Wednesday, Oct 16, 2019
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दिल्ली महिला आयोग ने स्पा सेंटरों में सेक्स रैकेट रोकने के लिए दिए अहम सुझाव

  • Updated on 10/10/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली में स्पा और मसाज पार्लरों में वेश्यावृत्ति के रैकेट को बंद करने की मांग करते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल को विस्तृत सुझाव भेजे हैं। दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली में किये गए निरीक्षण के दौरान पाया कि दिल्ली के विभिन्न स्थानों में कई स्पा केंद्रों में बड़े पैमाने पर वेश्यावृत्ति के रैकेट चल रहे हैं। 

रिपोर्ट में बताया है कि कैसे अधिकारियों ने दिल्ली में स्पा और मसाज केंद्रों की अनियंत्रित बढ़ोतरी की अनुमति देकर शहर में सैकड़ों स्थानों पर रेड लाइट एरिया का विस्तार करने में सहायता की है। आयोग ने यह देखा है कि जबकि एनसीआर के शहरों - गाजियाबाद, गुड़गांव, नोएडा और मुंबई, बंगलूरु और अन्य शहरों में पुलिस स्पा केंद्रों में चल रहे वेश्यावृत्ति के रैकेट के खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रही है, मगर दिल्ली पुलिस इस मामले में पूरी तरह से चुप है।

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आयोग के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली में स्पा सेंटरों के खिलाफ 5 एफआईआर दर्ज की गई हैं लेकिन पुलिस ने अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है। इससे स्पा मालिकों को प्रोत्साहन मिल रहा है जो बार-बार आयोग के अधिकारियों और आयोग की अध्यक्षा को धमकी दे रहे हैं लेकिन फिर भी दिल्ली पुलिस ने आयोग की शिकायत पर कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की है। स्पा मालिकों का दिल्ली नगर निगम, दिल्ली पुलिस और अन्य विभागों में स्वार्थी तत्वों के साथ गहरा गठजोड़ दिखाई देता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्पा के कुछ मालिकों ने स्पा सेंटरों में चल कर रहे सेक्स रैकेट के खिलाफ आयोग द्वारा की गयी कार्रवाई के खिलाफ अदालत में तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर एक पिटीशन दायर की है। याचिकाकर्ताओं में से एक प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल का एक नेता है। आयोग को कई याचिकाकर्ताओं द्वारा संचालित स्पा सेंटरों के खिलाफ गंभीर शिकायतें भी मिली हैं।

आयोग को बताया गया कि तीनों नगर निगमों के अंतर्गत दिल्ली में कुल 399 स्पा हैं जिनके पास लाइसेंस हैं । इसके विपरीत Justdial  ने आयोग को बताया है कि दिल्ली में 5000 से अधिक स्पा और मालिश केंद्र पंजीकृत हैं। Justdial.com द्वारा दी गयी सूचना से यह चिंता होती है कि राजधानी में हजारों स्पा अवैध रूप से चल रहे हैं।

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दिल्ली महिला आयोग द्वारा इस संबंध में की गयी शुरूआती रिसर्च के आधार पर आयोग ने उपराज्यपाल को विस्तृत सुझाव भेजे हैं। इन सुझावों में दिल्ली में स्पा सेंटर के पंजीकरण और संचालन की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के लिए विस्तृत सुरक्षा उपाय शामिल हैं। सिफारिशों की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:-

- स्पा और मसाज केंद्रों में सभी श्रेणियों में क्रॉस-जेंडर मसाज पर पूर्ण प्रतिबंध जैसा कि गोवा में है। स्पा केंद्रों में होने वाली वेश्यावृत्ति गतिविधियों को रोकने के लिए यह एक महत्वपूर्ण उपाय है।


- दिल्ली में अवैध रूप से चल रहे सभी स्पा सेंटरों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाना चाहिए और स्पा सेंटरों के लाइसेंस के लिए मजबूत और कड़े तंत्र को अपनाने तक किसी और स्पा को नया लाइसेंस नहीं दिया जाना चाहिए।

- लाइसेंसिंग तंत्र को बदला जाना चाहिए और स्पा का लाइसेंस लेने के लिए पुलिस आयुक्त से एनओसी प्राप्त किया जाना चाहिए। आवेदक को शपथपत्र नोटरी करवाना चाहिए कि आवेदक वेश्यावृत्ति और तस्करी सहित किसी भी अवैध गतिविधि के लिए परिसर का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा। यह सुझाव दिया गया कि परिसर के सत्यापन के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाना चाहिए।

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- स्पा केंद्रों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के क़ानून के तहत आंतरिक शिकायत समिति का गठन होना चाहिए । समितियों में शामिल बाहरी सदस्यों को प्रसिद्ध गैर सरकारी संगठनों से होना चाहिए।


- स्पा में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षिक और तकनीकी योग्यता होनी चाहिए और पुलिस सत्यापन के बाद ही कर्मचारियों को  स्पा में नियुक्त किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए यह सुझाव दिया गया है कि कर्मचारियों को व्यावसायिक चिकित्सा / योग / एक्यूपंक्चर आदि में कम से कम 1 वर्ष का तकनीकी प्रशिक्षण होना चाहिए जैसा कि तमिलनाडु में यह प्रावधान है।

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- ग्राहकों की जानकारी और आईडी कार्ड का विवरण रखा जाये, सीसीटीवी कैमरे लगवाये जाएँ, मालिश के दौरान कमरे खुले रहें, स्पा के खुलने का समय नियमित किया जाये। 

- दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा ने उपराज्यपाल से अनुरोध किया है कि एमसीडी, दिल्ली पुलिस और दिल्ली महिला आयोग की संयुक्त टीमों का गठन किया जाए ताकि स्पा में चल रही गतिविधियों की जांच के लिए सभी मौजूदा स्पा सेंटर का निरीक्षण किया जा सके।

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- दिल्ली महिला आयोग ने यह भी मांग की है कि स्पा केंद्रों में वेश्यावृत्ति के रैकेट चलाने में दिल्ली पुलिस, एमसीडी और राजनेताओं की भूमिका की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय और एक गहन जांच की जानी चाहिए। 

अंत में, यह महत्वपूर्ण है कि मौजूदा कानूनों में लाइसेंसिंग प्रावधानों में बदलाव किया जाए जिससे लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने और बिना लाइसेंस वाले सेंटरों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सके और उन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया जाए ।

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