Thursday, Apr 09, 2020
nirbhaya rape case just 3 hours before hanging court turned water on convicts intentions

निर्भया कांड : फांसी से 3 घंटे पहले कोर्ट ने इस तरह फेरा दोषियों के मंसूबों पर पानी

  • Updated on 3/20/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को निर्भया (Nirbhaya Rape Case) के सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के बर्बर मामले में चारों दोषियों को शुक्रवार तड़के दिए गए मृत्युदंड से महज तीन घंटे पहले बृहस्पतिवार देर रात को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने एक दोषी की याचिका खारिज करके फांसी से बचने के उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। दोषी पवन गुप्ता की दया याचिका राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दूसरी बार खारिज कर दी जिसके खिलाफ उसने न्यायालय में याचिका दायर की थी। 

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सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती

न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने दोषी पवन गुप्ता की उस यााचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उसने कहा था कि राष्ट्रपति ने बिना इस बात पर विचार किए उसकी दया याचिका गलत तरीके से खारिज कर दी कि वह 2012 में हुई घटना के समय नाबालिग था। पीठ ने कहा, ‘‘इस न्यायालय का यही रुख रहा है कि दया याचिकाओं के मामले में राष्ट्रपति के फैसले की समीक्षा की गुंजाइश बहुत सीमित है।’’

उसने कहा, ‘‘आप राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किए जाने को किस आधार पर चुनौती दे रहे हैं... आप नाबालिग होने का दावा करने के लिए अपने स्कूल के प्रमाण पत्र को दिखा रहे हैं और बार-बार इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। आप फैसले के पुनरीक्षण का अनुरोध कर रहे हैं जबकि नाबालिग होने का आपका दावा निचली अदालत, उच्च न्यायालय और हमने भी खारिज कर दिया है।’’ केंद्र एवं दिल्ली पुलिस के वकील सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन गुप्ता के नाबालिग होने के दावे पर आपत्ति जताई और कहा कि सभी अदालतें पहले ही इस पर फैसला सुना चुकी है। 

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न्यायालय ने पवन गुप्ता के वकील ए पी सिंह की भी उस याचिका पर विचार नहीं किया जिसमें उसने कहा था कि उसकी फांसी को एक या दो दिन के लिए टाला जाए ताकि वह हमला मामले में अपना बयान दर्ज करा सके। सिंह ने आरोप लगाया था कि दोषी पवन गुप्ता को पुलिसकर्मियों ने पिछले साल जेल में पीटा था। न्यायालय ने केंद्र से दोषियों के वकील के इस अनुरोध पर विचार करने को कहा था कि पवन गुप्ता और अक्षय सिंह को फांसी पर लटकाए जाने से पहले अपने परिवार से पांच से 10 मिनट मिलने की अनुमति दी जाए। 

सुबह साढ़े पांच बजे फांसी

इस पर मेहता ने कहा था कि हालांकि यह दुखदायी है, लेकिन जेल नियमावली दोषियों को फांसी पर लटकाए जाने से ठीक पहले परिवार से मिलने की अनुमति नहीं देती। उल्लेखनीय है कि निर्भया सामूहिक बलात्कार एवं हत्या मामले के चारों दोषियों को शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गई। पूरे देश की आत्मा को झकझोर देने वाले इस मामले के चारों दोषियों... मुकेश सिंह (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) को सुबह साढ़े पांच बजे तिहाड़ जेल में फांसी दी गई। इस मामले की 23 वर्षीय पीड़िता को ‘‘निर्भया’’ नाम दिया गया जो फिजियोथैरेपी की छात्रा थी। 

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सामूहिक बलात्कार एवं हत्या के इस मामले के इन दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीन बार सजा की तामील के लिए तारीखें तय हुईं लेकिन फांसी टलती गई। अंतत: आज सुबह चारों दोषियों को फांसी दे दी गई। इस मामले में मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह सहित छह व्यक्ति आरोपी बनाए गए। इनमें से एक अवयस्क था। 

मामले के एक आरोपी राम सिंह ने सुनवाई शुरू होने के बाद तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। अवयस्क को सुनवाई के बाद दोषी ठहराया गया और उसे सुधार गृह भेज दिया गया। तीन साल तक सुधार गृह में रहने के बाद इस किशोर को 2015 में रिहा कर दिया गया। दोषी ठहराए गए मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को आज सुबह फांसी दे दी गई।
 

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