Sunday, Oct 02, 2022
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महिला को दो लाख प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश

  • Updated on 7/28/2022

महिला को दो लाख प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश
पति की आय के अनुरूप रहना महिला का अधिकार- अदालत

 

नई दिल्ली, 28 जुलाई (नवोदय टाइम्स): रोहिणी स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कनिका जैन की अदालत ने घरेलू हिंसा के एक मामले में पत्नी के द्वारा दायर की गई गुजारा भत्ते की याचिका पर सुनवाई करते हुए पति को आदेश दिया है कि वह पत्नी को प्रति माह दो लाख रूपए गुजारा भत्ता का भुगतान करे।

अदालत ने कहा है कि महिला का अधिकार है कि उसकी जीवन शैली पति की आय के अनुरूप हो और उसे इससे वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि कारोबारी पति की मासिक आय के हिसाब से पत्नी का गुजाराभत्ता तय किया गया है। पति की मासिक आय करीब 12 लाख रुपये है। ऐसे में पत्नी को पति की हैसियत के हिसाब से दो लाख रुपये महीना गुजाराभत्ता देने का आदेश देना न्यायसंगत है।

महिला के वकील ने अदालत में दलील दी थी कि पति के आय के अनुरूप ही पत्नी को गुजारा भत्ता की रकम तय की जाती है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

इस मामले में महिला के पति की मासिक आय 11 लाख 53 हजार रुपये है। ऐसे में महिला को दो लाख रुपये का गुजाराभत्ता देना सही होगा। अदालत ने यह भी कहा कि दो लाख रुपये महज घर खर्च चलाने के लिए हैं, जबकि महिला पहले से ही पति के एक अलग घर में रह रही है।
 

दोनों बेटियां रह रही हैं पिता के साथ
दंपति की दो बेटियां हैं जो पिता के साथ ही रहती हैं। बड़ी बेटी पिता की दवा कंपनियों में हिस्सेदार है। इसलिए अदालत ने मुआवजा रकम तय करते समय बड़ी बेटी को आत्मनिर्भर माना है। वहीं, छोटी बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी पिता पर होने के चलते उसकी गुजाराभत्ता रकम पिता के हिस्से में ही रहने दी गई है।
 

महिला ने की थी 25 लाख रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता की मांग
अदालत में जमा कराए गए हलफनामे में बताया गया कि महिला के पति की तीन दवा कंपनियां हैं, जिसके आधार पर महिला ने प्रतिमाह 25 लाख रुपये के गुजाराभत्ते की मांग की थी। लेकिनए अदालत ने कहा कि प्रतिवादी पति की ओर से पेश आयकर दस्तावेजों के अनुसार उसकी मासिक आय 11 लाख 53 हजार 40 रुपये है। ऐसे में अदालत उतना ही गुजाराभत्ता देने का आदेश दे सकती है जो कानूनी व व्यावहारिक तौर पर सही हो।
 

अदालत ने पति की आय को किया चार भागों में विभाजित
अदालत ने इस मामले में प्रतिवादी की 11 लाख 53 लाख रुपये की आय को चार भागों में विभाजित किया है। दो हिस्से पति के रखे गए हैं। एक हिस्सा छोटी बेटी और चौथा हिस्सा पत्नी को दिया गया है। क्योंकि छोटी बेटी पिता के साथ ही रह रही है। ऐसे में तीसरा हिस्सा भी पिता के पास ही रहेगा।
 

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