Saturday, Jan 29, 2022
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up police presents shocking information against kerala journalist kappan in sc musrnt

UP पुलिस ने SC में पेश की केरल के पत्रकार कप्पन के खिलाफ चौंकाने वाली जानकारियां

  • Updated on 12/3/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि केरल स्थित पत्रकार सिद्दीकी कप्पन की गिरफ्तारी से संबंधित मामले की अब तक की जांच से बेहद चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। कप्पन को दलित महिला से कथित रूप से सामूहिक बलात्कार और बाद में उसकी मृत्यु की घटना के सिलसिले में हाथरस जाते हुये रास्ते में गिरफ्तार किया गया था।

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प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे,न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूॢत वी रामासुब्रमणियन की पीठ के समक्ष उप्र सरकार ने कहा, ‘‘कप्पन का दावा है कि वह केरल के एक दैनिक अखबार के लिये पत्रकार के रूप में काम करता है जबकि यह अखबार दो साल पहले ही बंद हो चुका है।’ उप्र सरकार की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा, ‘अब तक की जांच से चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं।’

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शीर्ष अदालत इस पत्रकार की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली केरल यूनियन ऑफ र्विकंग जर्नलिस्ट्स की याचिका पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने याचिकाकर्ता संस्था से जानना चाहा कि क्या वह उच्च न्यायालय जाना चाहेंगे। इस संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि वह शीर्ष अदालत में ही इस मामले में बहस करेंगे और याचिकाकर्ता कप्पन की पत्नी तथा अन्य को भी इसमें शामिल करेगा।

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सिब्बल ने कहा, ‘उच्च न्यायालय ने इसी मामले में एक अन्य आरोपी की बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका पर एक महीने का समय दिया है और इसलिए मैं यहीं पर बहस करना चाहता हूं। मुझे यहीं पर सुनिये।’ मेहता ने कहा कि कप्पन से वकील ने मुलाकात की है और इस मामले में यहां आरोपी पक्षकार नहीं है। सिब्बल ने पत्रकार अर्नब गोस्वमाी के मामले का हवाला दिया, जिन्हें कथित आत्महत्या के लिये उकसाने के मामले में शीर्ष अदालत ने अंतरिम जमानत दी थी, और कहा कि वह इसी फैसले को आधार बनायेंगे क्योंकि इसमें कानून प्रतिपादित किया गया है।

पीठ ने टिप्पणी की, ‘प्रत्येक मामला अलग होता है। आप हमें ऐसा कोई मामला बतायें जिसमे किसी एसोसिएशन ने राहत के लिये न्यायालय में याचिका दायर की हो।’ पीठ ने कहा, ‘हम कानून के अनुसार ही आपको सुनना चाहते हैं और इस मामले पर उच्च न्यायालय में सुनवाई की जानी चाहिए थी।’ इसके साथ ही पीठ ने इस मामले को अगले सप्ताह के लिये सूचीबद्ध कर दिया।

राज्य सरकार ने पीठ से कहा कि वह इस संस्था के जवाबी हलफनामे पर अपना हलफनामा दाखिल करेगी। उप्र पुलिस ने हाल ही में अपने हलफनामे में दावा किया था कि कप्पन पत्रकारिता की आड़े में जातीय कटुता और कानून व्यवस्था की स्थिति बिगाडऩे की योजना से हाथरस जा रहा था। इसके जवाब में याचिकाकर्ता संगठन ने न्यायालय में दाखिल अपने हलफनामे में उप्र पुलिस के इस दावे को ‘पूरी तरह गलत और झूठा’ बताया है कि सिद्दीकी कप्पन पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया का कार्यालय सचिव हैं। संगठन ने दावा किया है कि कप्पन सिर्फ पत्रकार के रूप में ही काम करते हैं। सिद्दीकी कप्पन को पांच अक्टूर को हाथरस जाते समय रास्ते में गिरफ्तार किया गया था।

मथुरा पुलिस ने इस संबंध में दावा किया था कि उसने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से संबंध रखने वाले चार व्यक्तियों को मथुरा में गिरफ्तार किया है उनके नाम- मल्लापुरम निवासी सिद्दीकी, मुजफ्फरनगर निवासी अतीकुर रहमान, बहराइच निवासी मसूद अहमद और रामपुर निवासी आलम हैं।

इस मामले में पुलिस ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया या पीएफआई से कथित रूप से संबंध रखने के आरोप में चार व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के साथ ही गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पीएफआई पर पहले भी इस साल के शुरू में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देशव्यापी विरोध के लिये धन मुहैया कराने के आरोप लग चुके हैं।

हाथरस के एक गांव में 14 सितंबर एक दलित युवती से कथित रूप से सामूहिक बलात्कार हुआ था। इस घटना में बुरी तरह जख्मी युवती की बाद में सफदरजंग अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी। मृतक का रात में ही उसके परिजनों की कथित तौर पर सहमति के बगैर ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था जिसे लेकर जनता में जबर्दस्त आक्रोष व्याप्त हो गया था।

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