Monday, Apr 23, 2018

दिल्ली: पुलिस कमिश्‍नर का बड़ा बयान, कहा - अपने ही लूटते हैं महिलाओं की अस्मत

  • Updated on 1/12/2018

नई दिल्ली/ब्यूरो। दिल्ली पुलिस ने प्रेस कांफ्रेस में आंकड़ों की बाजीगरी करते हुए दिल्ली में जघन्य अपराध पर अंकुश लगाने का दावा किया। लेकिन, दूसरी तरफ अपराधिक मामले अधिक दर्ज करने की भी बात कही। दिल्ली पुलिस आयुक्त ने सालाना संवाददाता सम्मेलन में बताया कि महिला अपराधों पर पुलिस ने पूरी तरह से अंकुश लगाया।

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यही नहीं राजधानी में एक भी आतंकी हमला नहीं होने का दावा किया है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि राजधानी का हर नागरिकऔर वह महिला जो प्रतिदिन किसी न किसी कार्य से घर से बाहर निकलती है वह सुरक्षित है। दिल्ली अन्य राज्यों की तुलना में 82 प्रतिशत सुरक्षित है और यहां घर में रहने वाला और सड़कों पर निकलने वाला व्यक्ति इस बात को जानता है कि दिल्ली पुलिस सदैव उसके साथ है। लेकिन, पुलिस आयुक्त के दावे उनके पेश किए गए आंकड़े ही झूठे साबित करते हैं।

पुलिस के दावों की कलई पेश की वार्षिक रिपोर्ट में बयां करती है कि जहां गत वर्ष की तुलना में अपराध कम हुआ ,लेकिन वहीं पिछले साल की तुलना में 12 प्रतिशत ज्यादा मामले दर्ज किए गए। यही नहीं सड़कों पर क्राइम ग्राफ 25 फीसदी तक बढ़ा, महिला रेप, छेडख़ानी में सत्तर प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सालाना वार्षिक प्रेस कॉन्फे्रंस में पुलिस आयुक्त समेत सभी अधिकारियों ने कई बेहतर दावे किए, लेकिन जब उन्होंने आंकड़े पेश किए तो उनकेे दावे कमजोर होते दिखे।

अपने लूटते रहे अस्मत, दोस्त सबसे खतरनाक

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों की माने तो दिल्ली में अब भी महिलाओं की आबरु सुरक्षित नहीं है। इसमें सबसे शर्मसार करने वाली बात यह सामने आई है कि पिछले साल की भांति इस वर्ष भी सबसे दागदार दोस्त और रिश्तेदार ही रहे। इसके अलावा चाचा, मामा, चचेरा भाई, फूफा समेत सौतेले पिता तक शामिल हैं, जिन्होंने अपने ही जान पहचान व रिश्तेदार का आबरु दागदार किया। 

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 के मुकाबले 2017 में महिलाओं के प्रति महज 0.73 प्रतिशत की रेप की घटनाओं में कमी आई है। वर्ष 2016 में जहां पर रेप के 2064 मामले दर्ज हुए थे वहीं 2017 में रेप के कुल 2049 मामले दर्ज हुए हैं। छेडख़ानी में पिछले साल की तुलना में करीब 18.88 फीसदी कमी आई और टीचिंग के मामले में लगभग 30.54 फीसदी की कमी आई है। सबसे अधिक रेप की वारदात को दोस्त और परिवार के करीबियों ने अंजाम दिया।

आंकड़े बताते हैं कि 38.99 फीसदी रेप की घटना को दोस्त और घर आने जाने वाले फैमिली दोस्तों ने अंजाम दिया। जबकि 19.08 फीसदी रेप की वारदात की घटना को पड़ोसियों ने अंजाम दिया। उसके बाद रेप की घटना में करीब 14.20 फीसदी रिश्तेदारों ने अंजाम दिया। वहीं रेप की घटना में साथ में काम करने वाले साथी या वर्कर की संख्या महज 3.86 फीसदी रही। हालांकि इस बार रेप की वारदात में अज्ञात लोगों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस बार करीब साढ़े 20 फीसदी रेप के मामले अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए। जबकि अन्य अज्ञात लोगों की बात करे तो उनके खिलाफ  रेप का महज 3.37 फीसदी  ही मामला दर्ज हुआ है। 

दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि पिछले वर्ष 2016 की तुलना में वर्ष 2017 में भले ही रेप के मामले कम दर्ज हुए। लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी की संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2016 में जहां रेप के आरोप में 86 फीसदी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। वहीं 2017 में 92 फीसदी आरोपियों को रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया। 

घर में ही सुरक्षित नहीं वाहन 

सड़कों व पार्किंग में खड़े वाहनों की तो दूर की बात घर के बाहर भी खड़े वाहन सुरक्षित नहीं हैं। यह बात दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के स्पेशल कमिश्नर दीपेंद्र पाठक ने कही। दिल्ली पुलिस की तरफ से जारी आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017 में कुल 39080 वाहन चोरी हुए हैं। जबकि वर्ष 2016 में 36702 वाहन चोरी हुए थे। 

ऑनलाइन होने से ज्यादा मुकदमे हो रहे हैं दर्ज : पाठक ने कहा कि जब से दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन एफआईआर होने का सिस्टम लागू किया है, इसके बाद से चोरी के मामले में मुकदमे अधिक दर्ज होने लगे हैं। खास बात है कि दिल्ली से बाहर अगर वाहन चोरी हो रहें हो तो लोग दिल्ली पुलिस की ऑनलाइन सिस्टम पर केस दर्ज करवा रहे हैं। 

एनसीआर का बढ़ रहा है दायरा: पाठक ने कहा कि एनसीआर का दायरा दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है, ऐसे में चोरी की घटनाओं में इजाफा होगा। इसकी वजह भी है, क्योंकि बाहर के लोग यहां आकर वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं। ऐसे में उन बदमाशों का डाटा दिल्ली पुलिस के पास एकत्रित नहीं हो पाता है। 

बाइक सबसे ज्यादा चोरी : दिल्ली पुलिस की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वाहन चोरी में सबसे ज्यादा बाइक 29804 चोरी हुई है। जबकि कार 7047 और 2229 अन्य वाहन चोरी हुए हैं। इनमें केवल दिल्ली पुलिस ने 4053 वाहन बरामद किए हैं। वहीं 5649 ऑटो लिङ्क्षफ्टग में वाहन बरामद किए हैं। 

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 हत्या में आई कमी

राजधानी में हत्या के कारण जो भी रहे हो लेकिन दिल्ली पुलिस की हुई वार्षिक प्रेस वार्ता में पुलिस अधिकारियों ने पिछले साल की तुलना में इस साल हत्या के ग्राफ  में कमी का दावा किया है। पुलिस की मानें तो दिखावे को लेकर 9.74 प्रतिशत लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। वहीं अचानक आए गुस्से में 18.61  प्रतिशत लोगों की हत्या हुई। वहीं अपराध के दौरान 10.82  प्रतिशत लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि बाकी अनसुलझे मामलों को सुलझाने के लिए टीमें काम कर रही हैं, उन्हें भी जल्द सुलझा लिया जाएगा। छोटी-छोटी बातों पर लोगों की हुई हत्याओं में बदरपुर इलाके में 29 जनवरी 2017 को बाल कटिंग के दौरान हुए झगड़े में एक युवक की हत्या, 1 फरवरी 2017 को सोने के लिए जगह को लेकर झगड़े में हुई हत्या, कश्मीरी गेट में मां-बहन को गाली देने पर युवक की हत्या, शाहबाद डेयरी इलाके में 14 मार्च को डीजे बजाने को लेकर विवाद में युवक की हत्या, वहीं दरियागंज में खाना पैक करने में हुई देरी पर युवक की हत्या कर दी गई। वर्ष 2016 में जहां 501 लोगों की हत्या हुई, वहीं इस साल यह आंकड़ा घटकर 462 रह गया। वहीं इन हत्याओं के मामले में पुलिस ने 89 फीसदी मामलों को सुलझा भी लिया। 

हथियार तस्करों की दिल्ली बनी पहली पसंद 

 दिल्ली पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में हथियारों की तस्करी में बढ़ोतरी के साथ ही पुलिस ने पिछले वर्ष के मुकाबले 50.14 प्रतिशत ज्यादा अवैध हथियार बरामद किए हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष  2016 में पुलिस ने कुल 738 हथियार जब्त किए थे। वहीं, 2017 में कुल 1108 हथियार और 4666 कारतूस बरामद किए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली में इस वर्ष 2016 के मुकाबले हथियार के उपयोग में की वारदात में कमी दर्ज की गई है। जहां, 2016 में कुल 912 ऐसे मामले सामने आए थे। 2017 में इन वारदातों में 6.36 प्रतिशत की कमी के साथ कुल 854 मामले दर्ज किए गए हैं। भले ही दिल्ली पुलिस हथियार तस्करों को पकडऩे का दावा कर रही है। लेकिन यह आंकड़े बताते हैं कि हथियार तस्करों की पहली पसंद दिल्ली बन रही है। 

नकली नोटों के कारोबार पर लगा अंकुश, बरामदगी में बढ़ोतरी 

इस वर्ष दिल्ली पुलिस की सक्रियता के चलते नकली नोटों का कारोबार करने वाले गिरोह पर अंकुश लगा है। इसके कारण वर्ष 2017 में 2016 के मुकाबले दर्ज हुए मामलों में काफी कमी आई है। इसमें 2016 में कुल 80 मामले दर्ज हुए थे और कुल 5.74 करोड़ के नकली नोट पुलिस ने बरामद की थी। इस वर्ष मात्र 46 मामले ही दर्ज हुए हैं। वहीं कुल 6.59 करोड़ नकली नोट बरामद किए है। बरामद नोट तस्करों द्वारा पश्चिम बंगाल के मालदा और वेस्ट चंपारण, बिहार से दिल्ली लाई गई थी। 

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अच्छी पुलिसिंग तभी तब हर व्यक्ति महसूस करे सुरक्षित 

पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायकने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके घर केे लोग हो या राजधानी का हर नागरिक,जब तकवह अपने को सुरक्षित नहीं महसूस करता तब तक अच्छी पुलिसिंग की कल्पना करना गलत है। हमने प्रयास किया है और इस साल हमने पुलिसिंग के साथ अपने अधिकारियों सहित हर पुलिसकर्मी की जवाबदेही इसलिए तय की है कि हर व्यक्ति अपने को सुरक्षित महसूस करे, खासतौर से वो महिलाएं जो कामकाजी है। 

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