Monday, Sep 26, 2022
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the soul trembled after seeing the people buried under the wall, efforts to help failed

दीवार के नीचे दबे लोगों को देखकर कांप गई रूह, मदद की कोशिश रही नाकाम

  • Updated on 9/20/2022

नई दिल्ली,(जुनेद अख्तर):दिल्ली से सटे नोएडा में सेक्टर 21 जलवायु विहार सोसायटी की दीवार गिरने के दौरान वहां तीन लोग मजदूरों की मदद को पहुंचे थे। इनमें एक सोसायटी में काम करने वाले कारपेंटर थे दूसरे प्रेस करने वाले व्यक्ति और तीसरे शख्य पेंटर थे। तीनों ने बताया कि हादसे का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए थे। दीवार के नीचे दबे लोगों को देखकर उनकी रूह कांप गई थी। उन्होंने किसी तरह दीवार हटाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। 

जलवायु विहार सोसायटी में कारों की सफाई और प्रेस का काम करने वाले राकेश सिंह कनौजिया ने बताया कि घटना के समय वह कारों की सफाई कर रहे थे। तभी उन्होंने चीख-पुकार की आवाज सुनी। वह तुरंत दीवार की तरफ दौड़े। उन्होंने देखा कि कुछ मजदूर दीवार के नीचे दबे हैं। जबकि दो लोग दीवार हटाने की कोशिश कर रहे हैं। वो भी दीवार को हटाने में जुट गए। किसी तरह उन्होंने आवाज लगाकर सोसायटी में काम करने वाले कुछ और लोगों को बुलाया। दीवार को हटाने की काफी कोशिश की गई, लेकिन वे नाकाम रहे। दीवार बहुत भारी थी। जेसीबी के आने के बाद ही दीवार को हटाया जा सका। 

मलबे के नीचे दबे मजदूर कुछ देर तक लगाते रहे मदद की गुहार 
घटनास्थल के पास ही एक फ्लैट में कारपेंटर का काम रहे संजय कुमार ने बताया कि दीवार के गिरने की आवाज सुनकर वो फ्लैट की बालकनी में पहुंचे। उन्होंने देखा कि मजदूर मलबे में दबे। वो तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने में जुट गए। मलबे में दबे कुछ मजदूर मदद की गुहार लगा रहे थे। लेकिन थोड़ी देर बाद आवाज आना बंद हो गई। संजय ने बताया कि किसी तरह एक मजदूर को निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया था, लेकिन उसकी मौत हो चुकी है। इसके बाद पुलिस द्वारा जेसीबी बुलाई गई और दो मजदूरों को निकाला गया, लेकिन उनकी भी मौत हो चुकी थी। 

मलबे में दबे कुछ मजदूरों के दिख रहे थे हाथ-पैर
सोसायटी में ही पेंटर का काम करने वाले सिकन्दर यादव ने बताया कि उनका सोसायटी में ही पेंटर का काम चलता है। घटना के दौरान वे पास ही एक फ्लैट में पेंट का काम कर रहे थे। उन्होंने अचानक शोर की आवाज सुनी, बाहर निकलकर देखा तो मजदूर मलबे में दबे हैं। वो तुरंत मौके पर पहुंचे और मजदूरों की निकालने की कोशिश में जुट गए। कुछ मजदूरों के हाथ और पैर दिख रहे थे। उन्होंने खींचने की कोशिश की, लेकिन मलबे का वजन होने के कारण उन्हें निकाला नहीं जा सका। जेसीबी के आने के बाद ही उन्हें बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया।  

मजदूर संजीव की जुबानी हादसे की कहानी
मंगलवार सुबह नौ बजे सब अपने काम करने के लिए पहुंच गए थे। उस वक्त भी ठेकेदार को बोला गया था कि बगल की दीवार झुकी थी। ठेकेदार बोला कि ऐसा करो तुम अपना काम करो। जो होगा हम देख लेंगे। इसके बाद मजदूर अपने काम कर दुबारा लग गए। अचानक साढ़े नौ बजे दीवार ढह गई और पांच लडक़े उसमें दब गए। चीख पुकार मच गई। सूचना पाकर मौके पर कुछ ही देर में पुलिस पहुंच गई। पुलिस वाले खुद मलबा हटाने में लग गए। इसके बाद फायर की गाड़ी आई और उसके भी कर्मचारी जी-जान से मजदूरों को बचाने के लिए मलबा हटाने की हर संभव कोशिश कर रहे थे। एक एक कर पांच लोगों को मलबे के नीचे से निकाला और अस्पताल ले गए लेकिन उनमें से चार नहीं बच पाए। मजदूरी कर रहे संजीव की जुबानी है। जो हादसे के बाद अपने साथियों को बचाने के लिए जद्दो जहद करता रहा। उसे अफसोस है कि अपने साथियों को नहीं बचा सका। दीवार के नीचे दब कर मरा अमित तो एक दिन पहले ही आया था। 

पोस्टमार्टम हाउस पर एम्बूलेंस को लेकर मृतकों के परिजनों ने किया हंगामा 
सेक्टर 94 स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर मजदूरों का शव लेने पहुंचे परिजनों के साथ एक डॉक्टर द्वारा दुव्र्यव्यहार किया गया। परिजनों का आरोप है कि उनसे डॉक्टर ने कहा कि अपनी एम्बूलेंस लेकर आओ और शवों को लेकर जाओ। यहां से एम्बूलेंस नहीं मिलेगी। इस पर परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने इस बारे में पुलिस अधिकारियों को बताया। पुलिस अधिकारियों ने सीएमओ से बात की। सीएमओ के हस्ताक्षेप करने पर शवों को ले जाने के लिए एम्बूलेंस उपलब्ध कराई गई। जिसके बाद परिजन शवों को लेकर अपने गांव रवाना हो गए। 
 

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