Sunday, Oct 01, 2023
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संजीव जीवा हत्याकांड: अदालत में सुरक्षा संबंधी चूक पर ध्यान केंद्रित करेगी SIT

  • Updated on 6/8/2023

नई दिल्ली/एजेंसी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक अदालत में दिनदहाड़े हुए सनसनीखेज संजीव जीवा हत्याकांड में विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच का दायरा अदालत में सुरक्षा में हुई लापरवाही पर केंद्रित रहेगा। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा' को बृहस्पतिवार को बताया कि एसआईटी यह पता लगाने पर ध्यान केंद्रित करेगी कि कचहरी परिसर में मेटल डिटेक्टर काम कर रहे थे या नहीं और अगर वे काम कर रहे थे तो आरोपी हथियार लेकर अदालत में कैसे घुस आया और यदि वे नहीं काम कर रहे थे तो इसका क्या कारण था।

उल्लेखनीय है कि गैंगस्टर नेता मुख्तार अंसारी के कथित सहयोगी संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की बुधवार को लखनऊ अदालत परिसर के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हमले में दो अन्य लोग घायल हुए हैं। पुलिस द्वारा गिरफ्तार कथित हमलावर की पहचान विजय यादव (24) के रूप में की गई है जो जौनपुर जिले के केराकत पुलिस थाना अंतर्गत सर्की सुल्तानपुर गांव का निवासी है। पुलिस ने बताया कि विजय को घटनास्थल पर ही पकड़ लिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमलावर ने वकील की पोशाक पहन रखी थी और उसने छह गोलियां चलाईं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी के पास से बरामद विदेशी पिस्तौल उसे कहां से मिली और जीवा की हत्या का कारण क्या है। एसआईटी दल जांच के तहत बृहस्पतिवार देर शाम उस अदालत परिसर पहुंचा जहां बुधवार को हत्याकांड हुआ था और जीवा की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से विस्तृत पूछताछ की गई। एसआईटी दल ने घटनास्थल का मुआयना किया ।

हत्याकांड के बाद बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया था और एसआईटी को एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने को कहा गया है। इस गोलीबारी में जीवा को अदालत में लेकर आए पुलिस दल के दो सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं, जिसमें से एक अब भी किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय में भर्ती है जबकि एक को छुट्टी दे दी गयी है।

विजय यादव से पूछताछ करने वाले एक अन्य अधिकारी ने बताया कि आरोपी के कब्जे से महंगी विदेशी पिस्तौल बरामद हुई है जिसके एक कारतूस की कीमत ही डेढ से दो हजार रुपये है। उन्होंने कहा कि जानकारी के अनुसार, विजय एक गरीब परिवार से है और पुलिस को संदेह है कि आरोपी द्वारा इस पिस्तौल का स्वयं प्रबंध किए जाने की संभावना नहीं है। मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य अधिकारी ने बताया कि विजय से पुलिस के आला अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को किसी अज्ञात स्थान पर पूछताछ की।

विजय यादव के पिता श्यामा यादव ने बुधवार को बताया था कि उसका बेटा मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करता था और बाद में वह नौकरी छोड़कर घर चला आया था। श्यामा ने बताया था कि नौकरी छोड़ने के डेढ़ महीने बाद विजय रोजगार की तलाश में लखनऊ चला गया था जहां वह प्लंबर का काम करता था। अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) (तकनीकी) मोहित अग्रवाल, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी नीलाब्जा चौधरी और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) (अयोध्या) प्रवीण कुमार एसआईटी के सदस्य हैं। जीवा (48) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का निवासी था। वह भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) विधायक कृष्णानंद राय और उत्तर प्रदेश में भाजपा के मंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी की हत्या का आरोपी था। उस पर हत्या, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के दो दर्जन मामले दर्ज थे। 

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