Sunday, Feb 05, 2023
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producer of marathi films and web series turns out to be international pigeon

मराठी फिल्मों व वेब सेरीज का प्रोड्यूसर निकला अंतरराष्ट्रीय कबूतरबाज

  • Updated on 8/20/2022

आईजीआई एयरपोर्ट थाना पुलिस ने फर्जी पासपोर्ट वीजा रैकेट का किया भंडाफोड़
- मुंबई से रैकेट के सरगना व एक यात्री सहित पांच को किया गिरफ्तार
- महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली में चला रहा था रैकेट
- 325 फर्जी पासपोर्ट, 175 वीजा, 100 से रबड़ स्टांप, 70 से बायोपेज, कटर धागा आदि

नई दिल्ली, 20 अगस्त (नवोदय टाइम्स):


आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस ने फर्जी वीजा व पासपोर्ट का रैकेट के खिलाफ अभियान जारी रखते हुए एक अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भांडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस रैकेट के मास्टरमाइंड और फर्जी दस्तावेजों पर विदेश जा रहे यात्री सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार मास्टर माइंड जाकिर युसुफ शेख गत 25 सालों से इस रैकेट को चला रहा है। इस कबूतरबाजी के रैकेट में उसके साथ मुश्ताक उर्फ जमील पिक्चरवाला, इंतियाज अली शेख उर्फ राजू भाई, संजय दत्ताराम चव्हाण शामिल है। वहीं रवि रमेशभाई चौधरी वह यात्री है जिसने इनसे फर्जी दस्तावेज बनवाकर विदेश जाने की जुगत में था। इनका एक साथी नारायणभाई चौधरी फरार है।
मास्टरमाइंड जाकिर युसूफ शेख इस धंधे से कमाई हुई रक से मुंबई में मराठी फिल्मों को प्रोड्यूस कर काली कमाई को सफेद किया करता था। हाल ही में इसने ऑनलाइन चैनल नेटफ्लिक्स के कई वेब सीरीज को प्रोड्यूस किया है। पुलिस अधिकारी के अनुसार तत्काल पुलिस के इनकी तीन दिनों की रिमांड मिली है। अब पुलिस इस दौरान आरोपियों से इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने जुट गई है। गौरतलब हो कि आईजीआई पुलिस ने गत दो माह के अंदर इन चारों सहित सात फर्जी एजेंट और 9 यात्रियों को गिरफ्तार कर चुकी है।

डीसीपी तनु शर्मा ने बताया कि 6 जून को गुजरात के निवासी रवि रमेशभाई को कुवैत से डिपोर्ट कर भारत भेजा गया था। वहां जाने पर जांच में उनका पासपोर्ट फर्जी निकला था, जो उन्हें मुंबई के एक एजेंट ने उपलब्ध कराने के बाद फर्जी वीजा के साथ वहां भेजा गया था। डिपोर्ट कर यहां आने के बाद इमिग्रेशन विभाग की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी यात्री रवि रमेशभाई को गिरफ्तार कर लिया था। साथ ही इस मामले की जांच एसीपी वीरेन्द्र मोर की देखरेख में इंस्पेक्टर सतीश कुमार और अनुज शर्मा ने शुरू की थी। पूछताछ में रवि ने पुलिस को बताया कि वह एजेंट ज़ाकिर, नारायणभाई और मुश्ताक उर्फ जमील पिक्चरवाला के संपर्क में आया यह गुजरात और मुंबई के रहने वाले हैं।

उसे नारायणभाई ने बताया कि वह 65 लाख रुपये में पासपोर्ट और वीजा दिलवाकर उसे अमेरिका भिजवा देगा। सौदा तय होने पर उसने नारायणभाई को 15 लाख रुपये एडवांस दिए। उसने अपनी फोटो और हस्ताक्षर मुंबई के ज़ाकिर और जमील को वाट्स एप पर भेजे जिससे उसका फर्जी पासपोर्ट तैयार हो गया। इसके बाद उसके पासपोर्ट पर नीदरलैंड का फर्जी वीजा लगाया गया। उसे अमेरिका पहुंचने पर बकाया 50 लाख रुपये देने के लिए एजेंटों ने कहा था।
जब पुलिस ने मिली जानकारी के आधार पर जांच शुरू की तो पता चला कि रैकेट से जुड़े सभी एजेंट अंडरग्राउंड हो गए हैं। पर टीम ने उन्हें ट्रैक करना जारी रखा और 3 अगस्त को आरोपी जमील को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया, उसके पास से चार मोबाइल बरामद हुए। उसी की निशानदेही पर पुलिस ने रैकेट के मास्टरमाइंड ज़ाकिर शेख को मुंबई से 16 अगस्त को दबोच लिया। जाकिर शेख ने पुलिस को बताया कि उसके द्वारा बनाए जाने वाले पासपोर्ट की कॉपी, वीजा स्टीकर व अन्य दस्तावेज उसे राजू भाई उर्फ इंतियाज अली उपलब्ध कराता है। इसके आधार पर पुलिस ने छापा मारकर इंतिजाय और उसके साथी संजय दत्ताराम को गिरफ्तार कर लिया। पता चला कि यह गिरोह प्रमुख रूप ये दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, पंजाब और महाराष्ट्र में रैकेट सक्रिय था। वहीं ऐसे लोग जो विदेश जाने के इच्छुक होते थे उन्हें इनके एजेंट इनसे संपर्क कराया करते थे।

अब तक एक हजार से अधिक लोगों को सफलतापूर्वक भेज चुके हैं विदेश

पुलिस को बताया है कि इस रैकेट के माध्यम से लोगों को फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेज उपलब्ध कराकर 1 हजार से अधिक लोगों को सफलतापूर्वक विदेश भेज चुके हैं। ये लोग एक शख्स से दस्तावेज तैयार कराने और विदेश भेजने के लिए 50 से 70 लाख रुपये लेते थे। पुलिस की रडार में आने से बचने के लिए आरोपी जाकिर शेख अंतरराष्ट्रीय नंबर से चलाए जा रहे व्हाट्सएप से अपने ग्राहकों और रैकेट के सदस्यों से संपर्क में रहता था। वह ज्यादातर अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा के नंबरों उपयोग किया करता था। साथ ही लगातार मोबाइल भी बदला करता था, जिससे मोबाइल के आइईएमआइ नंबर से उसे ट्रैक न किया जा सके। रवि के पकड़े जाने के बाद गत दो महीने में ही आरोपी ने 89 मोबाइल बदले हैं।

मात्र 30 मिनट में उपलब्ध करा देते थे फर्जी पासपोर्ट

प्राथमिक पूछताछ में पता चला कि इस रैकेट के लोग मात्र 30 मिनट के अंदर फर्जी पासपोर्ट और कुछ चुनिंदा देशों के वीजा उपलब्ध करा दिया करते थे। ज्यादातर को ये लोग अमेरिकी वीजा उपलब्ध कराने का झांसा दिया करते थे।

जाकिर शेख पहले है छह मामलों में आरोपी

गिरोह का मास्टर माइंड जाकिर शेख मूल रूप से मुंबई का रहने वाला है। वह गत 25 वर्षों से फर्जी पासपोर्ट एवं फर्जी वीजा का काम कर रहा है। उसके खिलाफ पूर्व में छह मामले दर्ज हैं। उसने मुंबई में एक दफ्तर खोल रखा था जहां पर वह फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। वह लोगों को अमेरिका, मैक्सिको, आस्ट्रेलिया, फ्रांस, कनाडा आदि जगह भेजता था। इसके खिलाफ आईजीआई एयरपोर्ट पर चार, चाणक्यपुरी में एक और मुंबई में एक प्राथमिकी दर्ज है।

इनसे बरामद हुए दस्तावेज

- 325 फर्जी भारतीय व 4 अंतरराष्ट्रीय पासपोर्ट
-1200 रबड़ स्टैंप (अलग-अलग देशों के, विभिन्न देशों के दूतावास, विभिन्न देशों के एयरपोर्ट की)
-175 फर्जी वीजा (अमेरिका के 21, शेंगेन के 17, यूनाइटेड किंगडम के 16, ऑस्ट्रेलिया के 13, चीन के 25, इटली के 4, तुर्की के 10, थाईलैंड के 2, स्विट्जरलैंड के 6, फ्रांस के 5, मलेशिया के 5, संयुक्त अरब अमीरात के 4, इंडोनेशिया के 1, दक्षिण अफ्रीका के 15, मेक्सिको के 30, कनाडा के 12, सिंगापुर के 3)
-75 भारतीय पासपोर्ट के कवर
-11 भारतीय अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट
-11 आधार कार्ड
-12 कलर प्रिंटर
-22 फर्जी पासपोर्ट बनाने के प्रयोग में आने वाले उपकरण    
-400 प्लास्टिक ब्लैंक कार्ड, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए 

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