Sunday, Mar 24, 2019

रिलायंस Jio के नाम पर हजारों लोगों से की ठगी, सरगना बिहार से गिरफ्तार

  • Updated on 3/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जिला साइबर सेल और डाबड़ी थाना की संयुक्त टीम ने तीन ऐसे ठगों को पकड़ा है, जो रिलायंस जियो कंपनी की फर्जी वेबसाइट बना कर लोगों से उनके यहां टावर लगवा देने के नाम पर ठगी करते थे। इन लोगों ने दिल्ली ही नहीं देश भर के एक हजार से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया।

ये ऑनलाइन फॉर्म भरने वाले लोगों से टावर लगवाने के लिए ऑनलाइन 14 हजार 413 रुपये ऑनलाइन जमा करवा लेते थे। गिरफ्तार आरोपी संजय कुमार, संतोष कुमार और अर्जुन प्रसाद के पास से पुलिस ने 12 अलग-अलग बैंकों के डेबिट कार्ड, पांच मोबाइल फोन, 9 सिम, 3 बैंक एकाउंट ओपनिंग किट व अन्य कागजात बरामद की है।

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डीसीपी अंटो अल्फोंस ने बताया कि कुछ दिनों पहले लोकेंद्र नामक शख्स ने डाबड़ी थाने में एक बेव साइट के माध्यम से मोबाइल टावर लगवाने के नाम ठगी की शिकायत की थी। इसमें बताया था कि रिलायंस जियो टावर डॉट नेट नामक वेब साइट पर टावर लगवाने को लेकर फॉर्म जारी किया था। उन्होंने भी फॉर्म भरे थे।

भरने के बाद उनके पास कॉन्फरमेंशन के साथ ही सेक्योरिटी मनी के रूप में 14 हजार 413 रुपये की मांग की गई थी। उन्होंने बताए हुए एकाउंट में वह रुपये जमा करा दिए थे। ऑनलाइन जमा कराने पर उसमें रिसीवर का नाम अर्जुन प्रसाद आया था। इससे उन्हें संदेह हुआ और जब संपर्क किया तो कोई जवाब नहीं मिला। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मामले को साइबर सेल के हवाले कर दिया। 

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साइबर सेल ने वेबसाइट बनाए गए डोमिन की जांच कर आईपी एड्रेस की तलाश शुरू की। उसी तलाश में टीम को उस एकाउंट की भी जानकारी मिली जिसमें रुपये जमा कराए गए थे। साथ ही पीड़ित से बात किए गए नंबर के सीडीआर और आईएमईआई नंबर को ट्रैक किया गया। इसके आधार पर पुलिस ने आरोपी संतोष और अर्जुन को मनेसर से और इस वारदात के मास्टरमाइंड संजय को नालंदा बिहार से गिरफ्तार कर लिया। 

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आईटी डिप्लोमा होल्डर है मास्टरमाइंड 
पूछताछ में संजय ने बताया कि आईटी डिप्लोमा के बाद वह करीब छह साल तक अलग-अलग कंपनियों में काम करता रहा। इसके बाद उसने खुद का क्लाउड टेलीफोनी कंपनी खोलने की सोची पर उसके लिए 20 लाख की जरूरत थी। इसी दौरान उसने पाया कि एक ठग ने टावर लगवा देने के नाम पर कुछ ही समय में लाखों रुपये जमा कर लिए थे।

इसी को देखते हुए उसने फर्जी वेबसाइट बनाया। यही नहीं उसमें विशेष सॉफ्टवेयर भी इंस्टौल किया। उसमें वर्चुअल नंबर डाले, जिसपर फोन करने पर वह कंप्यूटर खुद जवाब देती थी। इसके लिए उसमें अलग अलग भाषाओं के रिकॉर्ड भी थे। संतोष और अर्जुन फर्जी खाता उपलब्ध कराता था।

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