Friday, Sep 30, 2022
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देश में होती है रोजाना 100 करोड़ की ठगी, बरतें ये सावधानियां

  • Updated on 8/19/2022

नई दिल्ली/ संजीव यादव। आए दिन आप साइबर फ्रॉड के जरिये किसी के बैंक खाते से पैसे निकलने, किसी के कार्ड को क्लोन कर उसकी जमापूंजी गायब हो जाने की खबरें सुनते हैं, लेकिन क्या कभी सोचा है कि हर रोज कितना फ्रॉड होता है? कैसे होता है और इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं?

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत को हर रोज औसतन करीब 100 करोड़ रुपयों की ठगी सिर्फ बैंक फ्रॉड या स्कैम के जरिए की जाती है। 2771 ऐसी वेबसाइटों की पहचान दिल्ली साइबर सेल ने हाल में की, जिन पर जाते ही अगर आपके मोबाइल- ईमेल पर अगर आपकी बैंकिग डिटेल है और पासवर्ड आपने सेव किए थे तो आप कंगाल हो सकते हैं।

नतीजतन वेवजह किसी भी साइट पर न जाएं। एक्सपर्टों के मुताबिक अधिकांश वो लोग इसका शिकार होते हैं तो अनसिक्योर वेबसाइट्स विजिट करते हैं। आपकी इसी एक्टिविटी को हैकर्स रिकॉर्ड करते हैं। 

अकाउंट और कार्ड पर हैकरों के अटैक के हाईटेक तरीके 

सर्च इंजन के जरिए:

अपने बैंक, इंश्योरेंस कंपनी, आधार अपडेशन सेंटर इत्यादि के कस्टमर केयर के डिटेल्स के लिए गूगल जैसे किसी सर्च इंजन का सहारा लेते हैं। फर्जीवाड़ा करने वाले ठग वहां ओरिजिनल कांटैक्ट डिटेल्स के सथान पर अपना निजी डिटेल्स अपलोड कर देते हैं। ऐसे में अगर आपने इन नंबरों पर कॉल करते हैं तो समझिए कि आप ठगों से बात कर रहे हैं और वे आपकी गोपनीय जानकारियों को आपसे ले लेते हैं। बाद में वे आपका खाता खाली कर देते हैं। 

क्यूआर कोड स्कैन:

कभी- कभी हैकर एसएमएस या अन्य टेक्स्ट के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं और फिर उन्हें अपने फोन पर एक एप के जरिए क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड स्कैन करने का झांसा देते हैं, ऐसे क्यूआर कोड्स को स्कैन करने के बाद हैकर आपके खाते से पैसे निकालने के लिए अधिकृत हो जाते हैं और आप ठगी का शिकार होते हैं। 

स्क्रीन शेयरिंग एप/रिमोट एक्सेस:

ठगी करने वाले किसी शख्स को स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करने को कहते हैं। इस एप के जरिए उनकी पहुंच आपके मोबाइल/लैपटॉप तक हो जाती है और फिर उनके पास आपके बैंकिंग लेन-देन से जुड़ी गोपनीय जानकारियां भी पहुंच जाती हैंं। 

ऑनलाइन सेल्स प्लेटफॉर्म :

शातिर ठग किसी ऑनलाइन सेल्स प्लेटफॉर्म पर खरीदार बनकर आते हैं, इसमें से अधिकांश बताते हैं कि वे डिफेंस से हैं और उनकी पोस्टिंग दूर- दराज के इलाकों में हुई है। खरीदारी के बाद वे भुगतान करने के बजाय यूपीआई पर ‘रिक्वेस्ट मनी’ फीचर का इस्तेमाल करते हैं और फिर वे सेलर से यूपीआई पिन डालकर रिक्वेस्ट को अप्रूव करने को कहते हैं। सेलर के पिन भरते ही पैसे ठगी करने वाले के खाते में ट्रांसफर हो जाते हैं।

कार्ड क्लोन या हैकिंग:

हैकर्स ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों को निशाना बनाते हैं। हैकर्स ग्राहकों को कैशबैक या बंपर डिस्काउंट का लालच देते हैं, जिसके चलते वह सारी निजी जानकारी (डेबिट या क्रेडिट कार्ड) हैकर्स के साथ साझा कर देते हैं। इसके बाद हैकर्स उनके खाते से सारे पैसे उड़ा लेते हैं।

जूस जैकिंग:

किसी मोबाइल के चार्जिंग पोर्ट के जरिए भी आपके खाते में सेंध लग सकती है। ठग सार्वजनिक स्थानों के चार्जिंग पोर्ट्स में वायरस डाल देते हैं, जिससे चार्जिंग के लिए लगने वाले मोबाइल पर उनका कंट्रोल हो जाता है। ठग ई-मेल, एसएमएस, सेव किया हुआ पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियों को चुराकर आपके साथ फ्रॉड करते हैं। 

ऑनलाइन ट्राजेंक्शन :

हैकर्स इस तरीके के तहत ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से कॉल करने का दावा करते हैं। इसके बाद ग्राहक को रिफंड का लालच देकर उसकी निजी जानकारी हासिल कर लेते हैं। जानकारी हाथ लगते ही हैकर्स कुछ मिनटों में ग्राहक के अकाउंट से लाखों रुपए उड़ा लेते हैं।

कुछ सावधानियां बरतकर फ्रॉड से बचें

- वेवजह किसी भी साईट की सर्फिग न करें
- लैपटॉप व कम्यूटर के पासवर्ड को वीक न रखें
- बैकिंग से जुड़ी डिटेल व पासवर्ड एक जगह न रखें
- अपने बैंक के मैसेज और एडवाइजरी का लगातार पालन करें

- अंजान कॉल और एसएमएस को न खोलें और न ही रिप्लाई करें 
- अनसिक्योर इलाकों के वाईफाई नेटवर्क का प्रयोग करने से बचें
- केवल सैफ साइटों पर ही सर्फिंग करें जिनपर एचटीटीपीएस लिखा हो 
- जिस साइट पर लाल रंग का क्रॉस दिखाई दे समझो वह सिक्योर नहीं है

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