे लगी तो उन्होंने इस मामले की जानकारी लिखित तौर पर एनडीएमसी अध्यक्ष सहित एनडीएमसी फाइनेंस एडवाइजर, आरबीआई के प्रवक्ता, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के दिल्ली जोन के जोनल मैनेजर सहित एनडीएमसी के डायरेक्टर पीआर को दी।

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उनका कहना है कि एनडीएमसी अध्यक्ष से मुलाकात नहीं हो पाई, लेकिन आरबीआई के प्रवक्ता ने कहा कि सभी कर्मचारियों की एक सामूहिक एफआईआर दर्ज करवाएं तो हम संज्ञान लेंगे। बीते शनिवार से अभी तक करीब 200 कर्मचारियों के अकाउंट खाली किए जा चुकें हैं। एनडीएमसी डायरेक्टर पीआर ने आश्वासन दिया है कि सेक्रेटरी के मंजूरी के बाद उक्त मामले पर एडवायजरी जल्द जारी की जाएगी। 

जरा सी लापरवाही और मिनटों में खाली हो जाता है खाता
नई दिल्ली, 14 फरवरी (मुकेश ठाकुर) : देश भर में जितनी तेजी से ऑनलाइन सेवा का विकास हो रहा है, उतनी ही तेजी से आर्थिक अपराध करने वाले ठग भी अपने को अपडेट कर रहे हैं। वे नित नए तरकीबों से आम लोगों द्वारा बैंकों में जमा किए जाने वाले मेहनत की कमाई में सेंध लगाने की जुगत में होते हैं। इस दौरान एक जरा सी असावधानी और ये ठग आपके वर्षों की मेहनत से जमापूंजी पर हाथ साफ कर गायब हो जाते हैं। सिर्फ दिल्ली में ही वर्ष 2019 में करीब एक हजार से अधिक ऑनलाइन ठगी के मामले दर्ज हुए हैं। 

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ऑनलाइन सेवा से रहें सतर्क :साइबर एक्सपर्ट कहते हैं कि ज्यादातर ठगी की वारदातें यूजर द्वारा बरती गई असावधानी के कारण होती है। अगर यूजर सावधान रहें और सुरक्षा नियमों का पालन करें तो 90 फीसदी ऑनलाइन और एटीएम ठगी के मामलों को रोका जा सकता है। अपडेशन को कभी इग्नोर नहीं करें: मोबाइल में जब भी एप अपडेशन का नोटिफिकेशन आए तो उसे कभी भी इग्नोर नहीं करें। दरअसल, हर अपडेशन में कंपनियां आपके एप को हैकिंग प्रुफ  रखने के फंक्शन को भी अपडेट करती हैं। 

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सिक्योरिटी के लिए फोन लॉक करें :हमेशा अपने फोन में 6 डिजिट के पासवर्ड वाला लॉक रखें। फेस लॉक व ङ्क्षफगर सेंसर भी बेहतर ऑप्शन हैं। ऑनलाइन सर्विस को अनलॉक नहीं करें: समार्टफोन में ऑनलाइन सर्विस के एड आते रहते हैं। अनजान ऑनलाइन सर्विस का मैसेज आए तो कभी भी उसे लॉग इन न करें।

एटीएम मशीन पर स्क्रीनिमिंग डिवाइस से हो रही ठगी
एक्सपट्र्स के मुताबिक जब आप किसी एटीएम पर जाते हैं, वहां फर्जीवाड़ा करने वाले बदमाश पहले से स्क्रीनिमिंग डिवाइस लगा चुके होते हैं। जैसे ही आप अपना एटीएम कार्ड एटीएम मशीन में डालते हैं, आपके कार्ड की पूरी जानकारी स्क्रीनिमिंग डिवाइस के जरिए हैकर्स तक पहुंच जाती है और जब आप एटीएम मशीन में अपना पिन दबाते हैं तो वो वहां लगे कैमरे की मदद से आपका पिन कोड जान लेता है। फिर इस डुप्लीकेट एटीएम कार्ड की मदद से बिना आपकी जानकारी दिए बगैर भी अपके खाते से पैसा उड़ा लिया जाता है।

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क्या कहती है पुलिस
पुलिस अफसरों के अनुसार शिकायत के लिए ट्रांजेक्शन की पूरी जानकारी जरूरी है। यह बैंक से मिलता है। इसलिए ग्राहक को बैंक जाकर तुरंत खाता ब्लॉक कराना चाहिए। बैंक से ट्रांजेक्शन की जानकारी लेनी होगी। उसके बाद ही पुलिस में शिकायत हो पाएगी। पैसे कहां गए इसकी जानकारी मिलने पर पैसे वापस लाने का प्रयास किया जाता है क्योंकि गेटवे पता होने पर या ट्रांजेक्शन डिटेल होने पर संबंधित कंपनी से संपर्क किया जाता है। उन्हें ट्रांजेक्शन रोकने और पैसे रिटर्न करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद समय की व्यस्तता और नियम कायदे की बात करते हुए खाते की डिटेल देने में देरी की जाती है।

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