Friday, Sep 30, 2022
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लूट व हत्या के दो आरोपी सबूतों के अभाव में बरी

  • Updated on 8/1/2022

लूट व हत्या के दो आरोपी सबूतों के अभाव में बरी
अदालत ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर लगाए सवालिया निशान

 

पूर्वी दिल्ली, 1 अगस्त (नवोदय टाइम्स): कडक़डड़ूमा कोर्ट स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दीपाली शर्मा की अदालत ने नौ साल पुराने लूटपाट और हत्या के मामले में दो लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने फैसला सुनाते हुए पुलिस की कार्यशैली को उजागर करते हुए पुलिस जांच पर सवालिया निशान लगाया। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि इस मामले में आरोपी सन्नी उर्फ  नेपाली और मोहम्मद शाहिद पर आरोप साबित करने के लिए पुलिस कोई पुख्ता सबूत पेश करने में नाकाम साबित हुई है।

आरोपी सन्नी के घर से मृतक के मोबाइल फोन बरामद होने के समय स्थानीय लोगों के बीच से कोई गवाह नहीं है। पुलिस द्वारा अदालत में समक्ष सबूतों को  देख कर लगता है कि पुलिस ने इस मामले में कोई प्रयास ही नहीं किया। मोबाइल बरामदगी के समय जिन पुलिसकर्मियों की मौके पर मौजूदगी दर्ज की गई है, उनमें से दो के बयानों में भी विरोधाभास हैं। एक पुलिसकर्मी ने अदालत में बयान दिया कि मोबाइल दीवार में बनी अलमारी से बरामद किया गया, दूसरे पुलिसकर्मी ने  बयान दिया कि मोबाइल बिना दरवाजे की अल्मारी से बरामद हुआ।

आरोपी की निशनदेही पर वारदात मे प्रयुक्त बरामद चाकू पर खून के निशान का ब्लड गु्रप का भी कोई पता नहीं किया गया। जैकेट पर पाए गए खून का ब्लड ग्रुप  (ओ) बताया गया लेकिन उसका डीएनए विश्लेषण ही नहीं कराया गया। ऐसे में मृतक के ब्लड ग्रुप से मिलने के बावजूद यह साबित नहीं किया जा सकता कि जैकेट से मिला खून उनका ही है। 
 

ये था मामला
15 नवंबर 2013 को गांधी नगर के ज्ञान मोहल्ला गली नंबर तीन में ज्वेलरी की दुकान के पास पुलिस को एक व्यक्ति का शव मिला था। मृतक अजीत नगर निवासी पवित्र कुमार सरकार  शरीर पर चाकू से वार के निशान थे। पुलिस ने लूटपाट व हत्या का मुकदमा दर्ज  कर अजीत नगर में रहने वाले सन्नी उर्फ नेपाली और मोहम्मद शाहिद को गिरफ्तार किया  था।

पुलिस ने दावा किया था कि सन्नी के पास से मृतक का मोबाइल फोन और हत्या में प्रयुक्त चाकू बरामद हुआ था। इसी तरह मोहम्मद शाहिद के पास से मृतक का पर्स मिला था।

बचाव  आरोप था कि पुलिस ने फर्जी साक्ष्य पेश किया हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने और पेश किए गए साक्ष्यों को देखने के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।

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