Thursday, Aug 11, 2022
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सडक़ हादसों जांच में तेजी लाएं जांच अधिकारी - पुलिस कमिश्नर

  • Updated on 6/11/2022

राजधानी ने प्रत्येक वर्ष होते हैं 5 हजार से अधिक सडक़ हादसे
- कई मामलों में एक साल बाद भी कोर्ट में दाखिल नहीं हुए रिपोर्ट

नई दिल्ली/मुकेश ठाकुर।


 राजधानी की सडक़ों पर न ही गाडियों की भीड़ में कमी आ रही है और न ही सडक़ों पर होने वाले हादसों में। दूसरी ओर इन हादसों के बाद पुलिस द्वारा की जाने वाली जांच के बाद यहां के कोर्ट में जमा की जाने वाली लंबित रिपोर्ट की संख्या में भी लगाता बढ़ोतरी हो रही है। गत दिनों दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा की गई जांच में लंबित रिपोर्ट की संख्या नाराजगी जताई। खासकर कई ऐसे मामलों की भी रिपोर्ट अदालत में दायर नहीं हुए थे, जिसके बीते   हुए एक साल से अधिक हो चुके थे। उन्होंने राजधानी के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इसकी क्लोज मॉनिटरिंग करते कोर्ट में जांच रिपोर्ट दायर किए जाने की गति में तेजी लाने का आदेश जारी किया है।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार राजधानी में प्रत्येक वर्ष 5 हजार से ज्यादा सडक़ हादसे होते हैं। होने वाले इन हादसों में औसतन 15 सौ से ज्यादा लोग अपनी जान गवां बैठते हैं, वहीं करीब चार हजार से ज्यादा लोग घायल हो जाते हैं। इनमें 30 से 35 फीसदी गंभीर रूप से घायल और दिव्यांग हो जाते हैं। होने वाले इन सडक़ हादसों के मामलों में दिल्ली पुलिस की जांच टीम सनहा रिपोर्ट दर्ज करने के बाद उसकी जांच शुरू करती है। हाल ही में दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने विभिन्न मामलों की पुलिस द्वारा की जाने वाली जांच की कोर्ट में दायर की जाने वाली लंबित जांच रिपोर्ट की स्थिति पर वरिष्ठ अधिकारियों से जांच करवाई थी। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि वर्तमान में कोर्ट में सबसे अधिक सडक़ हादसों के मामले लंबित है, जिसमें से कई एक साल से भी ज्यादा समय से इसलिए लंबित है कि जांच अधिकारी ने अदलात में रिपोर्ट दायर नहीं की है। इसकी वजह से जहां पीडि़तों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो कई मामलों में उन्हें मुआवजा तक नहीं मिल पा रहा है। ऐसे मामलों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह एक्सीडेंट के मामलों की जांच में तेजी लाएं। सडक़ हादसा होने पर एक तय समय के भीतर डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट को अदालत के समक्ष दाखिल किया जाए ताकि उस पर संज्ञान लेकर अदालत अपनी कानूनी कार्रवाई आगे कर सके। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अपने क्षेत्र में इस तरह के केस पर खासतौर से निगरानी रखें। उन्होंने अगली बैठक में इस पर विस्तार से रिपोर्ट मांगी है ताकि पता चल सके कि अधिकारियों की तरफ से क्या कदम उठाए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना सडक़ हादसों की जांच के लंबित मामलों से नाराज हैं। यह भी एक कारण है कि दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस के अलग थाने खोलने पर विचार किया जा रहा है। उनका मानना है कि इससे इन मामलों की जांच समय पर हो सकेगी और अदालत में उससे संबंधित तमाम जानकारी जल्द मुहैया कराई जा सकेगी।
 

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