Wednesday, Dec 08, 2021
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उपहार अग्निकांड: सबूतों से छेड़छाड़ करने में अंसल बंधु समेत पांच दोषी करार 

  • Updated on 10/8/2021

उपहार अग्निकांड: सबूतों से छेड़छाड़ करने में अंसल बंधु समेत पांच दोषी करार 
 

नई दिल्ली, टीम डिजिटल। पटियाला हाउस स्थित मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पंकज शर्मा की अदालत ने उपहार अग्निकांड से संबंधित मुकदमे के मामले की फाइल से छेड़छाड़ मामले में रियल एस्टेट कारोबारियों सुशील और गोपाल अंसल को दोषी करार दिया है।

इनके अलावा पूर्व अदालतकर्मी दिनेश चंद शर्मा और अंसल बंधुओं के तत्कालीन कर्मी पीपी बत्रा और अनूप सिंह को भी इस जुर्म का दोषी पाया गया है। मामले के दो अन्य आरोपियों हरस्वरूप पंवार व धरमवीर मल्होत्रा की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी है। अदालत अंसल बंधुओं समेत अन्य दाषियों की सजा को लेकर सोमवार को सुनवाई कर सकती है। 

यह मामला वर्ष 1997 में उपहार सिनेमा हॉल में लगी आग से जुड़े मुख्य मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ से जुड़ा हुआ है। अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 201 (सबूत नष्ट करना) 120बी (आपराधिक साजिश) और 409 (किसी लोक सेवक द्वारा अपने स्वामित्व में रखी संपत्ति का आपराधिक हनन करना) के तहत दोषी करार दिया है।

इस मामले में अंसल बंधुओं समेत पांच लोगों को दोषी ठहराए जाने पर उपहार अग्निकांड पीड़ित संघ की अध्यक्ष नीलम कृष्णामूर्ति ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना में मारे गए अपने परिजनों को इंसाफ  दिलाने में करीब ढाई दशक लग गया। लेकिन, उन्हें संतोष है कि इतने बड़े लोगों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए उन्हें एड़ी.चोटी का जोर लगाना पड़ा पर सफलता पाई। ज्ञात रहे कि इस हादसे में नीलम कृष्णामूर्ति ने अपने दोनों बच्चों को खो दिया था। 
ये है मामला

13 जून 1997 को उपहार सिनेमाघर में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी। उस मामले में सुशील और गोपाल अंसल समेत अन्य को आरोपी बनाया गया था। इस मामले की सुनवाई पटियाला हाउस अदालत में चल रही थी। आरोपियों ने संबंधित अदालत के कर्मी दिनेश चंद शर्मा के साथ साजिश रच इस मामले की फाइल से महत्वपूर्ण दस्तावेज फड़वा कर गायब करावा दिया था।

संबंधित अदालत से तथ्य आने पर इस मामले अलग से मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में संबंधित अदालत ने अंसल बंधुओं को दोषी ठहराया था। उन्हें दो साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। उच्चतम न्यायालय ने हालांकि अंसल बंधुओं को जेल में बिताए गए समय को ध्यान में रखते हुए इस शर्त पर रिहा कर दिया था कि वे राष्ट्रीय राजधानी में एक ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के लिए 30-30 करोड़ रुपये का जुर्माना देंगे।
 

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