Thursday, Jan 23, 2020
professionals appointed for cbi insolvency process

दिवाला समाधान प्रक्रिया के लिए नियुक्त पेशेवर CBI के हत्थे चढ़ा

  • Updated on 1/14/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। सीबीआई (CBI) ने एनसीएलटी, मुंबई (Mumbai) द्वारा नियुक्त एक दिवालियापन समाधान पेशेवर और एक अन्य व्यक्ति को एक ठेकेदार से आपराधिक कार्रवाई की धमकी देकर कथित रूप से 3.5 लाख रुपये की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी है। यह संभवत: अपने किस्म का पहला अपराध है। 

ठेकेदार और उसकी पत्नी हैदराबाद की कंपनी एफआरटेक में कंसल्टेंट
अधिकारियों ने बताया कि समाधान पेशेवर अरुण मोहन और उसके एक मित्र परेश कुमार को हिरासत में ले लिया है। परेश कुमार दिल्ली की एक कंपनी मल्टीमैक्स एसेट्स रीकंस्ट्रक्शन प्रा लि का मुख्य कार्यपालक अधिकारी है। आरोप है कि इस मामले में 3.5 लाख रुपये की रिश्वत ली गयी जबकि मांग 5 लाख रुपये की थी। सीबीआई के अनुसार वह ठेकेदार और उसकी पत्नी हैदराबाद की कंपनी एफआरटेक में कंसल्टैंट थे। कंपनी दिवाला संहिता के तहत दिवालिया घोषित कर दी गयी है।

ठेकेदार ने अपने बकाए का मुद्दा समाधान पेशेवर के सामने उठाया
जब ठेकेदार और उसकी पत्नी ने मार्च-नवंबर 2017 के दौरान ईमेल के जरिए अपने काम के बकाए का 18 लाख रुपये मांगा था। कंपनी ने 15.20 लाख रुपये दे दिए थे और 2.8 लाख रुपये बकाया रह गए थे। जब कंपनी दिवाला हो गयी तो उसके रिण समाधान के लिए एनसीएलटी ने मोहन को पिछले साल नवंबर में दिवाला समाधान पेशेवर (आईआरपी) नियुक्त किया। ठेकेदार ने अपने बकाए का मुद्दा समाधान पेशेवर के सामने उठाया।

मोहन ने उससे उसकी पत्नी के अनुबंध, काम और भुगतान आदि के बारे में और ब्योरा मांगा था। उसने ब्योरा दे भी दिया सीबीआई के अनुसार मोहन ने 30 दिसंबर को ठेकेदार को फोन कर उसकी पत्नी के खिलाफ आपराधिक मामला दायर करने की धमकी दी। साथ ही उसने उससे लक्ष्मी नगर इलाके में परेश कुमार के कार्यालय में मिलने को कहा। इस मुलाकात में उसने आपराधिक कार्रवाई से बचाने के लिए ठेकेदार से पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी।

इस मुलाकात में मोहन का वह मित्र भी वहां था। ठेकेदार ने मोहन के साथ फोन पर हुए वार्तालाप को रिकार्ड कर लिया था और सीबीआई से शिकायत की थी। सीबीआई ने उसकी पुष्टि करते हुए गुपचुप अभियान चला कर परेश कुमार के साथ हो रही बातचीत की पुष्टि की। इसमें रिश्वत की मांग घटा कर 4 लाख रुपये कर दी गयी थी।  

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